कांग्रेस का मंसूबा 26/11 हमले को हिंदू आतंकवाद साबित करना था !
   दिनांक 18-फ़रवरी-2020
मारिया ने साफ लिखा है कि इस हमले में आईएसआई, लश्कर ए तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग शामिल था. हालांकि मारिया ने कहीं किताब में कांग्रेस का नाम नहीं लिया है. लेकिन उन्होंने आईएसआई की जिस साजिश का खुलासा किया है, वह कांग्रेस के मंसूबों से मिलती है. क्या ये महज इत्तफाक है.

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मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया की किताब ने एक बार फिर ये सवाल दुनिया के सामने ला दिया है. क्या पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई, लश्कर ए तैयबा और कांग्रेस के नेताओं के बीच 26 नवंबर 2008 को मुंबई पर हुए हमले को लेकर कोई गठजोड़ था. वजह ये कि आईएसआई और लश्कर ए तैयबा इस हमले को हिंदू आतंकवादी घटना के रूप में दुनिया के सामने पेश करना चाहते थे.
वहीं तत्कालीन कांग्रेस सरकार के मंत्री से लेकर नेता तक इस घटना को हिंदू आतंकवाद बताने के लिए पहले से बेताब बैठे थे. भाजपा और आरएसएस के माध्यम से हिंदुओं को बदनाम करने के लिए एक किताब का सहारा भी लिया गया था। अजीज बर्नी से साजिशन एक किताब लिखवाई गई थी। जिस किताब का नाम था 26/11 आरएसएस की साजिश? खास बात ये कि इस किताब का विमोचन दिग्विजय सिंह ने किया था। ये बात अलग है कि कसाब के जिंदा पकड़े जाने से कांग्रेस और आईएसआई का प्लान फेल हुआ, तो उसे मारने की जिम्मेदारी दाऊद गैंग को दे दी गई थी.
मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर राकेश मारिया ने बतौर पुलिस अफसर अपने अनुभवों और घटनाओं को एक किताब में सहेजा है. लेट मी सेट इट नाऊ शीर्षक वाली इस किताब के सामने आते ही तमाम कंकाल ताबूत से निकल आए हैं. मारिया ने साफ लिखा है कि इस हमले में आईएसआई, लश्कर ए तैयबा और दाऊद इब्राहिम गैंग शामिल था. हालांकि मारिया ने कहीं किताब में कांग्रेस का नाम नहीं लिया है. लेकिन उन्होंने आईएसआई की जिस साजिश का खुलासा किया है, वह कांग्रेस के मंसूबों से मिलती है. क्या ये महज इत्तफाक है. मारिया ने लिखा है कि लश्कर का प्लान ये था कि इस हमले को जितना हो सके उतना जनहानि वाला बनाया जाए. सभी आतंकवादियों को आत्मघाती मिशन पर भेजा गया था. यानी सबको लड़ते हुए अपनी जान दे देनी थी. यदि लश्कर का ये प्लान सफल हो जाता, तो मारिया लिखते हैं कि सारे टीवी चैनलों और अखबारों में एक ही हेडलाइन होती- हिंदू आतंकवाद. अखबार चिल्ला रहे होते कि कैसे हिंदू आतंकवादियों ने मुंबई पर अब तक का सबसे खतरनाक हमला किया. कसाब के पास बेंगलुरू की एक फर्जी आईडी थी. जिसमें उसका नाम समीर चौधरी दर्ज था. बाकी आतंकवादियों के पास भी हैदराबाद के अरुणोदय कालेज के पहचान पत्र थे. 
इन सभी में हिंदू नाम थे. मारिया लिखते हैं कि अगर कसाब जिंदा न पकड़ा गया होता, तो बेंगलुरू में उसके फर्जी पते पर पड़ोसियों से इंटरव्यू के लिए टीवी चैनलों की लाइन लग जाती. लेकिन साजिश धरी रह गई. जिसके पास समीर चौधरी का आईडी कार्ड था, वह असल में पाकिस्तान का अजमल कसाब निकला. कसाब के जिंदा पकड़े जाने से आईएसआई बौखला गई. कसाब को मारने की जिम्मेदारी दाऊद गिरोह को दी गई. मारिया लिखते हैं कि हमारी प्राथमिकता कसाब को जिंदा रखना थी. लेकिन मारिया की कलम से निकली बात दूर तलक जाएगी. बात क्या सिर्फ आईएसआई की साजिश पर खत्म हो जाती है. नहीं. बात यहां से शुरू होती है. आईएसआई के प्लान को आगे बढ़ाते हुए हमले के चंद दिन बाद ही एक किताब सामने आती है, जिसमें मुंबई पर हमले को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की साजिश बताने का झूठ का पुलिंदा पेश किया जाता है. इस किताब के विमोचन के लिए कांग्रेस के नेता दिग्विजय सिंह पहुंचते हैं. क्या ये स्वेच्छा थी या फिर आईएसआई का आदेश. बात फिर और आगे निकलती है. पी. चिदंबरम गृह मंत्री रहते हुए हिंदू आतंकवाद का फर्जी शिगूफा खड़ा करने की कोशिश करते हैं. साध्वी प्रज्ञा को गिरफ्तार किया जाता है. कर्नल पुरोहित को झूठा फंसाया जाता है. मारिया की किताब पर गौर करेंगे, तो आरोप और ज्यादा गंभीर नजर आएंगे.
मारिया लिखते हैं कि हमने कसाब की पहचान को छिपाने की पूरी कोशिश की. लेकिन कसाब की पहचान को केंद्रीय एजेंसियों ने लीक कर दिया. आपको याद रखना होगा कि उस समय केंद्रीय एजेंसियां कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार के अधीन थी. कसाब की पहचान को उजागर करके असल में दाऊद के गुर्गों के लिए रास्ता आसान किया गया था. आईएसआई और कांग्रेस का एजेंडा एक जैसा नजर आता है. कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व आज भी भगवा आतंकवाद और हिंदू आतंकवाद जैसे शब्दों से परहेज नहीं करता. और अब तो ये गठजोड़ इस कदर सामने आ चुका है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान संयुक्त राष्ट्र में अपने हक की दलील के तौर पर पेश करते हैं. मुंबई हमला हो या फिर मालेगांव ब्लास्ट. या फिर समझौता एक्सप्रेस हमला. सब जगह एजेंसियां अलग अलग हैं. मसलन मुंबई हमले के समय आईएसआई इसे हिंदू आतंकवाद साबित करना चाहती थी. और मालेगाव ब्लास्ट से लेकर समझौता एक्सप्रेस हमले तक पी. चिदंबरम ने हिंदू आतंकवाद का फर्जी कथ्य तैयार किया.