रामभक्तों पर गोली चलवाने वाले उपद्रवियों की मौत का हिसाब न मांगें: योगी आदित्यनाथ
   दिनांक 20-फ़रवरी-2020
मुलायम सिंह यादव इस बात को अक्सर बड़े गर्व के साथ दोहराते रहे हैं कि उन्होंने अयोध्या में गोली चलवाई थी। आज उन्हीं की पार्टी के लोग उन लोगों की मौत का हिसाब मांग रहे हैं जो सीएए के विरोध में हिंसा करते समय खुद ही हिंसक भीड़ का शिकार हो गए.

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बजट पर हो रही चर्चा के दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादियों की बोलती बंद कर दी। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 'जिन लोगों ने राम भक्तों पर गोली चलवाई ।वो लोग हिंसा में मारे गए लोगों के लिए चिंतित दिख रहे हैं। नागरिकता संशोधन कानून का विरोध करने वालों ने हिंसा फैलाई। उपद्रव कर रहे लोग अपनी ही हिंसा में मारे गए हैं। पुलिस की गोली से कोई मौत नहीं हुई है। अगर कोई मरने के लिये आ रहा है तो जिंदा कहां से रह पाएगा। यदि कोई उपद्रवी किसी निर्दोष को मारने के इरादे से सड़क पर उतरता है और वह पुलिस की चपेट में आ जाता है । ऐसे में या तो पुलिसकर्मी मरे या फिर उपद्रवी मरे। किसी एक को तो मरना ही होगा। मगर सीएए पर हुई हिंसा में कोई भी पुलिस की गोली से नही मरा है ।"
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि "सीएए के खिलाफ हिंसा हम लोगों को कुछ सोचने पर विवश करती है। जामिया मिलिया में हिंसा के बाद मैंने अलीगढ़ जनपद के प्रशासन को सजग रहने के लिए कहा। 15 दिसंबर की रात हजारों की संख्या में छात्र अलीगढ़ में आग लगाना चाहते थे। हिंसा के पीछे पीएफआई जैसे आतंकी संगठन का हाथ था।
आतंकी संगठन पीएफआई करीब 14 वर्षों से पूरे देश में अपना नेटवर्क फैला रहा है. यह आतंकी संगठन पूरे उत्तर प्रदेश में अपनी जड़े जमा चुका है।खासतौर पर शामली , मुजफ्फरनगर, मेरठ, बिजनौर, लखनऊ,बाराबंकी, गोंडा, बहराइच, वाराणसी,
आजमगढ़, गाजियाबाद तथा सीतापुर में इस संगठन के सदस्यों और पदाधिकारियों का बहुत मजबूत नेटवर्क बन चुका है. पीएफआई, आतंकी संगठन सिमी का दूसरा रूप है. यह संगठन काफी समय से उपद्रव करने की साजिश रच रहा था. मौके की तलाश कर रहे पीएफआई ने सीएए और एनआरसी की आड़ लेकर पूरे देश में दंगा कराने का षड्यंत्र रचा. प्रवर्तन निदेशालय और उत्तर प्रदेश पुलिस कई संदिग्ध बैंक खाते खंगाल रही है जिसमे दंगा कराने के लिए रकम जमा कराई गई थी. 19 और 20 दिसंबर 2019 की हिंसा के बाद पुलिस ने पीएफआई के लोगों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया .
जानकारी के अनुसार पूरे प्रदेश में पीएफआई के 108 व्यक्तियों की गिरफ्तारी की गई है जिसमे लखनऊ में 14, सीतापुर में 3, मेरठ में 21, गाजियाबाद में 9, मुजफ्फरनगर में 6, शामली में 7, बिजनौर में 4, वाराणसी में 20, कानपुर में 5, गोंडा में 1, बहराइच में 16, हापुड़ में 1 एवं जौनपुर में 1 व्यक्ति को गिरफ्तार किया गया. उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक हितेश चन्द्र अवस्थी ने बताया कि "वर्ष 2001 में भारत सरकार द्वारा स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया( सिमी) संगठन पर प्रतिबंध लगाया गया. उसके पश्चात दक्षिण भारत के केरल में स्थित नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट, तमिलनाडु में स्थित - मनीथा निधि पसराई और कर्नाटक में स्थित- फोरम फार डिग्निटी, इन तीन संगठनों का सम्मलेन हुआ. उसके बाद 22 नवम्बर 2006 को आतंकी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) का गठन किया गया. पीएफआई के राष्ट्रीय पदाधिकारी के निर्देश पर उत्तर प्रदेश एवं अन्य राज्यों में संगठन के आतंकी अपने संगठनात्मक कार्यों एवं राष्ट्र विरोधी गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश में लगे हुए हैं."
गत वर्ष 19 और 20 दिसंबर की हिंसा में पीएफआई के 25 सदस्य शामिल थे. जिसमें मुख्य रूप से पीएफआई के प्रदेश अध्यक्ष वसीम अहमद, प्रदेश कोषाध्यक्ष नदीम अहमद, डिवीजन इंचार्ज बहराइच एवं बाराबंकी मौलाना अशफाक,डिवीजन इंचार्ज वाराणसी रईस अहमद, एडहॉक कमेटी मेंबर नसीरुद्दीन सहित अन्य कई महत्वपूर्ण पदाधिकारी भी शामिल थे. इन सभी को हिंसा के समय ही गिरफ्तार कर लिया गया था.”