कम नहीं हैं डॉ. कफील के कारनामे
   दिनांक 20-फ़रवरी-2020
इन दिनों टुकड़े-टुकड़े गैंग इस बात से परेशान है कि डॉ. कफील पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा दिया गया. गैंग के लोग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए कह रहे हैं कि उन्होंने एक मुसलमान की रिहाई को रोकने के लिए रासुका का इस्तेमाल किया. जबकि असलियत बिल्कुल अलग है.

kafeel _1  H x
गत दिनों उत्तर प्रदेश सरकार ने डॉ. कफील पर रासुका लगाया तो कफील के कारनामों पर फिर से बहस शुरू हो गई. यह वही कफील है जिसके कारनामों की चर्चा पिछले दो वर्षों से लगातार हो रही है. अभी जिस कारनामे  पर कफील के खिलाफ रासुका के अंतर्गत कार्रवाई की गई है, वह है भड़काऊ भाषण देकर माहौल खराब करने का. जब से नागरिकता संशोधन कानून अस्तित्व में आया है तब से कफील की जुबान बहुत तेज चल रही है. वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, शाहीन बाग़ आदि जगहों पर जाकर मुसलमानों को भड़काने में लगे हुए थे कि अभी यदि एकजुट नहीं हुए तो मुसलमानों को इस देश से बाहॅर जाना पडेगा.
डॉ. कफील की हरकतें पहली बार गोरखपुर में इन्सेफ्लाइटिस में हो रही बच्चों की मौत के प्रकरण में उजागर हुईं थीं. यहां पर बता दें कि इन्सेफ़्लाइटिस की भयावहता से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले से परिचित थे. उनके अपने जनपद की यह ऐसी समस्या थी जिसके लिए उन्होंने कई बार लोकसभा में आवाज उठाई थी. वर्ष 2017 की तारीख 10 और 11 अगस्त को बी.आर.डी. मेडिकल कालेज, गोरखपुर में 32 मासूम एवं 18 अन्य गंभीर मरीजों की मृत्यु हो गई. बगैर किसी प्रकार की जांच कराए डॉ. कफील ने यह खबर फैलाई कि इन सभी की मृत्यु ऑक्सीजन की कमी से हुई है. इस घटना के ठीक एक दिन पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कालेज की समीक्षा बैठक ली थी. उनके निरीक्षण के दौरान कफील उनके साथ थे. अगर ऑक्सीजन सिलेंडर कम पड़ रहे थे तो कफील को यह बात मुख्यमंत्री के संज्ञान में लानी चाहिए थी. उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया? कफील परचेज कमेटी के सदस्य भी थे. उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की स्थिति के बारे में पूरी जानकारी थी. बजाय प्राइवेट अस्पताल से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाने के वह अपने अधिकार का प्रयोग करके ऑक्सीजन सिलेंडर खरीद सकते थे मगर उन्होंने ऐसा नहीं किया. बड़ी संख्या में हुई मृत्यु पर जब - जब वहां टी.वी. चैनल की टीम पहुंची. सभी को कफील ने ही इंटरव्यू दिया और यह कहा कि “आक्सीजन सिलेंडर की कमी से बच्चों की मौत हुई है.” जबकि अन्य डाक्टर मरीजों के इलाज में लगे हुए थे.
दरअसल, कफील पहले से ही सरकार को बदनाम करने की फिराक में थे. गोरखपुर एवं आस - पास के जनपदों में इन्सेफ़्लाइटिस, वर्षों पुरानी समस्या थी. इस जानलेवा बीमारी से बड़ी संख्या में छोटे बच्चों की मृत्यु हो रही थी. इस बीमारी का गर्मी और बारिश के मौसम में ज्यादा प्रकोप रहता था. 19 मार्च 2017 को योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. मात्र एक महीने बाद, गर्मी का मौसम आ गया और इस बीमारी ने गोरखपुर एवं आस-पास के जनपदों में रह रहे लोगों को चपेट में ले लिया. मरीजों की संख्या अधिक हो गई. उस अनुपात में ऑक्सीजन सिलेंडर को लेकर आपूर्ति बढ़ाई गई थी. 10 और 11 अगस्त 2017 को हुई मौत पर टी.वी चैनलों पर प्रमुखता से खबर प्रसारित की गई और विपक्ष के नेताओं ने हंगामा भी किया. बस ! यही वह अवसर था जब कफील ने दोतरफा चाल चली. पहले तो कफील ने यह बात जोर- शोर से प्रचारित किया कि मेडिकल कालेज में बच्चों की जिन्दगी बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर नहीं थे. दूसरे उन्होंने निजी अस्पतालों से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगवा कर खुद को मसीहा के जैसा दर्शाया जबकि वह खुद बीआरडी मेडिकल कालेज की परचेज कमेटी के सदस्य थे.
कफील गिरफ्तार हुआ गोरखपुर में विरोध -प्रदर्शन हुआ था एएमयू में
कफील के मन में पहले से बैर था. अपने काले मन से वह इस फिराक में लगे हुए थे कि कैसे भाजपा की सरकार को बदनाम किया जाय. किसी भी तरह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की छवि पर बट्टा लगाया जाए. बच्चों की हो रही मौत के उस खौफनाक मंज़र को भुनाने में वह तनिक भी नहीं हिचकिचाए. इसके बाद कफील को गिरफ्तार करके जेल भेजा गया. कफील की गिरफ्तारी तो गोरखपुर में हुई मगर इसके विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बंद करा दिया गया. अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय वो जगह है जहां पूरे हिन्दुस्थान में जहां कहीं भी कोई मुसलमान आतंकी मारा जाता है या कफील सरीखे लोग गिरफ्तार किए जाते हैं. तब सरकार की इस कार्रवाई का वहां पर विरोध किया जाता है. नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को जब बंद कराया गया तो उपद्रवी छात्रों के समर्थन में छिपते हुए कफील वहां तक पहुंचे. वहां पहुंच कर संविधान और राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के खिलाफ जहर उगलने में कोई कोर – कसर बाकी नहीं रखी.
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में कफील बकायदा शामिल हुआ. 12 दिसंबर 2019 को कफील ने अलीगढ़ में कहा कि "जब मुझे गिरफ्तार किया गया था तब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय बंद हुआ था. यहां पर विरोध हुआ था. मैं कैसे न आता. हर हाल में यहां पर पहुंचना, मेरा फर्ज बनता था.”
कफील ने नफरत फ़ैलाने वाले अपने भाषण में कहा कि “तुम्हारी औकात नहीं है जो हमसे हमारा हक़ छीन सको. तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हमें डरा सको. तुम्हारी औकात नहीं है कि तुम हमें हटा सको. हम 25 करोड़ हैं. तुम हमें ये छोटे – छोटे कानून बना कर डरा सकते हो. हम एक साथ रहेंगे. हम एक साथ दीवार बन कर खड़े रहेंगे.
इसके बाद अलीगढ़ जनपद में कफील के खिलाफ भड़काऊ भाषण देने एवं माहौल खराब करने के आरोप में एफ.आई.आर दर्ज की गई. कफील फरार हो गया. उनकी तलाश में उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फ़ोर्स (एसटीएफ) को लगाया गया. काफी दिन फरार रहने के बाद कफील एसटीएफ की गिरफ्त में आया. उसे 29 जनवरी को मुम्बई में गिरफ्तार किया गया. इसके बाद उन्हें जेल भेज दिया गया था. 10 फरवरी को उसे अलीगढ़ जनपद न्यायालय से जमानत मिल गई. इस बीच शासन और प्रशासन ने कफील के मसले पर गंभीरतापूर्वक विचार किया. जमानत पर रिहा होने से पूर्व कफील के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून ( रासुका) के अंतर्गत कार्रवाई की गई.