विकास में हो भारतीय अवधारणा
   दिनांक 26-फ़रवरी-2020
भारतीय अर्थचिंतन की अवधारणाओं से अवगत कराते हुए कहा कि 1500 वर्ष तक भारत का पूरे विश्व की जीडीपी में 31 फीसदी योगदान रहा था,
 
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दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ करते श्री कप्तान सिंह सोलंकी
 
‘‘विकास का भारतीय मॉडल ही समृद्धि, रोजगार, सुख और शांति का आधार है।’’ उक्त बात स्वदेशी जागरण मंच के उत्तर भारत के संगठक एवं अखिल भारतीय सह विचार विभाग प्रमुख श्री सतीश कुमार ने कही। वे पिछले दिनों श्रद्धेय दत्तोपंत ठेंगड़ी जन्मशताब्दी समारोह के उपलक्ष्य में महारानी लक्ष्मीबाई शारीरिक प्रशिक्षण संस्थान, ग्वालियर में ‘विकास की अवधारणा’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम को बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे। उन्होंने भारतीय अर्थचिंतन की अवधारणाओं से अवगत कराते हुए कहा कि 1500 वर्ष तक भारत का पूरे विश्व की जीडीपी में 31 फीसदी योगदान रहा था, जबकि अमेरिका, चीन का अपने-अपने सर्वोच्च समय में जीडीपी का हिस्सा 21 व 22 प्रतिशत तक ही सिमटकर रहा। उस पर भी इन देशों ने पर्यावरण को अत्यधिक नुकसान पहुंचाया। जबकि भारत ने पर्यावरण संतुलन को न केवल बनाकर रखा, बल्कि उसकी शुद्धता के उपाय भी किए। इसलिए आज देश को ऐसे ही विकास मॉडल की आवश्यकता है। इस अवसर पर कार्यक्रम के अध्यक्ष पूर्व राज्यपाल श्री कप्तान सिंह सोलंकी ने भी अपने विचार व्यक्त किए।