भारतीय संस्कृति मानवीय मूल्यों का संदेश देती है
   दिनांक 26-फ़रवरी-2020
अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख श्री रामलाल ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि हिंदुस्थान का इतिहास जिस तरह से लिखा गया है,
 
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मंच पर विराजमान (बाएं से) सर्वश्री गजेंद्र चौहान, मृदुला सिन्हा, ओम बिरला एवं रामलालविमर्श को संबोधित करते 
 
 
प्रेरणा जनसंचार एवं शोध संस्थान, नोएडा और गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के जनसंचार संस्थान के संयुक्त प्रयास से विश्वविद्यालय में प्रेरणा विमर्श-2020 का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के समापन समारोह में लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला उपस्थित थे। इस मौके पर अपने विचार व्यक्त करते हुए
 
उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति मानवीय मूल्यों और भाईचारे का संदेश देती है। भारत मजबूत लोकतंत्र है, यह लोकतंत्र हमारी पुरातन संस्कृति है, यह आजादी के बाद मिला लोकतंत्र नहीं है। भारत इतनी पुरानी संस्कृति है, जिसे न मुगल मिटा सके, न अंग्रेज। इस लोकतंत्र में मीडिया की अभिव्यक्ति की आजादी महत्वपूर्ण स्थान रखती है। विमर्श में विशेष रूप से उपस्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय सह संपर्क प्रमुख श्री रामलाल ने कहा कि दुर्भाग्य की बात है कि हिंदुस्थान का इतिहास जिस तरह से लिखा गया है, उसमें अनेक ऐसे महापुरुषों को स्थान नहीं दिया गया, जो असल मायनों में भारत की विरासत हैं। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री अरुण कुमार ने भारत को भारत के दृष्टिकोण से समझने के लिए सुझावों का उल्लेख किया।
 
उन्होंने कहा कि भारत को अगर भारत के दृष्टिकोण से समझना है तो विकिपीडिया नहीं पढ़ना चाहिए। भारत के बारे में किसी विदेशी लेखक का साहित्य नहीं पढ़ना चाहिए, क्योंकि विदेशी लेखकों ने भारत को जितने टुकड़ों में बांटना था, वह तय किया और फिर बाकायदा विमर्श खड़ा किया। उसके बाद उस विमर्श पर अकादमिक आधार खड़ा किया। इसलिए पश्चिमी जगत के चश्मे से भारत को कभी नहीं समझा जा सकता। भारत को भारत की दृष्टि से ही जाना जा सकता है। इस दौरान भाजपा के राष्ट्रीय सह संगठन महामंत्री सर्वश्री शिव प्रकाश, वरिष्ठ प्रचारक अशोक बेरी, माखनलाल चतुर्वेदी विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति श्री जगदीश उपासने, पाञ्चजन्य के संपादक श्री हितेश शंकर एवं आॅर्गनाइजर के संपादक श्री प्रफुल्ल केतकर ने भी अपने विचार रखे।