जिहादी हिंसा के खिलाफ खड़े हुए दिल्ली के युवा
    दिनांक 28-फ़रवरी-2020

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उत्तरी पूर्वी दिल्ली में अमेरिकी राष्ट्रपति के दिल्ली आगमन के साथ शुरू हुए दंगों की क्रोनोलॉजी स्पष्ट है। इसे दिल्ली के लोग समझ रहे हैं। समुदाय विशेष के जिहादी मानसिकता के लोग दुनिया भर की मीडिया का ध्यान अपनी तरफ आकर्षित करना चाहते थे लेकिन उनके ध्यान आकर्षित कराए जाने की कीमत अब दिल्ली चुका रही है। कितने मासूमों की जान चली गई। कितनी बच्चे अनाथ हुए। कितनी मांओं की कोख उजड़ गई। उसके बावजूद जो जिहादी मानसिकता है, वह अपनी गलती पर पश्चाताप करने को तैयार नहीं।
आज हिंसा की इसी मानसिकता को जवाब देने के लिए दिल्ली के युवा एक साथ जंतर मंतर पर इकट्ठे हुए। यह शांति मार्च 'यूथ अगेंस्ट जिहादी वायलेंस' के बैनर तले निकला।
गैर सरकारी संगठन 'युवा' के समन्वयक रजनीश जिन्दल के अनुसार — ''यह यात्रा दिल्ली पुलिस के कांस्टेबल रतन लाल और आईबी से जुड़े रहे अंकित शर्मा को समर्पित थी। वास्तव में दिल्ली के लिए इन दो योद्धाओं ने अपनी जिन्दगी दे दी। आज दिल्ली के युवा इन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए जंतर मंतर पर एकत्रित हुए।''
इस मार्च में शामिल जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्राध्यापक डॉ प्रवेश चौधरी ने कहा कि ''यूनिफार्म सीविल कोड पर जब बात करते थे उस समय उनके सामने मुस्लिमों का पढ़ा लिखा तबका सामने होता था। यदि उस वक्त भी आज की तरह मुसलमान तलवार निकाल कर सड़क पर आ जाता, बंदूक निकाल कर सड़क पर आ जाता, तेजाब हाथों में लेकर सड़क पर आ जाता तो हो सकता था कि संविधान बनाने के समय जाफराबाद जैसी घटना उनके सामने भी हो जाती।'' इस शांति मार्च में हिस्सा लेने के लिए भारी संख्या में युवाओं की मौजूदगी जंतर मंतर पर दिखी। इस दौरान जंतर मंतर से लेकर दिल्ली पुलिस के अशोक रोड़ स्थित नए मुख्यालय तक लोगों ने पैदल मार्च किया।

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मार्च के दौरान उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई हिंसा और दंगों पर स्लोगन और नारे बोले जाते रहे। इस मार्च में युवा शक्ति ने हाथों में तिरंगा लिया था और उनके होंठों पर शांति की अपील थी। सड़क पर यह यात्रा अनुशासित तरीके से निकली। यात्रा में शामिल युवाओं ने कतारबद्ध होकर मार्च निकाला। इस दौरान पुलिस और सुरक्षाबलों ने मुस्तैदी के साथ शांति मार्च को सुरक्षा दी। यात्रा में शामिल युवाओं ने उन्हें याद किया जो जिहादी हिंसा में अपनी जान खो चुके हैंं। जो घायल है। जिनका ईलाज गुरू तेग बहादूर अस्पताल में चल रहा है। जो बेगुनाह थे लेकिन समुदाय विशेष की सनक की वजह से मारे गए।
शांति की अपील के साथ—साथ वहां समाज को जागरूक और सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया गया। ताकि समाज में किसी तरह की अफवाह या गलत जानकारी ना फैले। दंगों के कारण बिगड़े हुए इस माहौल में युवाओं की यह मार्च शांति की तरफ एक कदम है। सभी इस उम्मीद में वहां से लौटे कि अब हाल सुधारेंगे। इस तरह की छोटी—छोटी ही दिल्ली को नई रोशनी दिखाएगी।
कार्यक्रम में सभी समुदाय के लोगों की भागीदारी रही। हर समुदाय के लोगों की एक ही प्रार्थना थी कि ''हिंसा ग्रस्त इलाकों में इस यात्रा से भाईचारे और सौहार्द का संदेश जाए। दिल्ली फिर एक बार पूरे जोश के साथ उठ खड़ी हो। आगे बढ़ने के लिए।