नहीं रहे वरिष्ठ प्रचारक धनप्रकाश जी
   दिनांक 03-फ़रवरी-2020
a_1  H x W: 0 x 
 
रा.स्व. संघ के वरिष्ठतम प्रचारक श्री धनप्रकाश जी का पिछले दिनों जयपुर में निधन हो गया। उन्होंने भारती भवन में अंतिम सांस ली। इसी माह 10 जनवरी को उनका 103वां जन्मदिन मनाया गया था। स्व. धनप्रकाश जी देश के उन चुनिंदा प्रचारकों में से एक थे, जिन्हें संघ के सभी सरसंघचालकों का सान्निध्य और उनके साथ काम करने का सौभाग्य मिला। उम्र के अंतिम पड़ाव तक लेखन और अध्ययन में अपना समय व्यतीत करते थे। संघ के इतिहास में कई उतार-चढ़ाव के साक्षी रहे स्व.धनप्रकाश जी ने विभिन्न दायित्वों का निर्वहन करते हुए कठिन चुनौतियों के बीच अपने जीवन का लंबा समय व्यतीत किया। संघ में प्रचारक वृत्ति एक कठिन साधना है। लगातार काम, प्रवास और अपने स्वास्थ्य की उपेक्षा के कारण अधिकांश प्रचारक जीवन के आठ दशक भी पूरे नहीं कर पाते। लेकिन धन प्रकाश जी एक स्वयंसेवकत्व को चरितार्थ करते हुए अपने अंतिम समय तक दैनिक काम स्वयं करते रहे। वे चाहते तो सहयोगी ले सकते थे, लेकिन उन्होंने कभी दूसरों को कष्ट देना उचित नहीं समझा। वह संघ कार्यालय पहुंचने वाले सभी स्वयंसेवकों से खुलकर बातचीत करते और सहज भाव से मनोविनोद कर लेना उनका स्वभाव था। उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के महेपुरा गांव में जन्मे धनप्रकाश ने 1942 में दिल्ली से संघ का प्राथमिक शिक्षा वर्ग, 1943 में प्रथम वर्ष, 1944 में द्वितीय वर्ष तथा 47 में संघ शिक्षा का तृतीय वर्ष का प्रशिक्षण लिया। केन्द्र सरकार में नौकरी त्याग कर अपना पूरा जीवन संघ को दे दिया। वर्ष 1943 में दिल्ली के संघ विस्तारक बने। सहारनपुर नगर, अलीगढ़ नगर, अम्बाला, हिसार, गुरुग्राम, शिमला एवं होशियारपुर में संघ के विभिन्न दायित्वों का निर्वाह किया। संघ पर लगे प्रथम प्रतिबन्ध के समय धनप्रकाश जी जेल में भी रहे। 1965 से 1971 तक जयपुर विभाग प्रचारक के रूप में दायित्व संभाला। इसके बाद सेवा भारती, विद्याभारती की जिम्मेदारी भी उन पर रही। कठिन चुनौतियों और प्रतिकूलताओं के बीच उन्होंने अपने जीवन का लंबा समय भारतीय मजदूर संघ के काम को खड़ा करने और उसको मजबूत करने में लगाया।