शाहीनबाग में फायरिंग करने वाला कपिल केजरीवाल का आदमी निकला
   दिनांक 05-फ़रवरी-2020
शाहीन बाग में पकड़ा गया कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता निकला। संजय सिंह और आतिशी मार्लेना उसे आम आदमी पार्टी में शामिल कराते हैं। यह कैसी मक्कारी है? छल—कपट और धूर्तता आम आदमी पार्टी का मूल चरित्र है

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देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक दिन पहले सोमवार को पूर्वी दिल्ली के कड़कड़डूमा स्थित सीबीडी ग्राउंड में कहते हैं, शाहीन बाग का प्रदर्शन संयोग नहीं प्रयोग है। और अगले ही दिन उस प्रयोग की गिरह खुलनी शुरू हो जाती है।
दल्लूपुरा के रहने वाले कपिल गुर्जर को दिल्ली पुलिस ने शाहीन बाग में फायरिंग करते हुए पकड़ा था। उसके बाद दिल्ली पुलिस पर आम आदमी पार्टी, कांग्रेस और वामपंथी गिरोह ने मिलकर कई तरह के आक्षेप लगाए। अब दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है कि कपिल गुर्जर आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता है। यह जानकारी उसके फोन से रिकवर की गई तस्वीरों से सामने आई है। कपिल ने अपने मोबाइल से आम आदमी पार्टी से जुड़ने के सारे सबूत मिटा दिए थे। पुलिस की जांच में डिलीट की गई वह सारी तस्वीरें रिकवर होकर सामने आ गई हैं। जिसमें वह आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह और कालकाजी पार्टी से पार्टी की उम्मीदवार आतिशी मार्लेना के साथ दिख रहा है। पुलिस की पूछताछ में कपिल ने बताया कि पिछले साल ही उसने पार्टी की सदस्यता ली है।
कपिल से पहले उसे पार्टी की सदस्यता दिलाने वाली आतिशी मार्लेना के संबंध में दो बातें जान लेते हैं। आतिशी मार्लेना आम आदमी पार्टी की वही कार्यकर्ता हैं, जिसने 2019 के लोकसभा चुनाव में गौतम गम्भीर के खिलाफ पर्चा दाखिल किया था। उस वक्त अचानक कॉमरेड मार्लेना को चुनावी रणनीति को ध्यान में रखकर अपना ठाकुर होना और सिंह सरनेम याद आ गया था। ठीक चुनाव से पहले वे आतिशी सिंह हो गई थीं। यह सब उसी तरह से हुआ जैसे अरविन्द केजरीवाल को बीते रविवार को याद आया कि वे श्री हनुमान के बहुत बड़े भक्त हैं और उन्होंने एक टीवी चैनल पर हनुमान चालीसा का पाठ करके सुनाया।
छल—कपट और धूर्तता आम आदमी पार्टी का मूल चरित्र है। इसी का परिणाम है कि प्रशांत भूषण, योगेन्द्र यादव, किरण बेदी, कुमार विश्वास, कपिल मिश्रा, आशुतोष गुप्ता, आशीष खेतान जैसे आप के सभी प्रमुख चेहरे पार्टी को विदा कहके चले गए। अरविन्द ने जिस तरह अन्ना हजारे का इस्तेमाल किया और पूरे देश से एक तरह का छल किया, उसके बाद अरविन्द के लिए लिखते पढ़ते एक कहानी याद आई। यह कहानी है, सुदर्शन की कहानी 'हार की जीत'। इस कहानी में बाबा भारती का घोड़ा डाकू खड़गसिंह अपाहिज बनकर छल से उनसे छीन लेता है और बाबा भारती कहते हैं— घोड़ा ले जाते हो तो ले जाओ लेकिन इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना। लोगों को इस घटना का पता चला तो वे दीन दुखियों पर विश्वास नहीं करेंगे।
शाहीन बाग में जो प्रयोग अरविन्द केजरीवाल कर रहे थे, उस खेल के वे पुराने मंझे हुए खिलाड़ी हैं। आतिशी मार्लेना के संसदीय क्षेत्र में पिछले साल एक पर्चा बंटा था। जिसके बाद गौतम गम्भीर पर आतिशी ने बेहद गम्भीर आरोप लगाए थे। आम आदमी पार्टी के इस कपट का जवाब गौतम गम्भीर के दोस्तों ने दिया। उन्होंने गौतम पर अपना विश्वास जताया और कहा कि गौतम चुनाव जीतने के लिए इस तरह की हरकत नहीं कर सकते। जिसके बाद आतिशी मार्लेना की बहुत किरकिरी हुई थी। पूर्वी दिल्ली की लोकसभा सीट पर गौतम गम्भीर को 3.9 लाख मतों से विजय मिली थी और आतिशी का सारा झूठ धरा का धरा रह गया था।
आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ता कपिल गुर्जर ने फायरिंग के बाद घटनास्थल पर 'जय श्रीराम' का नारा लगाया। यह भी कहा कि यहां सिर्फ हिन्दुओं की चलेगी। इन सारी हरकतों से वह क्या हासिल करना चाह रहा था? आपने सोचा? वास्तव में वह दिल्ली के आसन्न विधानसभा चुनावों को नजर में रखते हुए अपनी गतिविधियों को अंजाम दे रहा था। वह अपनी हरकत से आम आदमी पार्टी के आईटी सेल वालों को, कट्टरपंथियों और वामपंथ के अफवाह तंत्र को सोशल मीडिया पर जहर बोने के लिए कच्चा माल उपलब्ध करा रहा था।
अब जब अरविन्द की पोल खुलनी तय हो गई थी। अरविन्द एक खबरिया चैनल पर शाहीन बाग के धरने को नौटंकी कहते हुए नजर आए। उन्होंने यह तक कह दिया कि शाहीन बाग का ड्रामा दस दिनों से अधिक नहीं चलेगा।
आम आदमी पार्टी का जन्म ही झूठ और मक्कारी की बुनियाद पर हुआ है। बहरहाल कहीं ऐसा न हो जाए कि अन्ना आंदोलन के धरना से जिस पार्टी का जन्म हुआ है। शाहीन बाग का धरना उस पार्टी के इतिहास का आखिरी अध्याय साबित हो।