'आप' की साजिशों में नहीं फंसेगी दिल्ली
   दिनांक 07-फ़रवरी-2020
​दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के ओएडी रहे अफसर की गिरफ्तारी होती है। शाहीन बाग में गोली चलाने वाला आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता निकलता है, दिल्ली सब देख रही है, साजिशों में फंसने वाली नहीं

election _1  H
दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले सीबीआई ने 2 लाख रु. की रिश्वत लेने के आरोप में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के ओएसडी जीके माधव समेत 2 लोगों को गिरफ्तार किया। सीबीआई के मुताबिक, आईएएस अफसर माधव 2015 में सिसोदिया का ओएसडी नियुक्त हुआ था। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक दिन पहले ही (बुधवार) दूसरे ओरोपी धीरज गुप्ता को पकड़ा था, जो घूसकांड में बिचौलिए की भूमिका निभा रहा था।
दिल्ली में चुनाव तो हैं हीं, लेकिन उससे भी बढ़कर एक चीज है. यह है आम आदमी पार्टी की साजिशों का जाल. जो शाहीन बाग से लेकर हनुमान जी तक फैला हुआ है. जाल तो बहुत शातिर तरीके से बुना गया है, लेकिन जनता भी मूर्ख नहीं है. आज दिल्ली का चुनाव आम आदमी पार्टी की पांच मुख्य साजिशों का चक्रव्यूह है. इसमें देश तोड़क ताकतें हैं, इसमें भ्रष्टाचार है, इसमें फ्री की रेवड़ियां हैं, इसमें हनुमान जी के साथ धोखा है. पूरे देश की निगाह दिल्ली पर है. इसलिए कि क्या दिल्ली इन साजिशों को समझती है या फिर उनमें फंस जाती है.
पूरे देश की निगाह दिल्ली के चुनाव पर लगी है. बहुत से महानगरों में पार्षदों की सीट पर मतदाताओं की संख्या दिल्ली की विधानसभा के मतदाताओं से ज्यादा होती है. फिर भी ये चुनाव सबकी निगाह में है. क्यों. इसलिए कि दिल्ली आज ऐतिहासिक मोड़ पर खड़ी है. देश की राजधानी के लोग जब वोट डालने निकलेंगे तो किसकी झोली भरेंगे, ये सवाल सबके मुंह पर है. एक तरफ भारतीय जनता पार्टी है, जो पूरी ताकत के साथ मैदान में उतरी है. दूसरी तरफ अन्ना आंदोलन से जन्मा राजनीतिक विकल्प आम आदमी पार्टी अपने अस्तित्व की सबसे बड़ी परीक्षा में है. कांग्रेस को चुनाव में बहुत सीरियस प्लेयर नहीं माना जा रहा है, तो ये देश की सबसे बुजुर्ग पार्टी की मौजूदा हकीकत के अनुरूप ही है.
साजिश-1 शाहीन बाग
दिल्ली में चुनाव जिस माहौल में हो रहा है, वह अपने आप में अनूठा है. नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में शाहीन बाग में दो महीने से धरना चल रहा है. इस धरने की हकीकत धीरे-धीरे खुली, तो पूरा देश दंग है. कैसे देश तोड़ने की साजिश को दिल्ली में बुना गया. पीएफआई के सौजन्य से दिल्ली की सड़कों पर कब्जा जमाकर किराये की भीड़ जुटाई जाती है, बिरयानी की दावतों के दौर चलते हैं. और इस सबके बीच क्या होता... इन्हें जिन्ना वाली आजादी चाहिए. अब जिन्हें जिन्ना वाली आजादी चाहिए, उनके समर्थक कौन है. दिल्ली की आप सरकार के उप मुख्यमंत्री मनीष मनीष सिसोदिया तो खुलेआम ताल ठोककर कह रहे हैं, मैं शाहीन बाग के साथ खड़ा हूं. यानी आम आदमी पार्टी वहां दिए जाने वाले जहरीले और विभाजक भाषणों के साथ खड़ी है. उस सोच के साथ खड़ी है, तो देश को तोड़ना चाहते हैं. आप सिर्फ इनके साथ खड़ी नहीं है. देशभर में सीएए के खिलाफ हिंसा फैलाने के आरोपी पीएफआई के साथ कांग्रेस के राज्यसभा के सांसद संजय सिंह के करीबी रिश्तों और संपर्कों की पुष्टि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) कर रहा है. कांग्रेस की तो खैर बात ही क्या है. उसके तो नेता तक शाहीन बाग के मंच की शोभा बढ़ा चुके हैं. हद ये है कि कांग्रेस के प्रवक्ता सुझाव देते हैं कि 25 करोड़ मुसलमानों के लिए एक और बंटवारा कर दिया जाए.
साजिश-2 फायरिंग
दिल्ली की जनता जब वोट देगी, तो देश ये देखना चाहता है कि दिल्ली के लोग किसके साथ हैं. क्या वे जिन्ना वाली आजादी वाले लोगों के साथ हैं, या अखंड भारत के साथ. वे लोग शरजील इमाम के नार्थ ईस्ट को देश से काटने के प्लान के साथ तो नहीं हैं. वे लोग पाकिस्तान जिंदाबाद का नारा लगाने वालों के साथ तो नहीं हैं. वे लोग जामिया और दिल्ली की तमाम सड़कों पर सीएए के खिलाफ हुई जिहादी हिंसा के साथ तो नहीं हैं. ये चुनाव असल में षडयंत्रों का चुनाव है. इस षडयंत्र की एक कड़ी दिल्ली पुलिस ने खोल दी. शाहीन बाग में फायरिंग करने वाला कपिल गुर्जर नाम का शख्स आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता निकला है. वह संजय सिंह और आतिशी के हाथों आप की टोपी पहनता है. यानी आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता नकली हिंदूवादी बनकर फायरिंग करता है और फिर उसके बाद आम आदमी पार्टी के नेता चैनलों पर बैठकर कहते हैं कि ये देश किस तरफ जा रहा है. उन्हें पता होना चाहिए कि ये देश बहुत जागरुक है. यह ऐसी चालबाजियों को जानता है, समझता है और सबक सिखाता है.
साजिश-3 फ्री की रेवड़ी
आप सरकार ने नारा दिया है, अच्छे बीते पांच साल. कैसे भला. पूरे देश को तो ये पता था कि साढ़े चार साल तक अरविंद केजरीवाल सरकार को भाजपा और उप राज्यपाल ने मिलकर काम ही नहीं करने दिया. पूरे देश को तो ये पता था कि ये फर्जी डिग्रीधारियों की सरकार है. पूरे देश को तो ये पता था कि अरविंद केजरीवाल ने आंदोलन से उपजी शक्ति को व्यक्ति केंद्रित पार्टी में तब्दील कर दिया.
साजिश-4 ईमानदारी के चोले में भ्रष्टाचार
चुनाव की बेला पर दिल्ली के उप मुख्यमंत्री के ओएसडी को केंद्रीय जांच ब्यूरो ने गिरफ्तार किया है. जनाब जीएसटी के एक मामले में जुर्माना रफा-दफा कराने के लिए रिश्वत लेते हुए पकड़े गए हैं. एक ओएसडी का किसी सरकार में इतना दखल नहीं होता कि वह जीएसटी का जुर्माना रफा-दफा करा दे. जाहिर है, वह सरकार के किसी ऐसे ताकतवर आदमी के लिए काम कर रहा था, जो यह करा सकता हो. दिल्ली खूब जानती है कि ये रकम आखिरकार कहां पहुंचनी थी. चुनाव से पहले परिवहन विभाग के कार्यालय में आग लगती है. तमाम दस्तावेज राख हो जाते हैं. दिल्ली जानती है कि ऐसी आग क्या छिपाने के लिए लगाई जाती है.