दंगा पीड़ितों के जख्म हरे कर रहा खिलखिलाते केजरीवाल का मुआवजा विज्ञापन
   दिनांक 01-मार्च-2020
 
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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की दंगों पर राजनीति जारी है। शनिवार को हिंदी और अंग्रेजी अखबारों में उनके हंसते चेहरे के साथ छपे फुल पेज विज्ञापन ने एक बार फिर दंगा पीड़ितों के दिल को ठेस पहुंचाई है। उनके जख्मों को फिर से हरा कर दिया है। सच्चाई तो यह है कि जब दिल्ली को उनकी आम आदमी पार्टी के नेता जलाने का काम कर रहे थे, तब अरविंद केजरीवाल घर से ट्वीट करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर रहे थे, क्योंकि वे अपनी सांप्रदायिक राजनीति के सहारे वोटों की फसल काट चुके थे। उनकी पार्टी 62 सीटों के साथ भारी बहुमत से सरकार बना चुकी थी। दिल्ली का उत्तर-पूर्वी क्षेत्र चार दिन दिन जलता रहा, लेकिन वो या उनके बाकी नेता घर से नहीं निकले। शाहीनबाग, जामिया और जेएनयू के साथ खड़े उनके नायाब मनीष सिसोदिया भी नजर नहीं आए। अरविंद केजरीवाल दंगा प्रभावित क्षेत्रों में जाने के बजाय अपने पुराने अनशन वाले अंदाज में महात्मा गांधी के स्मृति स्थल राजघाट पर मौन धारण करके जरूर बैठ गए।
दिल्ली के लगभग सभी अखबारों में छपे केजरीवाल के विज्ञापन में हर एक जान और चीज की कीमत लगाई गई है। खिलखिलाते मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इंसान से लेकर जानवर तक की जान को रुपयों में तोलने की तैयारी की है। मुआवजा देने के नाम पर 10 लाख से लेकर 5000 रुपए के 12 स्लैब तैयार कराए हैं।
क्या इन पैसों से वो विष कम हो जाएगा, जो 70 से ज्यादा दिनों से शाहीन बाग से फैलाया जा रहा है। हद तो यह हुई है कि आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन ने हिंदुओं पर सबसे ज्यादा कहर ढहाया। ढेरों प्रमाण सामने आए, जिनमें साफ था कि आईबी अफसर अंकित शर्मा की हत्या ताहिर हुसैन की शह पर हुई। ताहिर के घर से सैकड़ों उन्मादियों की भीड़ तेजाब, नुकीले पत्थर, पेट्रोल बम फेंक रही थी। ताहिर की आतंक की फैक्ट्री से मौत का सामान मिला। ताहिर के घर के करीब स्थित नाले से अंकित शर्मा समेत कुछ और शव मिल चुके हैं, लेकिन बेशर्मी यह कि केजरीवाल अंत तक ताहिर हुसैन के साथ खड़े रहे। जब पुलिस ने अंकित शर्मा की परिजनों की ओर से ताहिर हुसैन के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज की, तब कहीं जाकर केजरीवाल ने मजबूरी में ताहिर को पार्टी से निलंबित किया, लेकिन शाहीन बाग के मास्टर माइंड अपने विधायक अमानतुल्लाह खान के सहारे केजरीवाल अब भी ताहिर समेत उन्मादियों को बचाते दिख रहे हैं। अमानतुल्लाह खान लगातार ताहिर हुसैन को निर्दोष बता रहा है।
जब कोर्ट ने कहा तो केजरीवाल ने दंगा प्रभावित कुछ क्षेत्रों में दौरा करने का नाटक किया, लेकिन जमीन पर उन्हें यह बात समझ में आ गई कि जनता को मुफ्त की बिजली और पानी के सहारे बरगला तो लिया है, लेकिन सीएए विरोधी गैंग ने उनका खेल बिगाड़ दिया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को जनता के गुस्से का भारी सामना करना पड़ रहा है। दिल्ली पुलिस के शहीद हेड कांस्टेबिल रतनलाल के परिवार से जब वो मिलने पहुंचे तो जनता ने उन्हें और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को उल्टे पैर दौड़ा दिया। कुछ और जगहों पर उन्हें भारी जनाक्रोश का सामना करना पड़ा।
जनता के गुस्से को देखते हुए मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने एक और राजनीतिक चाल चल दी है। उन्होंने शुक्रवार को आनन-फानन में जवाहर लाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष और लोकसभा चुनाव में बिहार की बेगूसराय सीट से 4 लाख वोटों से पराजित हुए कन्हैया कुमार, उसके सहयोगी उमर खालिद समेत कुछ लोगों पर देशद्रोह का केस चलाने की अनुमति दे दी। इस फाइल पर अरविंद केजरीवाल कुंडली मारकर बैठे थे। इस समय देशद्रोह के केस की अनुमति देकर अरविंद केजरीवाल केवल और केवल ताहिर हुसैन से जनता का ध्यान हटाना चाहते हैं और लोगों की नाराजगी को कम करना चाहते हैं, लेकिन केजरीवाल की यह चाल अब कामयाब नहीं होगी।