दिल्ली दंगा: संसद में तेजस्वी सूर्या ने की विपक्ष की बोलती बंद
   दिनांक 12-मार्च-2020
बेंगलुरु साउथ संसदीय सीट सांसद बने भाजपा के सबसे युवा सांसद तेजस्वी सूर्या ने लोकसभा में दिल्ली दंगों के लिए भाजपा को घेरने पर कांग्रेस के साथ-साथ पूरे विपक्ष को आईना दिखा दिया

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सूर्या ने संसद में दिल्ली दंगों पर हुई बहस में कई ऐसे तथ्यों को उजागर किया, जिन्हें लिबरल ब्रिगेड छुपाने का प्रयास कर रही थी। सांसद तेजस्वी सूर्या ने अपनी बात कहते हुए कई तथ्य उजागर किए। सूर्या ने कहा कि सीएए का विरोध प्रदर्शन करते हुए मजहब के नाम पर इस्लामिक कट्टरपंथियों ने महिलाओं को अपना सुरक्षा कवच बनाया
जब दिल्ली दंगों पर बहस के दौरान संसद में विपक्ष ने कपिल मिश्रा के बयान का मुद्दा उठाकर सरकार को दिल्ली दंगों का दोषी बताने का प्रयास किया। जिस पर तेजस्वी सूर्या ने पलटवार करते हुए कहा कि पिछले दो महीनों में कई कट्टरपंथी नारों ‘जिन्ना वाली आज़ादी’, ‘हिंदुओं से आज़ादी’, ‘काफ़िरों की आज़ादी’ जैसे नारों की गूंज सुनाई दी है। उन्होंने साफ-साफ कहा कि ‘सीएए मुस्लिम विरोधी तो नहीं है, पर ये प्रदर्शन हिन्दू विरोधी जरूरत थे।’
तेजस्वी ने अपनी बात को विस्तार में रखते हुए प्रदर्शन के दौरान ‘तेरा मेरा रिश्ता क्या? ला इलाह इल्लाल्लाह’ जैसे नारों का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इन सांप्रदायिक लोगों को मासूम बताने में विपक्ष और कई बुद्धिजीवी कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सूर्या ने कहा कि सीएए विरोध के नाम पर लोगों में तरह-तरह से अफवाहें फैलाई गईं।
उन्होंने  पूर्ववर्ती सरकारों के कार्यकाल के दौरान हुए दंगों और सांप्रदायिक हिंसा की कई घटनाओं पर भी रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मैंने देखा है और समझा है कि कैसे कांग्रेस दंगों की इंजीनयरिंग में विशेषज्ञ बन चुकी है। सीएए जब संवैधानिक रूप से पारित हुआ तो कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने भीड़ को संबोधित कर कहा कि ये आर-पार की लड़ाई है और आप सभी लोग इसके खिलाफ लड़ें। इसके अगले ही दिन शाहीन बाग में प्रदर्शन शुरू हो जाते हैं। जेएनयू से लेकर जामिया तक हिंसक प्रदर्शन शुरू हो गए और इनमें जो नारे सुने गए वो तो बेहद शर्मनाक थे।
सूर्या ने कहा कि इन सीएए विरोधी प्रदर्शनों का एक ही उद्देश्य था – भारत की छवि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बिगाड़ना। उन्होंने उमर खालिद के भाषण का उदाहरण भी दिया। इसके साथ ही तेजस्वी ने पत्रकार जे गोपीकृष्णन के आरोप का भी हवाला दिया, जिसमें उन्होंने बताया कि कैसे भारत की छवि खराब करने वाला लेख लिखने के लिए जे गोपीकृष्णन को 1500 डॉलर का ऑफर मिला था। तेजस्वी ने संसद में अवसरवादियों और विपक्ष को जमकर खरी-खरी सुनाई।