दिल्ली दंगा: कट्टरपंथी चेहरे, षडयंत्र गहरे

    दिनांक 12-मार्च-2020   
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दिल्‍ली हिंसा ने पश्चिमी यूपी के दामन पर भी नए दाग लगाए दिए हैं। राजधानी में बाहर से दंगा लश्‍कर भेजने भेजने और खून-खराबा कर भागे खूंखार चेहरों को पनाह देने में इसी वेस्‍ट एरिया का नाम आया है। वैसे तो इस भूभाग का दंगा-फसाद और आतंकवाद से कनेक्‍शन पुराना है। यहां के कट्टरवादी-दागी मुस्लिम चेहरों का मजहबी उन्माद से गह‍रा याराना है

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दिल्‍ली से इस क्षेत्र की जितनी दूरियां कम हैं। इसके हिस्‍से में दंगा-फसाद और आतंक के उतने ही ज्‍यादा गम हैं। स्‍याह सच ये भी है कि वेस्‍ट की इस जमीन को अब ऐसा खौफनाक पॉकेट बनाने की साजिश हो रही है, जहां देश-दुनिया में शांति के दुश्‍मन प्रश्रय पा जाते हैं। आकाओं के कहने पर दंगाई कहीं भी चले जाते हैं। आग लगाते हैं। खून बहाते हैं। छिपने को फिर बेखौफ यहां चले आते हैं। पिस्‍टल वाले दंगाई शाहरूख की तरह जो दिल्‍ली से भागा तो बरेली पहुंचा। फिर सहारनपुर के पास शामली में मेहमान बनकर चिकन-बिरियानी उड़ाता रहा। अब दिल्‍ली के दंगाई कानून के जाल में फंस रहे हैं तो उनके आका भी बेनकाब होते नजर आ रहे हैं।
दिल्‍ली दहलाने को वेस्‍ट यूपी से भेजा दंगा लश्‍कर
पुलिस-गुप्‍तचर एजेंसियों की जांच में यह बात साबित हो गई है कि उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली की हिंसा सुनियोजित भी थी और प्रायोजित भी । गृहमंत्रालय के मुताबिक, दिल्‍ली को दहलाने के लिए यूपी से, खासतौर पर पश्चिमी यूपी से दंगाइयों की बड़ी फौज भेजी गई थी। साजिश अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दिल्‍ली को दहलाने की थी । आकाओं के इशारे पर दंगाइयों ने हथियार, गोली-बारूद, तलवारों के जखीरे जगह-जगह जुटा लिए थे। सीएए के विरोध में धरना-प्रदर्शन की आड़ में बरेली,संभल, मुजफ्फरनगर, शामली, सहारनपुर, अलीगढ़ से बड़ी संख्‍या में लोग दिल्‍ली बुला लिए गए थे। इसमें तमाम महिलाएं भी शामिल थीं। इस बाहरी भीड़ के पीछे ऐसा दंगा रैकेट काम कर रहा था, जिनका मंसूबा पूरी दिल्‍ली में हिंसा कराकर भारत पर बदनामी का दाग लगाना था। उत्‍तर-पूर्वी दिल्‍ली में हिंसा शुरू होते ही केन्‍द्र ने हर तरफ अर्धसैनिक बल मुस्‍तैद कर दिए। गृहमंत्री अमित शाह ने कमान संभाली तो राष्‍ट्रीय रक्षा सलाहकार अजित डोभाल भी मैदान में आ गए। इससे दंगा कराने वाले आकाओं के के मंसूबे फेल हो गए। दंगाई शाहरुख की शामली से गिरफ्तारी के बाद जांच एजेंसियों को उपद्रवियों का वेस्‍ट यूपी कनेक्‍शन पता लग गया। जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है तो एक-एक कर दंगाई और उनके पनाहगार भी बेपरदा हो रहे हैं। पुलिस का कहना है कि बाकी दंगाइयों के पकड़े जाने के बाद और भी बड़े राज खुलना तय हैं।

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सोशल मीडिया पर बनाए फर्जी अकाउंट
जांच में पता लगा है कि दिल्‍ली में दंगा भड़काने के लिए सोशल मीडिया पर तमाम फर्जी अकाउंट बनाए गए थे। दंगाइयों के पास पैसे भी पहुंचाए गए थे। केन्‍द्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने बताया कि दिल्ली दंगों के समय पैसा भेजने वाले तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है। दिल्‍ली की जनता ने दंगा नियंत्रण में सुरक्षा एजेंसियों का पूरा साथ दिया। हजारों की संख्‍या में वीडियो फुटेज भेजकर दंगाइयों की पहचान में पुलिस की मदद की है। चेहरा पहचाने वाले शॉफ्टवेयर के माध्यम से 1100 से अधिक दंगाई बेनकाब हुए और उन पर कानूनी शिकंजा कसा गया। पुलिस हिंसा के दौरानल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की पहचान कर उनसे वसूली की कार्रवाई में जुटी है।
स्‍मगलिंग से दंगे-फसाद तक...सब जायज
दिल्‍ली दंगों के खलनायक शाहरुख का बरेली से पुराना नाता है। परिवार वैसे तो पंजाब का रहने वाला है मगर लंबे समय तक बरेली के मीरगंज टाउन में रहा है। पुलिस के मुताबिक, शाहरुख का पिता साबिर राणा ड्रग तस्‍करी में कई बार पकड़ा जा चुका है। मादक पदार्थों की तस्‍करी में उसने खूब दौलत कमाई। यूपी, दिल्‍ली, पंजाब की जेलों में बंद रहा है। पुलिस और खुफिया एजेंसियों के निशाने पर आने के बाद साबिर दिल्‍ली छोड़ गया था। कई साल से वह दिल्‍ली के घोंडा इलाके में रह रहा है। मीरगंज के खानपुरा मोहल्‍ले का रहने वाला उसके साढ़ू बब्‍बू का भी ड्रग सिंडीकेट से कनेक्‍शन सामने आया है। वह दिल्‍ली में एक करोड़ की हेरोइन के साथ पकड़ा गया था। कई साल दिल्‍ली जेल में बंद रहा। बब्‍बू का दामाद शान भी बरेली का हिस्‍ट्रीशीटर है। पुलिस लगातार उसकी निगरानी कर रही है। शाहरुख की मौसी का बेटा सलमान भी दिल्‍ली में उसके साथ ही रहता था। फसाद के दौरान पिस्‍टल से ताबड़तोड़ गोलियां चलाते हुए शाहरुख के फोटो-वीडियो वायरल होने के बाद सलमान भी गायब हो गया। दिल्‍ली पुलिस की छानबीन में पता लगा कि शाहरुख दिल्‍ली से भागकर पहले जालंधर, पंजाब गया था और वहां से बरेली आया था। बरेली से शामली जाकर अपने करीबी के ठिकाने पर छिप गया। दिल्‍ली क्राइम ब्रांच मशक्‍कत के बाद उसे पकड़ सकी। परिवार और रिश्‍तेदारी में कई लोगों के नाम ड्रग तस्‍करी और खतरनाक अपराधों में शामिल रहे हैं। अब शाहरुख का चेहरा दंगाई के रूप में सामने आने के बाद यह बात साफ हो गई है कि इनके लिए सब कुछ जायज है। गुनाह के रास्‍ते पर चलकर पैसा कमाने के साथ दंगे-फसाद कर बेगुनाहों का खून बहाना भी।
पिस्‍टलमैन शाहरुख के हथियार तस्‍करों से रिश्‍ते
दिल्‍ली दंगे में बड़ा विलेन बनकर उभरा पिस्‍टलबाज शाहरुख के हथियार तस्‍करों से सम्‍बंधों का भी सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जाफराबाद में उपद्रव के वक्‍त गोलियां चलाने में उसने जिस सेमी ऑटोमेटिक पिस्‍टल का इस्‍तेमाल किया था, वह बिहार के मुंगेर से मंगाई गई थी। अकेला शाहरुख ही नहीं, दंगाई भीड़ में उसके साथ कई और लोग भी हथियारों से लैस नजर आ रहे थे। सुनियोजित हिंसा का इससे बड़ा प्रमाण क्‍या हो सकता है। बिहार से दिल्‍ली में हथियारों की तस्‍करी करने वाले वाला रैकेट भी पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के टार्गेट पर है। शाहरुख धार्मिक उन्‍मादी है, इसके सबूत भी पुलिस के हाथ लगे हैं। सोशल नेटवर्किंग साइट टिकटॉक पर उसने कई ऐसे फोटो अपलोड किए थे, जो उसकी कट्टरता साबित करने के लिए काफी हैं।
घरों में दंगाई मेहमान, कौन-कौन मेजबान
पुलिस सूत्रों का कहना है कि शाहरुख को शरण देने के मामले में अभी पश्चिमी यूपी में कुछ लोगों पर शिकंजा कसा जाना बाकी है। दंगे के वक्‍त ही शाहरुख के पिस्‍टल लहराते-गोलियां चलाते वीडियो-फोटो वायरल हुए थे। इसके बाद भी उसे बरेली-शामली और अन्य जगहों पर छिपने को जगह दी गई, यह और भी बड़ी साजिश का हिस्‍सा है। एक शाहरुख नहीं, उसके जैसे कितने ही और उपद्रवियों के भी दिल्‍ली से भागकर पश्चिमी यूपी के शहरों में छिपने की जानकारी जांच टीमों को मिली है। सब कुछ जानते हुए भी दंगाइयों को अपने यहां पनाह देने वाले कौन हैं, इसकी छानबीन में पुलिस जुटी हैं। पश्चिमी यूपी मुस्लिम बहुल हैं। मुस्लिम आबादी का राष्‍ट्रीय औसत जहां 14 फीसदी के आसपास हैं, वहीं पश्चिमी यूपी में यह आबादी 27 प्रतिशत से भी अधिक बताई जाती है। रामपुर में 50.57 प्रतिशत, मुरादाबाद में 47.12 प्रतिशत, बिजनौर 43 प्रतिशत, सहारनपुर 42 प्रतिशत, मुजफ्फरनगर 42 प्रतिशत, जेपी नगर 40 प्रतिशत के करीब है। बरेली, अलीगढ़, में मुस्लिम जनसंख्‍या 30 फीसदी से करीब है। यही वजह है कि पाकिस्‍तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इन इलाकों में पैठ बनाने को लगातार कोशिश कर रही हैं। समय-समय पर सुरक्षा एजेंसियों के हत्‍थे चढ़े आईएसआई एजेंटों से पूछताछ में सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। इन शहरों में आइईएसआई के स्‍लीपिंग सेल बड़ी संख्‍या में काम कर रहे हैं। यही वो इलाके हैं, जहां दंगों ने सबसे ज्‍यादा घाव दिए हैं। सीएए और एनआरसी के विरोध के बहाने संभल, अलीगढ़, मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, रामपुर समेत वेस्‍ट यूपी का शायद ही ऐसा कोई शहर बचा होगा, जहां मुस्लिम भीड़ ने हिंसा या इसकी कोशिश न की हो। करोड़ों रुपये की सरकारी संपत्ति आग के हवाले कर दी। सुरक्षा बलों पर जमकर हमले किए। जैसे तैसे यूपी में हिंसा की आग ठंडी हुई तो सुनियोजित तरीके से दिल्‍ली में वैसा ही तांडव करा दिया गया। इससे साफ पता लगता है कि दिल्‍ली और वेस्‍ट यूपी की हिंसा का गहरा कनेक्‍शन है ।
बरेली से सहारनपुर तक कट्टरता की पौध
नागरिकता विरोधी कानून की आड़ में हिंसक विरोध-प्रदर्शनों को लेकर नया खुलासा हुआ है। पश्चिमी यूपी में सुनियोजित तरीके से कट्टर सोच और मजहबी उन्‍माद को बढ़ावा दिया जा रहा है। सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ, मुरादाबाद, संभल, अलीगढ़ व आसपास के दूसरे शहरों ने आजादी के बाद न जाने कितने दंगे झेले हैं। हर बार पश्चिमी यूपी में दंगों की आग कट्टरपंथियों के आंगन से ही शुरू हुई है। हाल में देश के विभिन्‍न शहरों में हिंसा के बीच सामने आए पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को यूएई, सउदी अरब, बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान से लगातार फंडिंग मिल रही है। खासतौर पर पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश में, जहां सबसे ज्यादा उपद्रव किए गए। गृह मंत्रालय ने पीएफआई को लेकर रिपोर्ट तैयार की है। यूपी में पुलिस ने सीएए विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के सिलसिले में 25 पीएफआई कार्यकर्ताओं को मेरठ, शामली, मुजफ्फरनगर औऱ लखनऊ से गिरफ्तार किया। पीएफआई का शीर्ष नेतृत्व केरल से जुड़ा है। बताया जाता है कि यह संगठन मुस्लिम युवाओं को इस्लाम की अति रूढ़िवादी विचारधारा की ओर लाकर उन्हें कट्टर बनाता है। गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में कहा गया है कि पीएफआई के कर्ताधर्ता रेहाब फॉउंडेशन, द इंडियन सोशल फोरम और द इंडियन फ्रेटरनिटी फोरम सरीखे मुखौटा संगठनों के बैनर तले संयुक्त अरब अमीरात में सक्रिय हैं। पीएफआई के नेतृत्व ने अल आईन, दुबई में लुलु हाइपर मार्केट के पीछे अपना कार्यालय खोल रखा है। इसके साथ ही इस्लामिक कट्टरता फैलाने में संगठन सक्रिय है। बेहरीन, यूएई, कुवैत और सउदी अरब में सक्रिय द इंडियन फ्रेटरनिटी फोरम कट्टर इस्लाम के लिए धन जुटाता है। पीएफआई के पदाधिकारी समय-समय पर इन देशों का दौरा करते हैं और भारतीय मुस्लिम युवकों को रोजगार के बहाने वहां संगठन की विचारधारा के प्रचार-प्रसार के लिए भेजते हैं। 22 नवंबर 2006 को तीन समूहों कर्नाटक फोरम फॉर डिग्निटी, नेशनल डेवलपमेंट फंड (केरल) और मनीथा नीथि पसारई (तमिलनाडु) के विलय से बने पीएफआई की जड़े आज कहीं अधिक गहरे पैठ बना चुकी हैं. पीएफआई हजारों कार्यकर्ता बना चुका है। मंत्रालय की रिपोर्ट में पीएफआई को प्रतिबंधित सिमी का ही उत्तराधिकारी बताया गया है. पीएफआई एक अन्य संगठन पीएफआई यूथ विंग (माओ) भी चलाता है, जिसके प्रतिबंधित कम्यूनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (माओवादी) से संबंध है। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने पीएफआई के प्रेसिडेंट परवेज और सेक्रेटरी इलियास को गिरफ्तार कर लिया है। दोनों पर शाहीन बाग में लोगों को फंड दिलाने का आरोप है। सीएए और एनआरसी के खिलाफ पोस्टर बांटने और लोगों को भड़काने के आरोप में एक शख्स की गिरफ्तारी पहले भी की जा चुकी है। गिरफ्तार दानिश त्रिलोकपुरी का रहने वाला है। वह पीएफआई की विंग 'काउंटर इंटेलिजेंस' का प्रमुख है। जामिया में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन के कॉर्डिनेशन से जुड़ा था। पुलिस यह जांच कर रही है कि दानिश व उसके नेटवर्क के सदस्‍य किस तरीके से काम कर रहे हैं और किस तरीके से फंडिंग करा रहे हैं। पुलिस कई संदिग्धों के फोन व बैंक अकाउंट भी खंगाल रही है। इससे पहले जामिया नगर से एक कश्मीरी दंपती भी पकड़े जा चुके हैं जो सीएए खिलाफ धरने पर बैठे लोगों को भड़काने और उकसाने का काम करते थे। उनके पास से काफी जिहादी मेटेरियल भी बरामद हुआ था।
दागी नेता, जहरीले बोल
धार्मिक उन्‍माद भड़काकर कहीं भी दंगे कराने की साजिशें हों या आतंकी वारदातों की लंबी-चौड़ी फेहरिस्‍त, बार-बार इनके तार वेस्‍ट यूपी से जुड़ते नजर आते हैं। माहौल बिगाड़ने को लेकर ऐसे मुस्लिम कट्टरपंथी चेहरे भी बेनकाब होते रहे हैं, जो राष्‍ट्रवाद और हिंदू समाज के खिलाफ जुबान से जहर उगलने का कोई मौका नहीं छोड़ते। जिनके खुद के दामन दागदार हैं, वे प्रधानमंत्री-गृहमंत्री के खिलाफ सार्वजनिक मंचों से असभ्‍य और भड़काऊ भाषा बोलकर बार-बार माहौल गरमाते हैं।

मौलाना तौकीर रजा खां

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मौलाना तौकीर रजा खां बरेली के आला हजरत परिवार से हैं और इत्‍तहादे मिल्‍लत काउंसिल के अध्‍यक्ष हैं। बरेली में हुए 2010 के दंगों के मामले में पुलिस ने तौकीर को जेल भेजा था। मुस्लिम तुष्‍टीकरण का ही खेल था जो उस समय की मायावती सरकार ने तुरंत तौकीर को न केवल जेल से रिहा करा दिया था, बल्कि उनके खिलाफ दर्ज केस भी वापस ले लिया था। 2012 में बनी सपा की अखिलेश यादव सरकार ने तौकीर को लालबत्‍ती देकर राज्‍यमंत्री पद से नवाजा था। आम आदमी पार्टी के मुखिया एवं दिल्‍ली सीएम अरविंद केजरीवाल से भी इनका बड़ा दोस्‍ताना है। केजरीवाल तौकीर से चुनावी समर्थन मांगते देखे जाते हैं। मुस्लिमों को लामबंद करने के लिए तौकीर देवबंद जाकर पंचायतें लगाते हैं। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी से भी गलबहियां करते हैं। जब भी मौका मिलता है तो खुले मंचों से हिंदू समाज के खिलाफ आग उगलते हैं। पीएम-गृहमंत्री को आतंकवादी कहकर मुस्लिम भीड़ से तालियां बजवाते हैं। कहते हैं कि सड़कों पर खून बहाने से इंकलाब आता है। सीएए के विरोध में तौकीर ने हाल के दिनों में बरेली और मुरादाबाद में ऐसी जहरीली बातें कहीं कि पुलिस को उनके खिलाफ मुकदमे दर्ज करने पड़े।
शफीकुर्रहमान बर्क

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 शफीकुर्रहमान बर्क संभल से समाजवादी पार्टी के सांसद हैं। पहले बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी थे, अब सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खास सिपहसलार माने जाते हैं। पिछले दिनों में सीएए के विरोध के बहाने संभल में मुस्लिम भीड़ ने भारी उपद्रव किया। सरकारी वाहन फूंक दिए। करोड़ों की सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया। संभल हिंसा मामले में पुलिस ने सांसद बर्क और यहां के सपा जिलाध्‍यक्ष फिरोज खां अदि के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। फिरोज को जेल में बंद सपा नेता आजम खां का बेहद करीबी माना जाता है। पुलिस को उपद्रवियों के घरों की तलाशी में बड़ी संख्‍या में हथियार, कारतूस, तलवारें, चाकू मिले थे। हिंसा में 55 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।
आजम खान

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जहरीले बयानों को लेकर कुख्‍यात रामपुर से सपा सांसद आजम खान तमाम आपराधिक मामलों में सलाखों के पीछे हैं। इनके खिलाफ 80 से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। पत्‍नी तंजीन फातिमा और बेटा अब्‍दुल्‍ला भी जेल में बंद हैं। आजम का विवादों से गहरा नाता है। भारत माता के खिलाफ उनकी टिप्‍पणी को देशवासी जुबान पर भी लाना पसंद नहीं करते। वह भारतीय सेना को भी निशाना बना चुके हैं। कश्मीर का जिक्र करते हुए आजम ने एक बार यह तक कह डाला था कि सेना बलात्कार के मामलों में शामिल रहती है। हिंदू महिलाओं के खिलाफ इनकी जुबान से निकले शब्‍द सुनने से भी घिन आती है। मुजफफरनगर दंगों के समय आजम सपा सरकार के सबसे मजबूत मंत्रियों में से एक थे। आरोप लगा था कि उस समय आजम ने उपद्रवियों की भीड़ पर कार्रवाई नहीं करने के लिए पुलिस पर दवाब बनाया था। इसे लेकर बड़ा सियासी तूफान उठा था।

याकूब कुरैशी
 
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याकूब कुरैशी मेरठ से ताल्‍लुक रखते हैं। यूपी की सपा-बसपा सरकार में मंत्री रहे हैं। विवादित और भड़काऊ बयानों को लेकर चर्चा में रहते हैं। फ्रांस की राजधानी पेरिस में फ्रेंच पत्रिका चार्ली एब्दो पर हुए आतंकी हमले का उन्‍होंने खुलकर बचाव किया था। हमलावरों को 51 करोड़ रुपये का इनाम तक देने की बात तक बेशर्मी से कह डाली था। याकूब ने हमले के बाद कहा था कि जो भी अनादर करेगा, वह मौत को बुलावा देगा। उसी तरह कार्टूनिस्टों और पत्रकारों ने पेरिस में अपनी मौत को बुलावा दिया था। याकूब प्रधानमंत्री को लेकर भी बेहद शर्मनाक बयानबाजी करते रहे हैं। उनके खिलाफ भी कई आपराधिक मामले दर्ज हैं।
आतंकी मोहरे लगा रहे बदनामी के दाग
केन्‍द्र में नरेन्‍द्र मोदी और उत्‍तर प्रदेश में योगी सरकार बनने के बाद से आतंकी गतिविधियों में कमी आई है। केन्‍द्र व राज्‍य की सुरक्षा एजेंसियों वेस्‍ट यूपी पर सतर्क निगाह रखे हैं, क्‍योंकि इस क्षेत्र में आतंकी नेटवर्क की जड़ें गहरी हैं और देश में सबसे ज्‍यादा दंगे भी यही हुए हैं। अलीगढ़, सहारनपुर, शामली, मेरठ, मुजफफरनगर, गाजियाबाद, बरेली, संभल, मुरादाबाद में आईएसआई की पैठ का स्‍याह सच लगातार सामने आता रहा है। देश के जिस हिस्‍से में भी आतंकी घटनाएं हुईं, उनके तार वेस्‍ट यूपी के इन जिलों से हर बार जुड़ते नजर आए हैं।
पुलिस के मुताबिक, गुजरात के अक्षरधाम मंदिर पर आतंकी हमले का सूत्रधार चांद बरेली के पुराने शहर का रहने वाला था । बंंगलुरू के विज्ञान मंदिर (आईआईएस) पर टेररिस्‍ट अटैक का मास्‍टरमाइंड इरफान बंजारा भी बरेली का निवासी था। कोलार की एक मस्जिद में इमाम रहते हुए उसने हमले की साजिश रची थी। बरेली के सीबीगंज से पकड़ा गया मुबारक कश्‍मीरी मस्जिदों में रहकर युवाओं को भारतीय सेना के खिलाफ भड़काता था। आईएसआई और उसके द्वारा पैदा किए गए आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा का भी वेस्‍ट यूपी ऑपरेशनल फील्‍ड रहा है। युवाओं को कट्टरपंथी सोच में ढालने से लेकर उन्हें आतंकी संगठनों में भर्ती करने और ट्रेनिंग एवं फंड मुहैया कराने का नेटवर्क चलाने का खुलासा कई बार हुआ है। लश्कर के अलावा इस्लामिक स्टेट (आईएस), अलकायदा और बांग्लादेशी आतंकी संगठनों के मददगार इस क्षेत्र में रहे हैं। राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए 2018 में लश्कर आतंकी अब्दुल नईम शेख को हवाला के जरिए मुजफफरनगर से टेरर फंडिंग किए जाने का खुलासा कर चुकी है। यूपी एटीएस ने अगस्त, 2017 में अंसारूल बांग्ला टीम (एबीटी) आतंकी संगठन के अब्दुल्ला अल मैमन को मुजफ्फरनगर से से गिरफ्तार किया था। उसने कबूला था कि वह एबीटी के सदस्यों को यहां बसने में मदद करता है। उसके पास से फर्जी आधार कार्ड एवं अन्य दस्तावेज बरामद किए गए थे। उसकी निशानदेही पर सितंबर में तीन और युवाओं को गिरफ्तार किया गया। ये तीनो दारूल उलूम देवबंद से फरार हो गए थे। आतंकी नेटवर्क में शामिल कई लोग देवबंद और सहारनपुर से कई बार पकड़े जा चुके हैं। दिल्ली पुलिस ने जून, 2016 में कोर्ट में दायर चार्जशीट में पश्चिमी यूपी के संभल जिले को अलकायदा इन इंडियन सब कांटीनेंट (एक्यूआईएस) का गढ़ करार दिया था। 17 आरोपियों के खिलाफ दायर चार्जशीट के अनुसार ये लोग संभल को एक्यूआईएस का अड्डा बनाने की साजिश में शामिल थे। इन 17 लोगों में छह संभल के ही थे। दो को गिरफ्तार कर लिया गया था। उनमें मौलाना आसिम उमर आतंकी गिरोह का सरगना है और फिलहाल पाकिस्तान में रहकर युवाओं को आतंकवाद के लिए उकसाने और उन्हें पाकिस्तान में ट्रेनिंग दिलाने के काम में जुटा है।