एयरफोर्स अधिकारियों की हत्या के मामले में यासीन मलिक समेत सात पर 30 साल बाद तय हुए हत्या के आरोप
   दिनांक 15-मार्च-2020
 
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जम्मू-कश्मीर में 30 साल पहले पांच एयरफोर्स अधिकारियों की हत्या के मामले में टाडा कोर्ट जम्मू (TADA court Jammu) ने शनिवार को जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (jammu kashmir liberation front, JKLF) के मुखिया यासीन मलिक (Yasin Malik) समेत सात अन्य पर टाडा कानून व आर्म्‍स एक्ट के तहत आरोप तय कर दिए हैं। कोर्ट ने मामले में यासीन के अलावा अली मुहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुश्तफा, जावेद अहमद मीर उर्फ नालका, नाना जी उर्फ सलीम, जावेद अहमद जरगर व शौकत अहमद बख्शी पर आरोप तय किए हैं।
अभियोजन की ओर से सीबीआई जांच में सामने आए तथ्यों को कोर्ट के समक्ष रखा गया। अभियोजन के अनुसार आरोपी शौकत अहमद बख्शी वारदात से पूर्व अप्रैल-मई 1989 और सितंबर-अक्तूबर 1989 में पाकिस्तान गया। वहां उसने आरोपी अमान उल्ला खान से मिलकर वायुसैनिकों समेत सुरक्षा बलों पर हमले की साजिश रची। पाकिस्तान से लौटने पर शौकत ने यासीन मलिक, जावेद अहमद मीर उर्फ नलका, मुश्ताक अहमद लोन, नाना जी उर्फ सलीम, मोहम्मद रफीक डार उर्फ गुलाम हसन, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुस्तफा, जावेद अहमद जरगर और अन्यों के साथ हमले की साजिश साझा की।
डॉ. गुलाम कादिर सोफी ने हमले को अंजाम देने के लिए हकम बाग रावलपोरा में अपना घर आतंकी ठिकाने के लिए उपलब्ध करवा दिया। पूरे हमले की तैयारी और हथियारों का इंतजाम यहीं से किया गया। आरोपियों ने नीले रंग की मारुति कार जेकेई-3575 को अली मोहम्मद मीर से हासिल किया। इसके बाद 25 जनवरी 1990 की सुबह 7.30 बजे यासीन मलिक और जावेद अहमद मीर उर्फ नलका बाइक नंबर जेकेडी-3705 पर पीछे बैठे।
वे एके राइफल से लैस थे। बाइक को मुश्ताक अहमद लोन चला रहा था। यह तीनों हमले के लिए निर्धारित जगह रावलपोरा की ओर निकले। वहीं अन्य आरोपी मारुति कार के जरिये हमले वाली जगह पर पहुंच गए। हमलावरों ने कार का इंजन स्टार्ट रखा। बाइक सवार आतंकियों ने पहुंचते ही वायुसैनिकों पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। सात वायुसैनिक इसकी चपेट में आए जिनमें से एयरमैन ए अहमद, वीयू शेखर और बीएस धोनी की मौत हो गई।
वहीं पास में ही घात लगाकर बैठे दूसरे ग्रुप ने 10 से 15 वायुसैनिकों पर फायरिंग शुरू कर दी। इसमें एक महिला समेत तीन वायुसैनिक घायल हो गए। इसी दौरान यासीन मलिक ने एके राइफल की एक मैग्जीन को गोलियां दागकर खत्म किया और फिर मैग्जीन बदल कर फिर से गोलियां दागीं। भागते समय यासीन मलिक को दो और वायुसेना अफसर नजर आए जिन पर मलिक ने फिर से फायरिंग की। इनमें से आरके खन्ना ने दम तोड़ दिया।