हिंदी के उत्थान के लिए एकजुट हुए साहित्यकार
   दिनांक 16-मार्च-2020
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समापन सत्र में ‘ख्वाहिशें अपनी-अपनी’ का लोकार्पण करते हुए बंडारू दत्तात्रेय, साथ में हैं शांता कुमार
 
पिछले दिनों सोलन (हिमाचल प्रदेश) के संस्कृत महाविद्यालय में ‘हिंदी साहित्य सम्मेलन’ का 72वां अधिवेशन आयोजित हुआ। उल्लेखनीय है कि हिंदी साहित्य सम्मेलन 110 वर्ष पुराना है। तीन दिवसीय इस अधिवेशन का उद्घाटन हिमाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार ने दीप प्रज्ज्वलित करके किया। इसके बाद उन्होंने श्याम कृष्ण पाण्डेय और डॉ. रचना सिंह की पुस्तक ‘युवा पहल-संघर्ष : आजादी’ का लोकार्पण किया।
 
इस अवसर पर सम्मेलन के सभापति प्रो. सूर्यप्रसाद दीक्षित, प्रधान मंत्री विभूति मिश्र और पद्मश्री प्रो. अभिराज राजेंद्र मिश्र उपस्थित थे। दूसरे दिन सुबह के सत्र में साहित्य परिषद् में परिसंवाद का विषय था- ‘हिमाचल की साहित्य संपदा’। इसकी अध्यक्षता साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक ने की। दोपहर के सत्र में परिसंवाद का विषय था- ‘एक राष्ट्र, एक राष्ट्रभाषा’। इसमें 30 से अधिक वक्ताओं ने विचार रखे।
 
वक्ताओं ने कहा कि सभी भारतीय भाषाओं की बड़ी बहन होने के नाते हिंदी सभी प्रांतीय भाषाओं और बोलियों की संरक्षक भी है और सम्मेलन हिंदी समेत सभी प्रांतीय भाषाओं के विकास के लिए समर्पित है। दूसरे दिन की शाम कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
 
तीसरे दिन सुबह के सत्र में परिसंवाद का विषय था ‘वैचारिक प्रदूषण : कारण और निवारण’। समापन सत्र में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय और शांता कुमार विशेष रूप से उपस्थित थे। दोनों ने गरिमा संजय के नए उपन्यास ‘ख्वाहिशें अपनी-अपनी’ का लोकार्पण भी किया।
 
बंडारू दत्तात्रेय ने अपने उद्बोधन में हिंदी के प्रचार-प्रसार के लिए एकजुट और एकमत होने का आह्वान किया। शांता कुमार ने कहा कि हिंदी को समृद्ध बनाने के लिए हमें इसके उपयोग से जुड़ी हीन भावना से ऊपर उठना होगा। इसकी शुरुआत करने के लिए कम से कम अपने परिवार में होने वाले विवाह आदि समारोह के निमंत्रण पत्र हम हिंदी में छपवाएं।