जेएनयू: सावरकर मार्ग के बोर्ड पर कालिख पोती, जिन्ना का पोस्टर चिपकाया
   दिनांक 17-मार्च-2020
 डॉ. प्रवेश चौधरी
जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) में एक मार्ग का का नाम वीर सावरकर के नाम पर रखे जाने के अगले ही दिन वामपंथी बिग्रेड ने सावरकर मार्ग वाले बोर्ड पर कालिख पोत दी। यही नहीं वहां पर मोहम्मद अली जिन्ना मार्ग का पोस्टर चिपका दिया

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इस मार्ग का नाम वीर सवारकर किए जाने पर जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष आईसी घोष ने बेहद आपत्तिजनक और घृणित ट्वीट किया था। उसने लिखा था कि यह जेएनयू की विरासत के लिए शर्म की बात है कि ऐसे व्यक्ति के नाम पर यूनिवर्सिटी के मार्ग का नाम रखा गया है। उन्होंने कहा था कि सावरकर और उन जैसे लोगों के लिए जेएनयू में न कभी जगह थी न कभी होगी।
गौरतलब है​ कि जेेएनयू देश में ​स्थित कुछ ऐसे चुनिंदा विश्वविद्यालयों में शामिल है जहां वामपंथी बिग्रेड गाहे बगाहे कोई न कोई बवाल करती रहती है। सेकुलर मीडिया उनको इस तरह से दिखाता है कि मानो देश में भूचाल आ गया हो। आम छात्रों को पढ़ने न देना, बिना किसी बात के आंदोलन करना, कक्षाओं को बहिष्कार करना वामपंथी बिग्रेड का शगल है।
जेएनयू में जाकर देखें तो वहां की दीवारें वामपंथियों के स्लोगनों से रंगी पड़ी हैं। जेएनयू की दीवारें लाल रंग से रंग दी गई हैं। वामपंथ के नारों से दीवारों को पाट दिया गया है।
दीवारों पर खिलाफत 2.0, लाल किले पर लाल निशान, ब्राह्मणवाद से आजादी जैसे तमाम स्लोगनों से जेएनयू की दीवारें पटी होती हैं। इस कैंपस में ”अफजल हम शर्मिंदा हैं, तेरे कातिल जिंदा हैं,” भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे नारे लगते हैं। असम को देश से काटने की बात करने वाले शरजील को जब पुलिस द्वारा गिरफ्तार किया जाता है तो उसके समर्थन में यहां मार्च निकाला जाता है।
पिछले साल 14 नवम्बर को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के प्रशासन परिसर के समीप लगी स्वामी विवेकानंद जी की प्रतिमा को कुछ वाम समर्थित छात्रों के द्वारा क्षतिग्रस्त करने का प्रयास किया गया था। प्रतिमा के इर्द-गिर्द भगवा हो बर्बाद , भाजपा हो बर्बाद जैसे नारों को लिखा दिया गया था। वहीं प्रशासन बिल्डिंग में घुस कर कुलपति,प्रति-कुलपति के ऑफ़िस की दीवारों पर विभिन्न भाषाओं में अपशब्द लिखे गए थे।