एक्सक्लूसिव: कानूनी झमेले में फंसी पत्रकार बरखा दत्त
   दिनांक 19-मार्च-2020
दिल्ली दंगों में पीड़ित दस महीने की नाबालिग बच्ची और उसके परिवार का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर करने के चलते बरखा दत्त के खिलाफ राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लेते हुए पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा है.

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हाल ही में हुए दिल्ली दंगों के बाद ग्राउंड जीरो रिर्पोटिंग के दौरान पीड़ित परिवारों की कहानी को सामने लाने के लिए बरखा दत्त ने दस महीने की बच्ची और उसके परिवार का वीडियो ट्विटर हैंडल पर शेयर किया था। इस दौरान बच्ची और उसके परिवार का चेहरा नहीं दिखाया जाना चाहिए था, लेकिन बरखा दत्त ने बच्ची और उसके परिवार का चेहरा छिपाए बिना उनकी पहचान और असली नाम बताते हुए वीडियो बनाया और उसे अपने ट्विटर पर डाला।
16 मार्च को इस वीडियो के शेयर किए जाने के बाद शिकायत मिलने पर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने संज्ञान लेते हुए डीसीपी नार्थ ईस्ट को मामले की जांच कर 10 दिनों में रिर्पोट देने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि डीसीपी लेटर प्राप्त होने के बाद दस दिनों में पूरे मामले की जांच कर इस मामले में पुलिस ने क्या कार्रवाई की उसकी रिपोर्ट आयोग के सामने पूरे कागजात के साथ प्रस्तुत करें।
दरअसल बरखा दत्त MOJO नाम से एक यूट्यूब चैनल चला रही हैं। हाल ही मेें हुए दिल्ली दंगों के बाद वह उत्तरपूर्वी दिल्ली में एक पीड़ित परिवार से मिली थीं। 16 मार्च को उन्होंने परिवार से बातचीत का वीडियो अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया था। इस वीडियो में पीड़ित परिवार से बात करते हुए बरखा ने बताया कि दंगों के दौरान दस महीने की बच्ची को चोट लगी थी जिसके चलते उसकी कॉलर बोन टूट गई। उसके माता—पिता बच्ची का अस्पताल में ईलाज करवा रहे हैं। रिर्पोटिंग के दौरान बरखा दत्त ने पत्रकारिता के नियमों और कायदों का भी ध्यान नहीं रखा। अधिवक्ता नितिन निचौड़िया बताते हैं कि यह जुवेनाइल  जस्टिस एक्ट की धारा-74 का खुला उल्लंघन है। रिर्पोटिंग अपनी जगह है लेकिन किसी नाबालिग बच्चे और उसके परिवार की पहचान जाहिर करना दंडनीय है। पुलिस को अधिकार है कि यदि जांच के दौरान आरोप सही पाए जाते हैं तो वह एक्ट के अनुसार आरोपी  पर कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र है।
बाल अधिकार आयोग ने भी अपने पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया है कि बरखा ने रिर्पोटिंग के दौरान न सिर्फ एक्ट का उल्लंघन किया बल्कि एक छोटी बच्ची और उसके परिवार की सुरक्षा को भी खतरे में डाला। राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग ने पुलिस को दस दिनों में जांच कर कार्रवाई करने का निर्देश देते हुए रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।