दिल्ली दंगा: सड़क पर इस्लामी आतंकवाद, पढ़िए आंखों देखा हाल
   दिनांक 02-मार्च-2020
 आदित्य भाारद्वाज/ अश्वनी मिश्र
शाहीन बाग की आड़ में शांति की डफली बजाई जाती रही। दो महीने तक जब उनकी मंशा पूरी नहीं हुई तो जाफराबाद में उनके चेहरों से नकाब उतर गए। दिल्ली जलनी शुरू हो गई। गोलियां, पत्थर, पेट्रोल बम चलाए गए। तीन दिन तक उत्तरी-पूर्वी दिल्ली के लाखों लोग घरों में कैद होने को मजबूर हो गए। हालात देखकर लग रहा था जैसे हम देश की राजधानी में नहीं, बल्कि आतंकवाद से ग्रस्त सीरिया में रहते हैं

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जाफराबाद में मुसलमानों ने जमकर दंगा भड़काया। हिन्दुओं के घरों-दुकानों व प्रतिष्ठानों को खाक कर दिया 
रविवार, 23 फरवरी। समय यही कोई दोपहर के तीन बजे। यह वह समय था जब मौजपुर चौक पर नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के समर्थन एवं एक दिन पहले जाफराबाद सड़क बंद करने के विरोध में स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए थे। इन लोगों की मांग थी कि जाफराबाद में सड़क घेरकर बैठे लोगों को तत्काल हटाकर रास्ता खुलवाया जाए, ताकि आवागमन सुचारू रूप से संचालित हो सके। ये लोग मौजपुर चौक पर शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन कर रहे थे। लेकिन इसी बीच शाम को लगभग चार बजे कर्दमपुरी की तरफ से मुसलमानों का एक झुंड प्रदर्शन स्थल की ओर दौड़ा चला आता है। यहां के प्रदर्शनकारी जब तक कुछ समझते-संभलते, कट्टरपंथियों की अराजक भीड़ सीएए समर्थनकारियों पर पत्थर बरसाना शुरू कर देती है। इस अप्रत्याशित हमले में कई प्रदर्शनकारी पथराव में घायल हो गए। कई युवकों के सिर पर पत्थर लगे और खून का फव्वारा बहने लगा। जिहादी भीड़ हिन्दुओं पर ताबड़तोड़ पत्थर बरसाती रही। स्थिति नाजुक देख शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे बचाव के लिए भागने लगे। लोग घोंडा रोड की तरफ भागे, लेकिन यहां भी पहले से मुस्तैद मुसलमानों की भीड़ हिन्दुओं पर टूट पड़ी। पत्थर, पेट्रोल बम, असलहों और धारदार हथियार से लैस कट्टरपंथी जिसे देखते उस पर टूट पड़ते। कुछ ही देर में इलाके के हिन्दुओं में इस हमले की खबर फैल चुकी थी। लोग चौक एवं उसके आसपास एकत्र होने शुरू हो गए थे। हिन्दुओं ने उन्मादी भीड़ को उनके मुहल्ले की सीमा तक खदेड़ दिया। करीब तीन घंटे तक यह सब चलता रहा। 
शाम के सात बजे
अब अंधेरा होने लगा था। लोगों में डर, आक्रोश और बेचैनी थी कि अब क्या होगा? इसी बीच, शाम सात बजे कबीर नगर की तरफ से हवाई फायरिंग शुरू हो गई। रुक-रुक कर गोली चलने की आवाजें आती रहीं। आशंकित हिन्दू कुछ सोच पाते, तभी मुसलमानों ने दूसरी तरफ से पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। जवान उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास करते हैं, लेकिन दंगाइयों की संख्या ज्यादा होने के कारण उन्हें पीछे हटने पर मजबूर होना पड़ा। जिहादी पत्थर और पेट्रोल बमों से उन पर हमले करते रहे। अंतत: हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े, हवा में कई चक्र गोलियां चलार्इं, लेकिन जिहादी डटे रहे। इस हमले में सिर पर पत्थर लगने के कारण कई पुलिसकर्मी गंभीर रूप से घायल हो गए। पुलिस ने बाबरपुर सड़क को बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया। अब तक दंगा धीरे-धीरे फैलने लगा था। कबीरनगर और कर्दमपुरी की तरफ से ‘नारा-ए-तकबीर अल्लाह हो अकबर’ की गूंज सुनाई दे रही थी।

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विजय पार्क, मौजपुर सड़क पर निकली मुसलमानों की भीड़ बाबरपुर चौक की तरफ आकर पथराव कर रही थी। इनमें एक तरफ विजय पार्क इलाके से उन्मादी भीड़ थी तो दूसरी तरफ कबीर नगर और कर्दमपुरी की तरफ से निकलने वाले उन्मादी जो पुलिस को लक्षित कर पत्थर बरसा रहे थे। इस बीच, सड़क पर एक पेट्रोल बम फटा और धमाके के साथ काला धुआं छा गया। बाद में अर्धसैनिक बलों ने मोर्चा संभाला और दंगाइयों को खदेड़ा। यह दृश्य देखकर लग नहीं रहा था कि यह देश की राजधानी दिल्ली का इलाका है। दोनों तरफ की पूरी सड़क पत्थरों से अटी पड़ी थी। माहौल में तनाव था और जवान मोर्चा संभाले हुए थे।
रात 9 बजे
रात नौ बजे तक मौजपुर, गोकलपुरी, कर्दमपुरी, चांदबाग, कबीरनगर व विजय पार्क सहित कई इलाकों में हिंसा की आग फैल चुकी थी। इन इलाकों में जगह-जगह दोपहिया-चार पहिया वाहन फूंके जा रहे थे। दुकान-मकान-प्रतिष्ठान सबकुछ आग के हवाले किया जा रहा था। भीड़ पूरी तरह से अराजक हो चुकी थी। मुस्लिम बस्तियों की ओर से उन्माद भरे नारे लगाकर हिन्दू बस्तियों को चुनौती दी जा रही थी। जगह-जगह नाके लगाकर पहचान बताने के लिए मजबूर किया जा रहा था। मुस्लिमों के छोटे-छोटे बच्चे खुलेआम सड़कों पर धारदार हथियार लेकर घूम रहे थे।
स्थिति बिगड़ने पर पुलिस सभी इलाकों में गश्ती बढ़ाई, तब थोड़ी देर के लिए दंगाई चुप रहे। लेकिन पुलिस के जाते ही उन्मादी भीड़ ने फिर से हिन्दुओं के घरों, मंदिरों व बस्तियों पर हमले शुरू कर दिए।
रात के 10 बजे
हम गोकलपुरी से मौजपुर की ओर जा रहे थे। यहां भी पूरी सड़क पत्थरों से पटी पड़ी थी। रुक कर पता किया तो मालूम हुआ कि थोड़ी देर पहले मुसलमानों ने पुलिस और हिन्दुओं पर पथराव किया था। अभी हम वहीं थे, तभी कबीरनगर से कुछ कट्टरपंथी आए और पुलिस पर पथराव कर भाग गए। इस भीड़ ने कई वाहनों को क्षतिग्रस्त किया, उसमें आग लगाई और सड़क के बीच की रेलिंग को पूरी तरह से तोड़ डाला।

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नहीं थमी अगले दिन भी हिंसा
24 फरवरी, सोमवार की सुबह। पिछल्ल रात को उन्मादियों के हमले से हिन्दू समाज बेहद आक्रोशित था, लेकिन अभी तक शांत था। सुबह गोकलपुरी से सीलमपुर जाने वाली सड़क, कर्दमपुरी और कबीर नगर को जोड़ने वाली पुलिया के पास पुलिस तैनात थी। सुबह 10 बजे तक छिटपुट घटनाओं को छोड़ दें तो कुल मिलाकर इलाके में शांति थी। मौजपुर चौक से आगे जाने वाली सड़क को पुलिस ने बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया था। मौजपुर और बाबरपुर चौक पर हाथों में तिरंगा लिए सीएए समर्थक शांति की अपील करते हुए प्रदर्शन कर रहे थे। तभी कबीरनगर की ओर से मुसलमानों ने पथराव शुरू कर दिया। इस हमले में कई लोगों के सिर फट गए। धीरे-धीरे दंगे की आंच दूसरे मुहल्ले तक फैलने लगी। मुस्तफाबाद, चांदबाग, करावलनगर आदि इलाकों में भी हिंसा भड़क चुकी थी। लेकिन मुस्तफाबाद और चांदबाग की स्थिति बहुत अधिक बिगड़ रही थी। यहां से जो भी हिन्दू निकल रहा था, उन्मादी धर्म पूछने के बाद उसे पीट रहे थे, गाड़ियों को आग के हवाले कर रहे थे। इन इलाकों में बेखौफ उन्मादी चुन-चुन कर हिन्दुओं की दुकानों और घरों में आग लगा रहे थे।
सुबह 11 बजे
उत्तर-पूर्व दिल्ली में बिगड़ते हालात को देखते हुए इलाके के सभी स्कूल बंद कर दिए गए थे। सुबह 11 बजे हम यमुना विहार स्थित ग्रीनफील्ड स्कूल के पास खड़े थे। अचानक खून से लथपथ एक युवक दौड़ते हुए आया और जोर-जोर से कहने लगा कि ब्रजपुरी से भजनपुरा तक दंगा शुरू हो गया है। जिहादी तत्व हिंदुओं को घेरकर बुरी तरह पीट रहे हैं। हम ब्रजपुरी की तरफ बढ़े तो मुस्लिम बस्तियों की ओर से पथराव होता दिखा। लोग जान बचाने के लिए विपरीत दिशा में गोकलपुरी की तरफ भाग रहे थे। उन्मादी भीड़ ‘अल्लाह हो अकबर’, ‘हम लेके रहेंगे आजादी’ सहित उन्माद से भरे नारे लगाकर हिन्दुओं को चुनौती दे रहे थे।
दोपहर करीब एक बजे
यह सब चल ही रहा था कि तेज धमाका हुआ और काले धुएं का गुबार आसमान में उठता दिखा। हमने गोकलपुरी फ्लाईओवर से देखा तो भजनपुरा पेट्रोल पंप धू-धू कर जल रहा था। उन्मादी सड़क पर हैवानियत का नंगा नाच कर रहे थे। यह सिलसिला घंटों तक चलता रहा। दंगाई राह चलते हिन्दुओं को मार रहे थे। दंगाई सभी गाड़ियों को आग के हवाले करते जा रहे थे।

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दोपहर करीब 3 बजे
 हम जाफराबाद की तंग गलियों से गुजर रहे थे। यह मुस्लिम इलाका था। हालांकि अभी तक इस तरफ माहौल शांत था। लेकिन सड़क पर टोपी पहने मुस्लिम युवकों की मौजूदगी हमें असहज कर रही थी। उन्हें देखकर लग रहा था कि वे किसी बड़ी घटना को अंजाम देने की तैयारी में थे। जाफराबाद मेट्रो स्टेशन यहां से कुछ ही दूरी पर था। लेकिन वहां स्थिति तनावपूर्ण थी। इतने में जाफराबाद मेट्रो स्टेशन की तरफ से शोर उठा और देखते-देखते बच्चों से लेकर बूढ़े तक लाठी, डंंडे, सरिया, हॉकी स्टिक, फावड़ा और धारदार हथियार लेकर उस ओर भागने लगे। इसी माहौल में हम मौजुपर की तरफ बढ़े ही थे कि मुस्लिमों का झुंड उन्माद से भरे नारे लगाते आती दिखी।
हमने अनजान बनते हुए एक मुस्लिम दुकानदार से पूछा, ‘‘कुछ हुआ है क्या? यह शोर कैसा है? दुकानदार ने बताया, ‘‘हिन्दू हमारे भाइयों को मार रहे हैं। हम इन्हें छोड़ेंगे नहीं।’’ उस समय तक वहां ऐसा कुछ भी नहीं था, सबकुछ सामान्य था। बहरहाल, मौके की नजाकत को देखते हुए बिना समय गंवाए हम तुरंत निकल गए।
शाम के 7 बजे

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उत्तर-पूर्वी दिल्ली पूरी से तरह से अशांत हो चुकी थी। चारों तरफ अंधेरा पसरा हुआ था। अलग-अलग जगहों से दंगों की सूचनाएं आनी शुरू हो गई थीं। दंगाइयों ने गोकलपुरी थाने के पीछे स्थित टायर बाजार को आग के हवाले कर दिया था। आनन-फानन में दमकल की कई गाड़ियां मौके पर पहुंची और देर रात 1 बजे के बाद तक आग पर काबू पाने का प्रयास करती रहीं। सड़कों पर सन्नाटा पसरा हुआ था। अफवाहों का बाजार भी गर्म था। इस सन्नाटे को असामाजिक तत्व मौके के रूप में देख रहे थे। लेकिन पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान इनसे निपटने के लिए कमर कसे दिखाई दे रहे थे। बीच-बीच में कर्दमपुरी, कबीरनगर, चांदबाग और विजय पार्क के मुस्लिम बहुल इलाकों से फायरिंग और ‘अल्लाह हो अकबर’ की आवाजें आ रही थीं।
मस्जिद से पत्थरबाजी
25 फरवरी, दोपहर एक बजे। हम गोकलपुरी थाने के शिवविहार इलाके में थे। यह क्षेत्र गोकलपुरी का सीमावर्ती इलाका है जिसके एक तरफ हिन्दू और दूसरी तरफ मुस्लिम रहते हैं। इसके बीच एक पुलिया है जो दोनों मुहल्लों को जोड़ती है, लेकिन आज जो मंजर यहां दिख रहा था वह बड़ा भयावह था। अराजकता का आलम यह था कि मस्जिद एवं उससे सटे मुस्लिम इलाकों की छतों से कट्टरपंथियों द्वारा हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए जमकर पथराव किया जा रहा था। आपत्तिजनक नारों के साथ मुस्लिमों की भीड़ हिन्दू इलाकों सहित पुलिस पर भी पत्थर बरसा रही थी। हालात इतने खराब क्यों हुए, इस सवाल पर इलाके के अधिवक्ता नितिन निचौड़िया बताते हैं, ‘‘24 फरवरी की रात को इस इलाके के कुछ अनुसूचित वर्ग के हिन्दुओं को मुसलमानों ने बेरहमी से पीटा। इनकी खता सिर्फ इतनी थी कि वे हिन्दू थे। जब यह खबर इलाके के हिन्दुओं को पता चली तो उन्होंने इसका विरोध किया। हिन्दू समाज के लोग शिवविहार में पुल के पास जुटने शुरू हुए। इतने में मुस्लिम मोहल्ले की तरफ से अचानक अंधाधुंध पत्थरबाजी शुरू कर दी गर्ई। इस तरह की अराजकता को देख हिन्दुओं की तरफ से भी इसका उत्तर दिया गया।’’

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 शिवविहार इलाके की मस्जिद और मुस्लिम बस्ती। एक छत से मुस्लिमों की भीेड़ हिन्दुओं को निशाना बनाते हुए। ये लोग लगातार पत्थरबाजी और पेट्रोल बम फेंक कर दंगा-फसाद कर रहे थे
हम साफ देख रहे थे कि उन्मादी भीड़ बड़ी तादाद में अपनी छतों पर जमा थी। इसमें बच्चों से लेकर महिलाएं तक शामिल थीं। सभी पत्थरबाजी कर रहे थे। पुलिस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिया के एक तरफ मानव शृंखला बनाकर खड़ी थी और शांति की अपील कर रही थी। लेकिन मुस्लिम चढ़-चढ़कर पुलिया पार कर हिन्दुओं की बस्तियों पर हमला करने का प्रयास करते दिखाई दे रहे थे। पुलिस की शांति अपील का कट्टरपंथियों पर कोई असर नहीं दिख रहा था। वे मस्जिद एवं उससे सटे पूरे इलाके से पत्थरबाजी, पेट्रोल बम से हमला कर रहे थे। काफी मशक्कत के बाद जवानों ने मामले को नियंत्रित किया।
रात दस बजे
रात हो चुकी थी। कुछ स्थानीय लोग मिले तो उन्होंने एक नई बात बताई। उनके अनुसार, ‘‘मुल्ला-मौलवियों एवं मस्जिदों की ओर से यह कहा गया कि दिन तुम्हारा, रात हमारी।’’ इस संदेश से साफ था कि दिन में जहां हिंदुओं ने थोड़ी प्रतिक्रिया दी थी रात में कट्टरपंथी इसका जवाब देंगे। माहौल में व्याप्त भय को देखते हुए इलाके के लोग सड़कों पर थे। रुक-रुक शिवविहार, मुस्तफाबाद एवं अन्य इलाकों से बराबर कहीं न कहीं झुंड में आए मुसलमानों की तरफ से हमला करने के समाचार आ रहे थे। उसी समय शिवविहार की तरफ से गश्त करके लौटे एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि छतों पर हो रही गतिविधियों पर नजर न रखी जा सके इसलिए योजना के तहत पूरे इलाके की बिजली को स्थानीय लोगों (मुसलमानों) ने ही काट दिया है। उन्होंने बताया कि गश्त कर रही पुलिस पर भी कई जगह पथराव किया गया। पुलिसकर्मी शिवविहार की पुलिया, चांद बाग की पुलिया, ब्रजपुरी रोड के निकट मोर्चा लिए हुए थे, ताकि रात में दंगाई हिंदू बहुल इलाकों को निशाना न बना सकें। लेकिन कट्टरपंथियों की ओर से कहा गया था कि ‘रात हमारी’ तो उन्होंने ब्रह्मपुरी के विनोद, आईबी के अंकित शर्मा समेत कई हिन्दुओं को मौत के घाट उतार दिया।
चारों ओर अशांति
बुधवार यानी 26 फरवरी। सुबह से ही उत्तर-पूर्व दिल्ली में काफी संख्या में पुलिस बल आने से माहौल कुछ शांत दिख रहा था, लेकिन अंदर ही अंदर यह सुलग भी रहा था। जब हम शिवविहार, गोकलपुरी, मौजपुर, कर्दमपुरी इलाके का जायजा ले रहे थे तो हर जगह स्थिति संवेदनशील थी। जगह-जगह नाके लगे थे, जली हुई गाड़ियां खड़ी थीं। जले हुए मकान मुंह चिढ़ा रहे थे। चांद बाग, गोकलपुरी,जाफराबाद, मौजपुर, खजूरी खास में अलग-अलग जगहों पर जिहादियों ने 100 से ज्यादा घटनाओं को अंजाम दिया।
इन जिहादी करतूतों से सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या कुछ बरसों में ये इलाके हिन्दू-विहीन हो जाएंगे? यदि ऐसा हुआ तो यह भारत के लिए दुर्भाग्य साबित होगा।
अर्धसैनिक बलों पर तेजाब से हमला
उत्तर-पूर्वी दिल्ली के कई इलाकों में रुक-रुक का दंगा-फसाद हो रहा था। चारों ओर आतंक, उन्माद का वातावरण व्याप्त था। ऐसी स्थिति से निपटने के लिए अर्धसैनिक बलों को मोर्चा लेने के लिए उतारा गया। लेकिन जब वे मुस्लिम इलाकों मे घुसे और दंगाइयों को नियंत्रित कर रहे थे तो उन पर जिहादियों द्वारा तेजाब और ईंट-पत्थरों से हमला किया गया। करावल नगर के मुहल्लों में इनके साथ ऐसी ही घटना घटी। हिन्दू बस्तियों के लोगों ने इन जवानों का तुरंत घरेलू उपचार किया और फिर उन्हें जीटीबी अस्पताल ले जाया गया।
जाफराबाद या दंगाबाद ?
उत्तर पूर्वी दिल्ली में जाफराबाद से ही स्थितियां बिगड़नी शुरू हुर्इं? आखिर इस इलाके से ही कैसे वातावरण खराब हुआ और इसके पीछे कौन लोग हैं? इसे जानने के लिए थोड़ा पीछे जाना पड़ेगा।
दरअसल, पिछले साल राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने दिल्ली-अमरोहा आईएसआईएस के माड्यूल का भंडाभोड़ करते हुए दस जिहादियों को गिरफ्तार किया था, जिनके पास से भारी मात्रा में गोला-बारूद बरामद किया गया था। ये सभी जिहादी हिन्दुस्थान को इस्लामिक स्टेट बनाने की लड़ाई लड़ कर देश में अराजकता फैलाने की साजिश रच रहे थे। इन दस में से कुछ मेरठ के रहने वाले थे तो कुछ मुजफ्फराबाद के। लेकिन इन सारे आतंकियों को जाफराबाद से ही गिरफ्तार किया गया था।
गौर करने वाली बात है कि इस पूरी साजिश का मास्टमाइंड मो. सुहैल जाफराबाद का ही रहने वाला था। इसके अलावा उसके कई साथी, जो पुलिस के हत्थे चढ़े वे भी जाफराबाद के ही रहने वाले थे। ऐसे में जाफराबाद की स्थिति को समझा जा सकता है कि इलाके में कट्टरपंथ की जड़ें कितनी गहरी हैं।
जाफराबाद ही नहीं चांदपुर, सीलमपुर, कर्दमपुरी, शिवविहार के कई इलाकों में कट्टरपंथियों की अच्छी खासी तादाद है। जिनका एक ही काम है देश में अराजकता फैलाना।
...और रतनलाल को मार दिया

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दिल्ली में जिहादी हिंसा के विरुद्ध प्रदर्शन करता राजधानी दिल्ली का प्रबुद्ध वर्ग, इससे पहले इन लोगों ने बलिदानी रतनलाल और अंकित शर्मा को श्रद्धांजलि दी।
 दिल्ली पुलिस के हेड कांस्टेबल रतनलाल ने 1998 में पुलिस की वर्दी पहनी थी। वे एसीपी, गोकलपुरी के कार्यालय में तैनात थे। 24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा के बीच दंगाइयों ने उनकी जान ले ली। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में स्पष्ट हुआ है कि दंगाइयों द्वारा की गई गोलीबारी में उनकी मौत हुई है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, रतन लाल के शरीर में एक गोली लगी थी। यह गोली बाएं कंधे से प्रवेश करते हुए दाएं कंधे में जा धंसी थी। रतनलाल मूल रूप से राजस्थान के सीकर में तिहावली गांव के रहने वाले थे। दिल्ली में वे बुराड़ी में पत्नी पूनम, दो बेटियां- सिद्धि, कनक, और बेटे राम के साथ रहते थे। उनकी बड़ी बेटी सिद्धि 12 साल की, छोटी बेटी कनक 10 साल की और सबसे छोटा बेटा राम 7 साल का है। सिद्धि 7वीं, कनक 5वीं में पढ़ती है, जबकि राम पहली कक्षा में। रतनलाल की मां और उनके छोटे भाई दिनेश गांव में रहते हैं। पिता बृजमोहन की ढाई साल पहले ही मृत्यु हो चुकी है। रतनलाल की मौत से पूरा परिवार सदमे में है। 42 वर्षीय रतनलाल परिवार में कमाने वाले इकलौते सदस्य थे। भारत सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा दिया है।
स्व. रतनलाल का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। वहां मौजूद लोगों ने सरकार से कहा कि फिर किसी पुलिसकर्मी या सुरक्षाकर्मी की जान न जाए, यह सुनिश्चित होना चाहिए। लोगों में इस बात को लेकर भी गुस्सा था कि पुलिस को इतना असहाय क्यों छोड़ा जाता है?
विनोद की नृशंस हत्या

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24 फरवरी की देर रात ब्रह्मपुरी का एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें दो-तीन युवक खून से लथपथ एक युवक को घसीटकर ले जाते दिख रहे थे। वीडियो के वायरल होते ही कुछ ही समय बाद इसकी पुष्टि हुई कि यह ब्रह्मपुरी गली नंबर-1 के रहने वाले विनोद हैं जिन्हें मुसलमानों ने बेरहमी से पीटा।
घटना उस समय की है जब विनोद रात के 11 बजे अपने बेटे विनीत के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट रहे थे। इसी बीच जिहादी भीड़ ने उन्हें घेर लिया। पहले जिहादियों ने पथराव किया और उनकी मोटरसाइकिल में आग लगा दी। इसके बाद बाप-बेटे को बेरहमी से पीटा। दंगाई उन्हें मरा जानकर ‘अल्लाह हो अकबर’ के नारे लगाकर जश्न मनाने लगे। तब तक हिंदू वहां आए और नीचे पड़े विनोद को हिंदू बस्ती की तरफ ले गए। दोनों को तत्काल जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया जहां विनोद को डाक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। उनके बेटे विनीत को गंभीर चोट आई है।
मीडियाकर्मियों को भी बनाया निशाना
मौजपुर में मंगलवार दंगाइयों की भीड़ ने कई मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया जिसमें एक चैनल के संवाददाता आकाश को तो गोली मार दी। दंगाइयों ने आकाश के कंधे पर गोली मारी जब वह घटनास्थल पर रिपोर्ट कवर कर रहे थे। गोली लगने के बाद उन्हें जीटीबी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उनकी हालत नाजुक है।
आखिर गलत क्या कहा कपिल मिश्रा ने ?

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जाफराबाद सड़क पर अराजक रूप से जमे उन्मादियों के खिलाफ भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने जब आवाज उठाई तो सेकुलर और लुटियन पत्रकार उनके पीछे पड़ गए।
जब कबीर नगर में कपिल मिश्रा और उनके साथ बैठे सीएए समर्थकों पर पत्थरबाजी शुरू की गई। पुलिस के आग्रह पर वे लोग यह कहते हुए वहां से जाने के लिए तैयार हो गए कि तीन दिन में रास्ता खुलवाइए, वरना हम आपकी भी नहीं सुनेंगे। रास्ता बंद होने से गुस्साए लोगों को वहां से हटाने के लिए इतना कहना जरूरी था। और इसके बाद वे लोग वहां से जाने लगे। सारे टीवी चैनल ट्रम्प के आने की खबर को कवर कर रहे थे, सिर्फ एक चैनल था ‘इंडिया न्यूज’ जो कबीर नगर से लाइव कर रहा था। लेकिन इतने में कपिल मिश्रा और वहां मौजूद सीएए समर्थकों पर आसपास के घरों से अचानक पत्थरबाजी शुरू हो गई। उस वक्त वहां पर्याप्त पुलिस मौजूद नहीं थी। लोग इधर उधर भागने लगे। इंडिया न्यूज का संवाददाता भी इस पत्थरबाजी में घायल हुआ। थोड़ी देर बाद सीएए समर्थक दोबारा से इकट्ठे हुए और जो पत्थर उन पर फेंके गए थे उसी को उठाकर उन्होंने दंगाइयों पर फेंकना शुरू किया।
दिल्ली में दंगों की शुरुआत यहीं से हुई। अब बताइए किसको दोषी मानें? कपिल मिश्रा और उनके साथ मौजूद लोगों को जो वहां सड़क खुलवाने के लिए धरने पर बैठ गए थे या फिर उनको, जिन्होंने कपिल मिश्रा और उनके साथ आए हिन्दुओं को देखते ही पत्थर बरसाने शुरू कर दिए? कपिल मिश्रा तो तीन दिन की बात कहकर वहां से जा रहे थे, फिर तीन मिनट के भीतर ही लोगों के घर में पत्थरों का स्टॉक कहां से आ गया जो उन्होंने आव देखा न ताव दंगाई हो गए?

सिर में डाल दिया ड्रिल

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सोचिए यह किस कदर की हैवानियत होगी जब कट्टरपंथियों की भीड़ सिर्फ इसलिए किसी लड़के के सिर में ड्रिल जैसी एक मशीन के आर्मेचर का नुकीला सिरा उसके सिर में धंसा देती है, क्योंकि वह हिन्दू होता है। उत्तर-पूर्वी दिल्ली स्थित जौहरीपुर के रहने वाले विवेक के साथ ऐसा ही हुआ। मंगलवार को दंगाइयों ने विवेक को उस समय निशाना बनाया जब वह शिवविहार इलाके से गुजर रहा था। अचानक भीड़ घेरती है और नाम और आईडी देखने के बाद टूट पड़ती है। इसी बीच भीड़ में से कोई कट्टरपंथी विवेक के सिर पर आर्मेचर मारता है और यह उसके सिर के डेड़ इंच अंदर तक चला जाता है। जीटीबी अस्पताल में आॅपरेशन के बाद उसकी जान बच गई है।
यह होता है संस्कार का फर्क

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 दंगाइयों का नेतृत्व करता ताहिर हुसैन (लाल घेरे में) एवं उसकी छत से बरामद पेट्रोल बम अन्य सामग्री।
इसे संस्कार कहें, मानवता कहें या फिर अपनों के प्रति प्रेम। जब उत्तर-पूर्वी दिल्ली में चारों तरफ लोग हिन्दू-मुस्लिम के नाम पर खून के प्यासे थे, तब यमुना विहार इलाके से भाजपा पार्षद प्रमोद गुप्ता मुस्लिम परिवार की जान बचाते दिखाई दिए। अपनी जान की परवाह न करते हुए उन्होंने अराजक तत्वों से मोर्चा लिया और बलवाइयों के आगे खड़े हो गए। घटना 25 फरवरी रात साढ़े 11 बजे की है। यमुना विहार इलाके में शाहिद सिद्दिकी परिवार के साथ रहते हैं। शाहिद के परिवार से उनकी बरसों पुरानी जान-पहचान है। अराजक तत्व मुस्लिम परिवार के घर को आग के हवाले करने वाले ही थे, इतने में प्रमोद गुप्ता वहां पहुंच गए। उन्होंने अराजक तत्वों को समझाया जिसके बाद उपद्रवी वहां से चले गए। इस तरह भाजपा पार्षद की मदद से शाहिद और उनके घर की रक्षा हुई।
वहीं दूसरी तरफ आम आदमी पार्टी का पार्षद ताहिर हुसैन चांद बाग इलाके में दंगा-फसाद करता हुआ दिखाई दिया। इसके घर से उन्मादियों द्वारा जमकर पत्थरबाजी, पेट्रोल बम से हमले किए जा रहे थे। स्थानीय लोगों की माने तो ताहिर और उसके जिहादी ही आईबी कर्मचारी अंकित शर्मा सहित कई युवकों को घर में घसीटकर ले गए और फिर उनकी बेरहमी से हत्या करके निकट के नाले में उनके शवों को फेंक दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस नाले से अंकित का शव मिला है, उसमें से और शव बरामद हो सकते हैं।
ताहिर हुसैन पर मामला दर्ज
ताहिर हुसैन के खिलाफ मीडिया में स्थानीय लोगों के हवाले से खबर आने के बाद पुलिस ने उसके खिलाफ धारा 302 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। इसके साथ ही, उसके घर और फैक्ट्री को भी सील कर दिया गया है। आम आदमी पार्टी ने भी उसे पार्टी से निकाल दिया है। दिवंगत अंकित शर्मा के परिवार ने भी पुलिस से शिकायत की थी। पुलिस ने हुसैन के घर की तलाशी ली है तो उसकी छत से पेट्रोल बम का जखीरा, गुलेल और बोरियों में भरे पत्थर बरामद हुए हैं।
पार्षद दोनों थे। एक हिन्दू परिवार में पला-बढ़ा था तो उसके संस्कारों ने उसे इनसान बनाया। दूसरा मुस्लिम परिवार में पला-बढ़ा था और उसके संस्कारों ने उसे हैवान बनाया। संस्कारों का यह फर्क समाज को पता चलना चाहिए।