कोरोना पर बड़ा हमला... जनता कर्फ्यू
   दिनांक 20-मार्च-2020
 
modi appeal _1  
इस देश ने मोदी को गुस्से में देखा है लेकिन तनाव में शायद पहली बार देखा है. उनके चेहरे पर चिंता की लकीरें थीं. जबकि कोरोना जैसी महामारी सर पर है, हर जननायक के चेहरे पर अपने लोगों को लेकर चिंता होना स्वाभाविक है. लेकिन उनकी बातों से साफ था कि उन्हें 130 करोड़ देशवासियों पर भरोसा है. उन्होंने हमारा और आपका आह्वान किया है. किसके लिए.... हमारे लिए न.
बृहस्पतिवार की रात आठ बजे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश से मुखातिब हुए. पूरा देश नजर गढ़ाए था. दुनिया के सौ से ज्यादा देशों में पांव पसारे कोरोना जैसी महामारी के लिए मोदी के पास क्या मंत्र है. हर संकट की घड़ी में देश अपने नायक की तरफ देखता है. खासतौर पर केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद से देश की आकांक्षाएं और अपेक्षाएं बढ़ी हैं. पूरी भी हुई हैं. हर संकट की घड़ी में मोदी ने खुद को साबित किया है. अब कोरोना का खतरा सामने है, तो देश की निगाह अपने नायक पर होनी स्वाभाविक हैं. मोदी ने भी ऐसा मंत्र दिया है कि अगर देशवासी इसका पालन कर देते हैं, तो दुनिया में नजीर होगी. कोरोना की छुट्टी हो जाएगी.
आज हम प्रधानमंत्री के कोरोना प्लान को डी-कोड करेंगे. मोदी कोरोना के लिए नया ट्रंप कार्ड लेकर आए हैं. यह है ब्लैक आउट. अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि जब मैं छोटा था, तो ब्लैक आउट होता था. ये युद्ध का अभ्यास था. जिसमें सारी रोशनी बंद कर दी जाती थी. खिड़कियों तक पर कागज लगा जाता था. ब्लैक आउट में उस दौर के विमान नीचे आबादी है या नहीं, पता नहीं लगा पाते थे. ठीक ऐसे ही ब्लैक आउट का प्लान लेकर मोदी आए हैं. उन्होंने रविवार को जनता कफ्यू का ऐलान किया है. जनता के लिए जनता द्वारा खुद पर लगाया गया कर्फ्यू. 22 मार्च को सुबह सात बजे से रात नौ बजे तक सभी देशवासियों को जनता कफ्यू का पालन करना है. कोई भी नागरिक घरों से बाहर न निकले. न सड़क पर जाएं, न मोहल्ले में जाएं, न सोसाइटी में इकट्ठा हों. अपने घरों में रहें. आवश्यक सेवाओं से जुड़े लोगों को जाना ही पड़ेगा. एक नागरिक के नाते 22 मार्च को हमारा ये प्रयास अपने आत्मसंयम देश के प्रति अपने कर्तव्य पालन का सुबूत होगा. यह हमें आने वाली चुनौतियों के लिए तैयार करेगा. मोदी ने सभी राज्य सरकारों से भी आह्वान किया है कि वे जनता कर्फ्यू का पालन करें.
जनता कर्फ्यू को समझना जरूरी है. 22 मार्च सुबह सात बजे से रात के नौ बजे तक खुद को घर में रखना. रविवार का दिन है, स्वाभाविक है कि इसमें ज्यादा परेशानी नहीं होने वाली. अब जरा इसे विस्तार से समझते हैं. इस स्वैच्छिक रोक का असर समझिए. 21 मार्च की रात के 12 घंटे और 22 मार्च की रात के 12 घंटे यदि जोड़ लिए जाएं, तो यह कुल मिलाकर 36 घंटे की समयावधि होती है. यह 36 घंटे का सेल्फ क्वार्ट्राइन होगा. यानी 36 घंटे यदि लोग घर में रहेंगे, तो कहीं भी किसी भी रूप में मौजूद कोरोना को प्रसार के लिए मानव शरीर नहीं मिलेगा. यदि ये इनफ्केशन किसी सतह, रेलिंग, दरवाजे के हैंडिल, कुर्सी, मेज, किसी सार्वजनिक नल की टोंटी पर होगा, तो भी यह दूर हो जाएगा. क्योंकि कोरोना वायरस इतने समय तक गर्म वातावरण में जिंदा नहीं रह सकता. यह अपने किस्म का अनूठा प्रयोग है. शायद पूरे विश्व के लिए एक अचंभित कर देने वाला प्रयोग. आप जरा इसे इटली के उदाहरण से समझिए. इटली में कोरोना का विस्फोट जिस स्थान से हुआ, वहां दस हजार लोगों को सरकार ने रोकने की कोशिश की. लोग नहीं माने, आत्म संयम का परिचय नहीं दिया. कोरोना इटली के कोने-कोने में फैल गया. अकेले बृहस्पतिवार को 475 लोगों की मौत इटली में कोरोना से हुई है. हालात ये हैं कि लाशें उठाने के लिए सरकार को सेना बुलानी पड़ी है.
अब जरा बिंदूवार समझते हैं कि कोरोना को लेकर मोदी का प्लान क्या है.
- जनता कफ्यू के जरिए मोदी ने कोशिश की है कि 36 घंटे तक मानव के आपसी संपर्क को दूर कर दिया जाए. इससे कोरोना के फैलने का खतरा बेहद कम हो जाएगा. साथ ही वातावरण या किसी सतह पर मौजूद कोरोना का वायरस खत्म हो जाएगा.
- कोरोना से सबसे ज्यादा खतरा बुजुर्गों को है. भारत एक युवा देश तो है ही, साथ ही अपने बुजुर्गों की सेवा करने वाला देश है. मोदी ने अपील की है कि 60 साल से अधिक आयु के लोग कम से कम तीन हफ्ते घर से बाहर न निकलें. इससे कोरोना की मृत्युदर बेहद कम हो जाएगी.
- कोरोना के खिलाफ जागरुकता में भी मोदी ने जनभागीदारी का आह्वान किया है. अपील की है कि हर व्यक्ति अपने दस मित्रों या रिश्तेदारों को फोन करके कोरोना के बारे में जागरुक करे. साथ ही जनता कर्फ्यू में शामिल होने की अपील करे.
- पूरी दुनिया में इस समय स्वास्थ्य कर्मियों का मनोबल एक समस्या बना हुआ है. तमाम देशों में तो स्वास्थ्य कर्मी सेवा ही छोड़ भागे हैं. ऐसे में मोदी ने हर देशवासी से आह्वान किया है कि रविवार की शाम पांच बजे ताली, थाली, घंटी, शंख आदि बजाकर आवश्यक सेवाओं में लगे लोगों का उत्साहवर्धन करें. कैसा होगा जब अपनी जान खतरे में डालने वाले आवश्यक सेवा कर्मी देखेंगे कि पूरा देश उन्हें सलाम कर रहा है. उनका हौंसला चरम पर होगा.