ये मोदी नहीं देश की एकजुटता का विरोध है ..
   दिनांक 23-मार्च-2020
कोरोना वायरस की महामारी के संकट काल में भी एक वर्ग केवल विरोध के नाम पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध में जुटा हुआ है, चंद लोग उत्साह में बाहर निकल आए उन तो चंद लोगों की नादानी से पूरे देश की जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना का क्या औचित्य है ?

corona _1  H x
 
22 मार्च की शाम 5 बजे जब देश की जनता नोवल कोविड-19 कोरोना वायरस से जंग लड़ रहे हमारे वीर डॉक्टरों, चिकित्सा स्टाफ समेत अन्य लोगों का ताली-थाली बजाकर धन्यवाद दे रही थी, उसी समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी विरोधी एक वर्ग ऐसा भी था, जिसकी छाती छलनी हो रही थी। हर मुद्दे, भले वो देशहित का क्यों न हो, ये वर्ग नरेंद्र मोदी का विरोध करता है। कोरोना वायरस को लेकर भी ये वर्ग मोदी विरोध में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहा है। 20 मार्च को जब प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के नाम संबोधन दिया तो यह वर्ग कनाडा, सिंगापुर समेत दूसरे देशों के प्रधानमंत्रियों से उनकी तुलना करने लगा। ट्विटर पर ट्रेंड चला दिया गया कि #मोदी बकवास बंद करो। 22 मार्च को प्रधानमंत्री की जनता कर्फ्यू की अपील इस वर्ग से बर्दाश्त नहीं हो रही थी। जनता कर्फ्यू जब पूरी तरह सफल हुआ तो इनकी झटपटाहट बढ़ने लगी। इन्हें बस एक मौके के तलाश थी।
शाम 5 बजे पूरे देश में जनता ने उत्साह के साथ अपने घरों में शंख नादकर, ताली-थाली बजाकर कोरोना वायरस से लड़ रहे लोगों का धन्यवाद दिया, लेकिन इस दौरान चंद जगहों पर कुछ उत्साही लोग सड़कों पर आ गए। बस इस वर्ग को मौका मिल गया। टिवटर पर कई वैरिफाइड अकाउंट्स से ऐसे वीडियो पोस्ट होने लगे, जहां कुछ लोग सड़कों पर थाली बजाते हुए निकल आए थे। ऐसी मुट्ठी भर घटनाओं पर इस वर्ग ने जमकर छाती पिटनी शुरू कर दी।
पत्रकार रहे विनोद कापड़ी ने अपने वैरिफाइड अकाउंड से ट्वीट किया, MONUMENTAL BLUNDER : महामारी के समय देश को इस तमाशे और पागलपन में धकेलने के लिए प्रधानमंत्री को देश से माफ़ी मांगनी चाहिए और कल ही फिर राष्ट्र को संबोधित करके बताना चाहिए कि आज कितना भारी नुक़सान हुआ है।

corona _1  H x  
न्यूयॉर्क टाइम्स में मोदी सरकार के विरोध में लेख लिखने वाली पत्रकार राणा आयूब ने मुद्दे को ईवीएम से जोड़ डाला। राणा ने हरी अय्यगर नामक व्यक्ति के ट्वीट को रिट्वीट करते हुए लिखा, और आप अब भी ईवीएम हैकिंग की साजिश पर विश्वास करते हैं?
इंडिया टुडे चैनल के वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई ने अहमदाबाद के एक वीडियो को ट्वीट करके इसे राजनीतिक तमाशा करार दिया। ये और बात है कि सरदेसाई ने अपनी कट्टर मोदी विरोधी पत्नी सगरिका घोष के साथ घर के बालकानी में ताली बजाई थी।
इंडिया टुडे ग्रुप के हिंदी चैनल आज तक में पत्रकार नवीन कुमार ने ट्वीट किया, संकट काल को भी इवेंट में बदल देने की प्रधानमंत्री की भूख ने एक महामारी को मज़ाक में बदल ही दिया। इसी का डर था। इस बात पार उनके भक्त खिसिया जाएंगे, दांत चियारने लगेंगे। लेकिन जो सामने है वो आपराधिक है। 10 मिनट में 130 करोड़ लोगों के आत्मनिर्वासन की धज्जी धज्जियां उड़ गईं। कौन ज़िम्मेदार है ?
एक और वैरिफाइड टिवटर अकाउंट सुधीर यादव ने तो हद ही पार कर दी। सुधीर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मंदिर का घंटा बजाता वीडियो शेयर कर घटिया शब्दों का प्रयोग किया। हालांकि, बाद में इस ट्वीट को हटा लिया गया।
सवाल ये उठता है कि चंद लोगों की नादानी से पूरे देश की जनता, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना का क्या औचित्य है? जबकि दुनियाभर में प्रधानमंत्री के जनता कर्फ्यू, डॉक्टरों को धन्यवाद देने की प्रशंसा हो रही है। देश के प्रथम नागरिक राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, एनसीपी नेता शरद पवार, ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक, हाल में राजग से अलग हुए शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, महानायक अमिताभ बच्चन, रिलायंस के मालिक मुकेश अंबानी, बड़ी-बड़ी हस्तियों समेत सभी राज्यों में करोड़ों लोगों ने अपने घरों में रहकर कोरोना वायरस से लड़ रहे लोगों का धन्यवाद दिया।
कोरोना वायरस से जब देश को एकजुट होकर लड़ना चाहिए, तब नरेंद्र मोदी विरोधी वर्ग अलग ही सुर अलाप रहा है। यही वो वर्ग है, जिसने अल्पसंख्यकों को नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर भड़काया, जबकि इस कानून से देश के अल्पसंख्यकों पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है। मेडिकल इमरजेंसी के बावजूद दिल्ली के शाहिन बाग समेत कई शहरों में अल्पसंख्यक महिलाएं धरना देने पर उतारू हैं। मंदिर, गुरुद्वारे, चर्च समेत सभी धर्मस्थल बंद हैं, लेकिन कुछ कट्टरपंथी मुसलमान मस्जिदों में भीड़ लगाने पर अमादा हैं।
भारत जैसे विशाल आबादी के देश में यदि यह महामारी फैली तो करोड़ों लोग प्रभावित होंगे, लेकिन यह सीधी सी बात इस वर्ग को समझ नहीं आती है। इस वर्ग को समझना चाहिए कि यह समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खड़े होने का है। यदि इस वर्ग के पास कोरोना वायरस से निपटने का कोई रोडमैप है तो वो जरूर बताए, लेकिन मोदी विरोध के लिए विरोध करना उचित नहीं है।