जामिया के प्रोफेसर ने सीएए का समर्थन कर रहे हिंदू छात्रों को फेल करने की बात कही, विवि ने निलंबित किया
    दिनांक 27-मार्च-2020
जामिया मिल्लिया इस्लामिया का सहायक प्राध्यापक अबरार अहमद एक ट्वीट करके दावा करता है कि उसने नागरिकता संशोधन अधिनियम का समर्थन करने वाले 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल कर दिया है। मामले के तूल पकड़ने के बाद विवि प्रशासन ने उसे जांच पूरी होने तक उसे निलंबित कर दिया है

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जामिया मिल्लिया इस्लामिया का असिस्टेंट प्रोफेसर अबरार अहमद एक ट्वीट करके दावा करता है कि उसने नागरिकता संशोधन अधिनियम का समर्थन करने वाले 15 गैर मुस्लिम छात्रों को फेल कर दिया है। जब सोशल मीडिया का ध्यान इस ओर जाता है तो लोग उसकी मजम्मत करने में लग जाते हैं और सीएए के नाम पर किस तरीके से एक खास वर्ग द्वारा संगठित तरीके से काम किया जा रहा था उसे उजागर करने लगते हैं। हालांकि मामला जब बढ़ने लगता है तो प्राध्यापक की ओर से सफाई आती है जिसमें कहता है कि वह तो सिर्फ मजाक कर रहा था। हालांकि तब तक बात काफी बढ़ चुकी होती है। विश्वविद्यालय प्रशासन मामले की संवेदनशीलता को देख्रते हुए उसकी कारगुजारी को गंभीर मामला मानते हुए मामले की जांच पूरी होने तक उसे निलंबित कर देता है।

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दरअसल, डॉ. अबरार ने 25 मार्च की सुबह एक ट्वीट में लिखा था, "15 गैर मुस्लिमों को छोड़कर मेरे सभी छात्र पास हो गए हैं। अगर आप सीएए के खिलाफ आंदोलन करते हैं तो मेरे पास सीएए के पक्ष में 55 छात्र हैं। अगर आंदोलन खत्म नहीं हुआ तो बहुमत आपको सबक सिखाएगा। कोरोना के चलते आपके आंदोलन के चिह्न मिट गए हैं। मैं हैरान हूं कि आपको मुझसे नफरत क्यों है? मामला बढ़ने के बाद उसी दिन शाम को अबरार का एक और ट्वीट आता है जिसमें वह कहता है,"परीक्षा में भेदभाव को लेकर जो मैंने ट्वीट किया था वह सिर्फ सीएए और सीएए विरोध को लेकर एक समुदाय के खिलाफ सरकार के भेदभावपूर्वण रवैये पर व्यंग्य था। न तो ऐसी कोई परीक्षा हुई है और न ही कोई रिजल्ट आया है। जरा ठहरिए और फिर सो सोचिए, यह सिर्फ एक मुद्दे को समझाने के लिए कहा गया है। मैं कभी भेदभाव नहीं करता।"
मीडिया में मामला आने के बाद विवि जामिया प्रशासन की ओर से एक ट्वीट किया जाता है और कहा जाता है कि डॉ. अबरार ने परीक्षा में 15 गैर-मुस्लिम छात्रों को सार्वजनिक स्थान पर फेल करने की बात कही है, जो सांप्रदायिक विद्वेष को उकसाने वाला एक गंभीर कृत्य है। विश्वविद्यालय ने जांच पूरी होने तक उन्हें निलंबित किया है।