कोरोना का कम्युनिस्ट कनेक्शन
   दिनांक 30-मार्च-2020
चीनी वायरस ( कोरोना) को दुनिया में फैलने से रोका जा सकता था अगर 2-3 हफ्ते पहले डब्ल्यूएचओ सच बता देता.. डब्ल्यूएचओ के कम्युनिस्ट प्रमुख समेत दुनियाभर के वामपंथियों ने वुहान वायरस को महामारी बनाने में अपना योगदान दिया है. बड़े मोहरों से लेकर प्यादों तक ये साझेदारी चौंकाती है. पढ़िए कोरोना का कम्युनिस्ट  कनेक्शन
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डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल तेद्रोस अदनोम चीन की प्रशंसा की तो हांगकांग के कार्टूनिस्ट ने उन्हें आंखों पर चीन के  झंडे की पट्टी बांधे चित्रित कर विरोध जताया.
कम्युनिस्ट कहीं भी हो, चीन की इबादत करने के लिए सब कुछ दांव पर लगा देता है. दुनिया भर में कोरोना वायरस के फैलने के बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं. जब वुहान वायरस से चीन में मरने वालों की संख्या आसमान छूने लगी तब भी डब्ल्यूएचओ के डायरेक्टर जनरल तेद्रोस अदनोम चीन की प्रशंसा की नज्में सुना रहे थे. तेद्रोस के हिसाब से चीन कोरोना के मामले से अच्छी तरह निपट रहा था, और सफलतापूर्वक रोकथाम कर रहा था. वुहान में मच रही तबाही को जानने वाले इस चमचागिरी पर असमंजस में थे. चीन की निरंतर आक्रामकता से त्रस्त हांगकांग के एक कार्टूनिस्ट ने तेद्रोस अदनोम आंखों पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (चीन का) झंडे की पट्टी बांधे चित्रित किया. जब जनवरी में चीन के वुहान में चीनी वायरस ( कोरोना) का विस्फोट हुआ, तब अदनोम के नेतृत्व में डब्ल्यूएचओ बीमारी से मरते लोगों को बचाने की जगह चीन की छवि बचाने में व्यस्त दिखाई दिया.
तेद्रोस : एक पुराना कामरेड और चीन का अफ्रीकी पिट्ठू
तेद्रोस इथियोपिया से हैं. वहां की सताधारी वामपंथी पार्टी टाइग्रे लिबरेशन फ्रंट के पुराने नेता तेद्रोस ने इथियोपिया के स्वास्थ्य मंत्री के रूप में काम किया. कार्यकाल में बदनामी कमाई. तेद्रोस पर इथियोपिया में अक्षम स्वास्थ्य मंत्री होने और तीन कॉलरा महामारियों को छिपाने का आरोप लगा. लेकिन 2017 में चीन ने तेद्रोस को डब्ल्यूएचओ का डायरेक्टर जनरल बनाने के लिए अपनी ताकत का इस्तेमाल किया. विशेष रूप से दुनिया के विकासशील देशों पर दबाव बनाकर चीन ने तेद्रोस के पक्ष में संयुत राष्ट्र में मतदान करवाया. इस कुर्सी पर आने के बाद तेद्रोस ने ज़िम्बाब्वे के बदनाम मार्क्सवादी-लेनिनवादी तानाशाह और मानवाधिकार हनन के आरोपी रॉबर्ट मुगाबे को संयुक्त राष्ट्र का गुडविल एम्बेसडर बनाने की मुहिम छेड़ी, जो दुनियाभर की आलोचना के बाद वापस लेनी पड़ी. वास्तव में चीन मुगाबे को लाना चाहता था.
चीनी नमक का क़र्ज़ मानवता के घाव पर.....
तेद्रोस का कयुनिस्ट चीन से संबंध कम्युनिस्ट होने के नाते है. डब्ल्यूएचओ के संविधान के अनुसार संगठन की जिम्मेदारी सारे विश्व में स्वास्थ्य सेवाओं और बीमारों की चिंता-सेवा करने की है, लेकिन तेद्रोस ने अपनी ताकत चीन के कम्युनिस्ट तानाशाहों की सेवा करने में लगा दी. जब वुहान वायरस चीन के बाहर नहीं निकला था तब तेद्रोस ने चीन के प्रोपेगंडा को दुहराया और दुनिया को धोखे में रखा. चीन ने जो आंकड़े प्रस्तुत किए, तेद्रोस ने मान लिए. चीन ने कोरोना के बारे में चेतावनी देने वाले अपने चिकित्सकों और वैज्ञानिकों को रोका, उनसे रिपोर्ट नष्ट करवाई. उन्हें दंडित किया. तेद्रोस ने आँखें फेर लीं. 30 जनवरी को तेद्रोस ने कहा कि “चीन कोरोना की रोकथाम करके नया आदर्श गढ़ रहा है.” उधर, चीन के एक रिअल एस्टेट दिग्गज शी झिनकिआंग ने चीन सरकार की कोरोना से निपटने की नीति की आलोचना की. एक दिन झिनकिआंग अचानक गायब हो गए.

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जघन्य अपराध....
चीन ने कहा कि कोरोना एक इंसान से दूसरे इंसान में नहीं संक्रमित होता, तेद्रोस ने हामी (14 जनवरी को) भर दी. इस दौरान वुहान के नागरिक सारी दुनिया में पहुँच रहे थे. चीन मरने वालों की वास्तविक संख्या छिपाता रहा लेकिन डब्ल्यूएचओ ने कोई प्रतिप्रश्न नहीं किया. 30 जनवरी को जाकर उसने वुहान वायरस को लेकर स्वास्थ्य आपातकाल की घोषणा की. जब तक डब्ल्यूएचओ जागा कोरोना दुनिया के 114 देशों में दस्तक दे चुका था. 1 लाख 80 हजार लोग इसकी चपेट में आ चुके थे.
तेद्रोस की चीन परस्ती मानवता को कितनी भारी पड़ी इसका अंदाज इस बात से लगता है कि जनवरी में वुहान से 70 लाख लोग चीन और दुनिया के अलग-अलग देशों में गए, जबकि दिसंबर से ही वहां कोरोना फ़ैल रहा था. अगर 2-3 हफ्ते पहले डब्ल्यूएचओ सच बतला देता , और दुनिया के देश चीनियों के अपने-अपने देशों में आने पर प्रतिबंध लगा देते, तो कोरोना को दुनिया में फैलने से रोका जा सकता था. जब अमेरिका व दुनिया के देश चीन से आने वाले उड़ानों पर प्रतिबंध लगाने लगे तो 3 फरवरी को तेद्रोस ने इन देशों की आलोचना करते हुए कहा “अंतर्राष्ट्रीय आवागमन और व्यापार को अनावश्यक रूप से बाधित करने की कोई आवश्यकता नहीं है. हम देशों से प्रमाणों के आधार पर फैसले लेने का आह्वान करते हैं.” अब चीन के पक्ष में और मानवता के लिए घातक झूठे प्रमाण तो तेद्रोस ने जुटा ही दिए थे. जब 16 मार्च को ट्रम्प ने कोरोनावीरुस को चाइना वायरस कहा तो अगले ही दिन तेद्रोस ने डब्ल्यूएचओ की तरफ से बयान जारी करवाया कि “वायरस की कोई राष्ट्रीयता नहीं होती...किसी को दोष देने की आवश्यकता नहीं है..”
वुहानवायरस के कोड़े से ताइवान को लुहुलुहान किया....
चीन ताइवान पर अपना कब्जा जमाने की फिराक में है, पर स्वाभिमानी ताइवान चीन के आगे घुटने टेकने को तैयार नहीं है. ताइवान कोरोना से भी सफलतापूर्वक लड़ रहा है, लेकिन चीन के दबाव के आगे सलाम बजाते तेद्रोस अदनोम ने ताइवान को एक स्वतंत्र देश के रूप में डब्ल्यूएचओ की बैठकों में भाग लेने नहीं दिया. डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी कोरोना संबंधी डेटा में ताइवान के डेटा को चीन के साथ मिलाकर दिखाया. ताइवान में कोरोना के मात्र दो दर्जन मामले थे और डब्ल्यूएचओ उसे चीन के साथ जोड़कर गंभीर रूप से कोविड19 ग्रस्त बतला रहा था. डब्ल्यूएचओ की इस हरकत का परिणाम ये हुआ कि अनेक देशों, जैसे इटली, वियतनाम और फिलिपीन्स ने ताइवान से आने वाली उड़ानों पर प्रतिबंध लगा दिया. हालांकि सच समझ आने पर वियतनाम और फिलिपीन्स ने इस निर्णय को वापस ले लिया.
चीन : अपराध दर अपराध
जब वुहान में कोरोनावायरस ने विकराल रूप धारण कर लिया और बात को दबाए रखना कठिन हो गया तब इस महामारी की ख़बरें बाहर पहुँचीं. मरने वालों का वास्तविक आंकडा अज्ञात है. उस क्षेत्र के सवा करोड़ से ज्यादा मोबाइल फोन बंद आ रहे हैं. कोरोना को दुनिया में फैलाने में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना (सीपीसी) ने बड़ी भूमिका निभाई. सीपीसी की मर्जी के बिना चीन में पत्ता भी नहीं खडकता. दुनिया के प्रति सीपीसी का सबसे बड़ा अपराध है कि इस वायरस की खबर और उसकी घातकता को दुनिया से छिपाकर रखा गया. दुनिया में ये बीमारी फ़ैल गई. चीन ने हाथ झाड़ लिए.
स्पेन भी बुरी तरह इस चाइना वायरस की मार झेल रहा है. वहां 80 हजार से ज्यादा लोग इससे संक्रमित हैं. 6,800 की मौत हो चुकी है. चीन ने स्पेन को 6 लाख कोरोनावायरस टेस्ट किट बेची. हर किट की कीमत तीन हजार रूपए से अधिक है. स्पेन की सरकार के अनुसार ये टेस्ट किट घटिया हैं और कोरोना संक्रमित लोगों को भी स्वस्थ (नेगेटिव) बतला रही हैं. इनकी दक्षता मात्र 30 प्रतिशत हैं. स्पेन ने इनका इस्तेमाल बंद कर दिया है. चीन के टेस्ट किट के बारे में ऐसी ही शिकायत दो अन्य देशों, चेक रिपब्लिक और जॉर्जिया ने भी की है. दुनियाभर में कोविड 19 के पीड़ित सांस लेने को तड़प रहे हैं, चीन उनकी मजबूर सरकारों को वेंटिलेटर और टेस्ट किट बेचकर नोट पीट रहा है.

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स्पेन ने चीन द्वारा वुहान वायरस को टेस्ट करने के लिए बनाई गई किट को घटिया बताकर वापस किया.
 
इटली वाला कामरेड
इटली में 1 लाख के लगभग लोग कोविड 19 से पीड़ित हैं. 11 हजार के आसपास मौत के मुँह में समा चुके हैं. इटली में कोरोना चीनियों के प्रत्यक्ष, व्यापक संपर्क से फैला. इटली के फ्लोरेंस शहर के मेयर कामरेड दारियो नार्देला ने जो किया है वो वामपंथियों द्वारा सभ्य समाजों में आदर्शों के नाम पर जो कुछ किया जाता है, उसकी मिसाल है. जब दुनिया कोरोना की दहशत में चीनियों से दूरी बना रही थी तब नार्देला ने इसे “नस्लीय भेदभाव” बतलाते हुए नारा दिया “एबरेसिआ उन सिनीज़” (हग अ चाइनीज़) अर्थात “एक चीनी का आलिंगन करो.” नार्देला ने खुद एक चीनी को लिपटाकर फोटो खिंचवाई और ट्विटर पर डाली. फलस्वरूप इटली में चीनियों को गले लगाने की होड़ लग गई. आज इटली बीमारों और लाशों के बढ़ते बोझ से काँप रहा है. दुनिया में दूसरे क्रमांक की कहलाने वाली उसकी स्वास्थ्य व्यवस्था चरमरा गई है.
भारत के कामरेड
भारत में वामपंथी चीन पर चुप्पी मारे हैं,लेकिन चीनी वायरस के खिलाफ देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री मोदी की आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने मोदी के जनता कर्फ्यू के आह्वान और लॉकडाउन का मजाक उड़ाया. 22 मार्च के घंटानाद को पिछडापन बतलाया. उन्होंने लॉकडाउन की अवहेलना करके दिल्ली के शाहीनबाग़ और उत्तरप्रदेश के गाज़ियाबाद में सीएए के जबरन विरोध में बैठी मुस्लिम महिलाओं का समर्थन किया, और जब पुलिस ने उन्हें वहाँ से हटाया तो उसे तानाशाही बतलाया. इन लोगों ने लॉकडाउन को लेकर दिहाड़ी मजदूरों का भयादोहन किया और लॉकडाउन को तोड़कर गाँवों को लौटने के लिए उकसाया. जब दिल्ली और मुंबई के शहरों के मुख्यमार्गों पर पलायन करने वाले मजदूर इकट्ठे होने लगे तो उसे प्रचारित किया, पलायन को हवा दी.
इस पूरे सिलसिले को देखकर कहा जा सकता है कि चीन के तानाशाहों से लेकर तेद्रोस अदनोम तक, और “एबरेसिआ उन सिनीज़” वाले मेयर से लेकर भारत के लाल सलाम वालों तक, सभी कामरेडों ने मिलकर कोरोना को घातक महामारी बनाया. वाद के वायरस पर सवार वुहान वायरस सारी दुनिया में पहुंचा.