कोरोना संकट: संघ के स्वयंसेवक संभाल रहे मोर्चा
   दिनांक 31-मार्च-2020
दिल्ली स्थित आनंद विहार बस टर्मिनल पर अरविंद केजरीवाल सरकार, उनके प्रशासन की निष्क्रियता और साजिश के तहत जिस तरीके के हालात खड़े किए, वह किसी से छिपे नहीं रह गए हैं। लेकिन इस मुश्किल घड़ी में संघ के स्वयंसेवकों ने न केवल मोर्चा संभाला बल्कि गरीब असहाय मजदूरों की हर संभव मदद की

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चीनी कोरोना वायरस के संक्रमण काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवकों ने सेवा की नई मिसाल पेश की है। कोरोना वायरस के संक्रमण काल में जब हर किसी के लिए खुद की और परिजनों की चिंता करता है, ऐसे में समय में संघ के कार्यकर्ता लगातार समाज के बीच जाकर काम कर रहेे हैं। स्वयंसेवक भले ही सावधानी बरत रहे हों लेकिन कोरोना जैसी संक्रामक वायरस उन्हें भी चपेट में ले उन्हें इस बात की कोई परवाह नहीं है।
कार्यकर्ताओं की टोलियां देश के विभिन्न इलाकों में लोगों के बीच खाने-पीने की सामग्री बांटने से लेकर उन्हें भोजन खिलाने में लगी हुई हैं। ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहने पाए। इतना ही नहीं दिल्ली के आनंद बिहार बस अड्डे पर लाखों लोगों के पलायन की घटना को जिस तरह से संघ के स्वयंसेवकों ने संभाला उसने स्थिति को विस्फोटक होने से बचा लिया। अगर कहीं गरीब मजदूरों के पलायन की भीड़ भगदड़ में बदल गई होती तो किसी दुर्घटना से इंकार नहीं किया जा सकता। यकीनन यहां पर संघ के स्वसेवकों का जिसने भी प्रबंधन और सेवा का भाव देखा वह भावविभोर हुए बिना नहीं रह पाया।
दरअसल देश भर में कोरोना वायरस के संक्रमण के चलते सरकार ने 21 दिनों के लॉकडॉउन की घोषणा कर रखी है। पूरा देश इस लॉकडॉउन का पालन कर रहा है, मगर ऐसे समय दिल्ली और एनसीआर इलाके में रहने वाले लाखों मजदूरों के समक्ष रोजी-रोटी का संकट खड़ा हुआ है। काम-धाम बंद होने से लाखों मजदूरों ने दिल्ली और एनसीआर से अपने घरों के लिए पलायन शुरू कर दिया। एक ओर आवागमन के सभी साधन बंद होने से यह लोग पैदल ही घरों की तरफ निकल पड़े। इसी बीच कुछ अराजक तत्वों ने यह अफवाह फैलाई लॉक डॉउन कम से कम तीन महीने का होगा। ऐसे में जो भी अपने घर जाना चाहें वह आनंद बिहार बस अड्डे से अपने घरों को जा सकते हैं। यहां उत्तर प्रदेश की सरकार की तरफ से पूरी व्यवस्था की गई है। लाॅक डाउन के बावजूद दिल्ली की अरविंद केजरीवाल सरकार के परिवहन विभाग की बसें लोगों को एक साजिश के तहत आनंद बिहार बस अड्डे पर छोड़ने लगी। एक तरफ पैदल चलने वाले लोगों की भीड़ तो दूसरी ओर बसों द्वारा लाई गई आनंद बिहार बस अड्डे पर भीड़। यह वह मौका था तब हालात भगदड़ वाले बन गए। सवाल उठने लगा कि जब दिल्ली में लॉकडाउन है तो डीटीसी बसे क्यों चलाई जा रही हैं। आखिर इसके पीछे की साजिश क्या है।
जब संभाला स्वयंसेवकों ने मोर्चा
कोरोना संक्रमण के चलते एक साथ इतनी बड़ी भीड़ के एकत्र होने से स्वास्थ्य का बड़ा खतरा पैदा हो गया। पुलिस और प्रशासन के समझाने पर भी जब मजदूर सड़क से हटने को तैयार नहीं हुए तो संघ के पूर्वी दिल्ली प्रचार विभाग के कार्यकर्ताओं ने मोर्चा संभाला। जिसके बाद संघ के हजारों कार्यकर्ता पूरे सुरक्षा बंदोबस्त को अपनाते हुए मजदूरों के बीच पहुंचे और उन्हें सोशल डिस्टेंसिंग की बातें बताई। उनके बीच मॉस्क और दस्तानों का वितरण शुरू किया। उन्हें एक दूसरे से एक-एक मीटर दूर बैठाया और धैर्य के साथ उनकी बातों को सुना और प्रशासन से जुड़े अधिकारियों को उनके लिए वाहनों का इंतजाम करने के लिए कहा। देखते ही देखते संघ के हजारों कार्यकर्ता मजदूरों के बीच पानी, नाश्ता, खाना, चाय, फल, साबुन, सनेटाइजर और मॉस्क का वितरण करने लगे। कुछ देर पहले जो मजदूर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की बातें नहीं सुन रहे थे वे संघ के स्वयंसेवकों के समझाने और जागरूक करने पर वह बिल्कुुल अनुशासन में आ गए और सभी ने धैर्य के साथ कोरोना के प्रकोप को कम करने वाले सभी उपायों को अपनाया।
फेक न्यूज पर जमा हुए गरीब मजदूर
बस टर्मिनल पर इतनी बड़ी संख्या में जमा होने के बारे में उन्होंने स्वयंसेवकों को बताया कि उन्हें बताया गया था कि आनंद विहार से पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के लिए बसों के चलाए जाने की सूचना मिली थी। लेकिन जब वे यहां पहुंचे तो यह महज अफवाह ही साबित हुई।
जब पुलिस अधिकारियों ने की सराहना
पूर्वी दिल्ली के कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कहा कि उनके समक्ष मजदूरों को लेकर बड़ी समस्या खड़ी हो गई थी। लेकिन संघ के स्वयंसेवकों ने उनके बीच पहुंच कर न केवल स्थिति को विस्फोटक होने से बचाया बल्कि लोगों को कोरोना के प्रति जागरूक किया और सभी को धैर्य के साथ सुरक्षा मानकों को पूरा करने के लिए प्रेरित किया। दिल्ली के खेड़ा कालोनी में किराने के कमरे में रहवे वाले और मूल रूप से बदायूं के निवासी संजीव यादव मौके के हालात को लेकर कहते हैं कि संघ कार्यकर्ताओं ने बहुत ही अच्छी तरह से स्थिति को संभाला नहीं तो भगदड़ में कुछ भी अनहोनी हो सकती थी। अच्छा हुआ जो यह लोग यहां आ गए। तो वहीं गाजियाबाद के प्रशासनिक अधिकारियों का कहना था अगर संघ के कार्यकर्ता सहयोग नहीं करते तो उनके सामने खड़ी यह चुनौती भयावह रूप ले लेती।