केरल में हंगामा नहीं तो बरेली में लोगों को सेनेटाइज करने पर हंगामा क्यों ?
   दिनांक 31-मार्च-2020
केरल का ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें लोगों को खड़ा करके उन पर सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी की बौछार की जा रही है। कमाल की बात यह है कि केरल में लोगों को सेनेटाइज करने पर किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। वहीं बरेली में किया तो हंगामा खड़ा कर दिया

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केरल में लोगों को सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी की बौछार करते कर्मचारी।
देश को जब एक होकर चीनी वायरस (कोरोना) से लड़ना चाहिए, तब विपक्ष के नेता गंदी राजनीति से बाज नहीं आ रहे हैं। पहले विपक्षी नेता दिल्ली से निकाले जा रहे दिहाड़ी मजदूरों को लेकर उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को निशाना बना रहे थे, जबकि पूरा संकट अरविंद केजरीवाल सरकार का खड़ा किया हुआ था। जब योगी आदित्यनाथ की सरकार ने स्थिति को संभाल लिया तो अब वो बरेली में दिल्ली से लौट रहे दिहाड़ी मजदूरों को सेनेटाइज करने वाले वीडियो पर हाय-तौबा मचा रहे हैं। सच्चाई यह है कि वीडियो में कुछ लोगों पर सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी की बौछार की जा रही है। सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी का इस्तेमाल इन दिनों शहरों को सेनेटाइज करने में हो रहा है। वैसे सोडियम हाइपोक्लॉरिट का इस्तेमाल तरण-तालों में पानी में होता है, ताकि बैक्टीरिया को खत्म किया जा सके।
यह इंसान को नुकसान नहीं पहुंचाता। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ लोगों पर स्वास्थ्यकर्मी एकसाथ सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी की बौछार कर रहे हैं। बरेली के वीडियो को सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए कांग्रेस महासचिव प्रियंका वाड्रा ने उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं, जिनका कोई अर्थ नहीं है। आखिर तरण-ताल में इस्लेमाल किए जाने वाले सोडियम हाइपोक्लॉरिट से क्या इंसान को नुकसान होगा? बरेली के स्वास्थ्यकर्मियों ने तो केवल मजदूरों को बैक्टीरिया मुक्त करने के लिए यह पानी छिड़का है। प्रियंका वाड्रा ने सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी को केमिकल बताकर यूं पेश करने की कोशिश की है, मानो ये तेजाब हो। यदि यह वाकई में केमिकल होता तो कई मजदूर वहीं धराशायी हो जाते। कई की तबियत बिगड़ जाती, लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ।
 
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प्रियंका वाड्रा ने इससे पहले अरविंद केजरीवाल की सरकार द्वारा दिल्ली से निकाले गए इन दिहाड़ी मजदूरों को लेकर भी योगी सरकार पर निशाना साधा था। सच्चाई यह है कि योगी आदित्यनाथ सरकार ने संकट में फंसे दिहाड़ी मजदूरों को न केवल उनके घरों तक पहुंचाया, बल्कि उनके भोजन की व्यवस्था भी की। बरेली का वीडियो डालकर प्रियंका वाड्रा ने यह साबित कर दिया है कि वो अच्छी विपक्षी नेता की भूमिका निभाने के बजाय केवल विरोध के लिए विरोध कर रही हैं।
आम आदमी पार्टी की नेता स्वाति मालीवाल तो प्रियंका वाड्रा से भी एक कदम आगे निकल गईं, जबकि स्वयं उनकी दिल्ली की सरकार ने सारी समस्या पैदा की है।
दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार ने सुनियोजित तरीके से उत्तर प्रदेश और बिहार के दिहाड़ी मजदूरों को बाहर निकलने पर मजबूर किया। अपनी सरकार पर सवाल खड़े करने के बजाय स्वाति मालीवाल आरोप लगा रही हैं कि उत्तर प्रदेश प्रशासन गरीब को इंसान नहीं मानता, जबकि सच तो यह है कि चीनी वायरस से उत्पन्न संकट के चलते पूरी दुनिया में लोगों को सैनेटाइज किया जा रहा है। केरल का ऐसा ही एक वीडियो सामने आया है, जिसमें लोगों को खड़ा करके उन पर सोडियम हाइपोक्लॉरिट युक्त पानी की बौछार की जा रही है। कमाल की बात यह है कि केरल में लोगों को सेनेटाइज करने पर किसी ने कोई आपत्ति नहीं जताई है। विपक्ष नेताओं के साथ मीडिया का मुंह भी बंद है।
कांग्रेस पार्टी पहले देश में तत्काल लॉकडाउन लगाने की हिमायती थी, वो अब विरोध के बहाने ढूंढ रही है। कांग्रेस पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी समेत अन्य नेता अब कह रहे हैं कि सरकार ने बिना तैयारी लॉकडाउन कर दिया। सवाल यह है कि सरकार जनता को चीनी वायरस (कोरोना) के संकट से बचाती या तैयारी करती। हद तो यह है कि विपक्ष मात्र राजनीति करने में जुटा है और वामपंथी विचारक मीडिया उसे हवा दे रहा है। जब दुनिया चीनी वायरस से लड़ाई में भारत की तरफ देख रही है, ऐसे में विपक्ष का ये रवैया कतई उचित नहीं कहा जा सकता। अच्छा तो यह हो कि विपक्ष सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चीनी वायरस को हराने में साथ दे, वरना सरकार के काम में व्यवधान डालना बंद कर दे।