कोरोना संकट: पाकिस्तान के कराची में हिंदुओं को राशन नहीं, यूपी में योगी ने मजदूरों के खातों में 611 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए
   दिनांक 31-मार्च-2020
यहां कहने का आशय ये कतई नहीं है कि किसी पर कोई अहसान किया जा रहा है. बस ये समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि सुविधाओं के लिए एक तबके के पास कागज हैं, लेकिन जनगणना के लिए नहीं. कोरोना के संकट में यूपी सरकार ने मनरेगा के तहत मजदूरों के खाते 611 करोड़ रुपए ट्रांसफर किए बिना यह देखे कि कौन हिंदू है कौन मुसलमान
 
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आज हम दो तस्वीरों की बात करेंगे. ये बात है पाकिस्तान में हिंदुओ और भारत में मुसलमानों की. कोरोना संकट के समय, या किसी भी समय मानवीय मसलों को धर्म से ऊपर उठकर देखा जाना चाहिए. लेकिन जब भेदभाव ही धर्म के आधार पर होने लगे, तो ये तुलना लाजिमी है. पाकिस्तान में हिंदुओं को राशन देने के लिए मना कर दिया गया है. दिवालिया होने के कगार पर खड़े पाकिस्तान में कोरोना संकट के दौरान हिंदुओं को राशन की दुकानों से ये कहकर लौटा दिया गया कि खाद्य सामग्री सिर्फ मुसलमानों के लिए है. दूसरी तस्वीर भारत की है. जिन इलाकों में कागज नहीं दिखाएंगे, और सीएए के खिलाफ नारे लग रहे थे, वहां आज बैंकों में लंबी कतार थी. सबके हाथ में पासबुक थीं. दरअसल आज ही उत्तर प्रदेश सरकार ने जनधन खातों में कोरोना सहायता की नगदी की पहली किस्त भेजी है. वहीं पाकिस्तान में जुल्म से हिंदुओं की जान पर बन आई है.
कोरोना वायरस के डर से पाकिस्तान के कराची में भी लॉकडाउन चल रहा है. पाकिस्तान में अर्थव्यवस्था चरमरा चुकी है. खाद्यान्न के भंडार खाली पड़े हैं. ऊपर से भूखी जनता ने अनाज के लिए हाय-तौबा मचा रखी है. मजबूरन पाकिस्तान सरकार ने कराची में जरूरतमंद लोगों के लिए खाना और राशन भेजा गया. राशन के लिए कतारें लग गईं. पाकिस्तान में अधिकतर हिंदू लगातार शोषण और भेदभाव के कारण गरीबी की रेखा के नीचे हैं. जाहिर है, उन्हें मदद की ज्यादा जरूरत है . तमाम हिंदू परिवार भी राशन लेने के लिए दुकानों पर पहुंचे. लेकिन सरकारी अधिकारियों ने साफ कर दिया कि ये राहत सामग्री सिर्फ मुसलमानों के लिए है. सरकारी आदेश ये था कि हिंदुओं को किसी भी तरह की राहत सामग्री न दी जाए. सिर्फ कराची क्यों. पूरे सिंध में चाहे लियारी हो या सच्चल गोठ या फिर अन्य इलाके. हिंदुओं को राहत सामग्री से इंकार कर दिया गया. जाहिर है, ये आदेश उच्चतम स्तर पर दिए गए थे. इसके पीछे पाकिस्तान की चाल ये है कि जबकि पूरी दुनिया कोरोना की महामारी से निपटने में व्यस्त है, पाकिस्तान में बचे-खुले हिंदू या तो कोरोना से मर जाएं, या फिर भुखमरी से. सिंध के मानवाधिकार कार्यकर्ता अय्यूब मिर्जा ने तो मोदी सरकार से ही अपील कर डाली है कि वह हिंदुओं को बचाए. उन्होंने कहा कि भारत सरकार राजस्थान के रास्ते सिंध में राहत सामग्री पहुंचाएं. उन्होंने आगाह किया कि पाकिस्तान में हिंदुओं की हालत बहुत खराब है और इमरान सरकार मदद करती नजर नहीं आती. उन्होंने कहा कि हिंदुओं को अगर मदद न मिली, तो वे भूखे मर जाएंगे.
अब जरा तस्वीर का दूसरा पहलू देखिए. सोमवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 27.15 लाख (जी, इसमें हिंदू और मुसलमान का कोई आंकड़ा नहीं है, सब हैं) मनरेगा मजदूरों के बैंक खातों में सीधे 611 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए. योगी सरकार ने चंद दिन पहले ही जन-धन योजना के तहत गरीबी की रेखा से नीचे आने वाले लोगों के खातों में एक-एक हजार रुपये ट्रांसफर किए थे. सरकार ने 30 मार्च को जो 611 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए हैं, उसमें हर श्रमिक को प्रतिमाह 2250 रुपये दिए जा रहे हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि मजदूरो के लिए यह राशि बहुत जरूरी थी. बस ये रकम ही नहीं मिलेगी. उत्तर प्रदेश सरकार सूबे के 80 लाख मनरेगा मजदूरों को मुफ्त में राशन भी देगी. जी हां, इसमें भी हिंदू और मुसलमान का कोई आंकड़ा नहीं है. केंद्र सरकार भी तीन महीने के लिए गरीबी की रेखा के नीचे रहने वालों को एक किलो दाल और उज्जवला योजना के तहत रसोई गैस सिलेंडर मुफ्त में उपलब्ध करा रही है.
इसका नतीजा ये हुआ कि जिन इलाकों में नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ हिंसा और धरने प्रदर्शन हुए थे, वहां आज बैंकों में लाइन लगी थी. कागज न दिखाने के नारे लगाने वाले हाथों में पासबुक लिए खड़े थे. इसी तरह की लाइन राशन की दुकानों पर है. जो कहते थे कि हमारे पास कोई कागज नहीं है, वे हाथ में राशन कार्ड लिए कतार में थे. गैस सिलेंडर के लिए लोग अपनी किताबें और पर्चियां लेकर लाइन में लगे हैं. यहां कहने का आशय ये कतई नहीं है कि किसी पर कोई अहसान किया जा रहा है. बस ये समझाने का प्रयास किया जा रहा है कि सुविधाओं के लिए एक तबके के पास कागज हैं, लेकिन जनगणना के लिए नहीं. कल तक जो भड़काऊ नेता, चाहे वह कांग्रेस के हों या सपा के या बसपा ये फिर अर्बन नक्सल, कहीं नजर नहीं आ रहे हैं. कहीं वे मौलाना नहीं हैं, जो कहते थे कि कितने मुसलमान कितने हिंदुओं के लिए काफी हैं. आज उन्होंने कोई अपील नहीं की कि सीएए लाने वाली सरकार द्वारा दी जा रही मदद मत लो. उन्हें पता है कि अगर वे कहेंगे भी, तो सुना नहीं जाएगा. क्योंकि माहौल सुविधाजनक नहीं है.
ये सबको मिलेगा....
- डॉक्टरों, पारामेडिकल कर्मियों, चिकित्सा सेवा कर्मियों को 50 लाख रुपये प्रति परिवार का बीमा
- राशन की दुकानों से 80 करोड़ परिवारों को अतिरिक्त 5 किलो गेहूं या चावल के साथ एक किलो दाल तीन महीने तक मुफ्त
- जरूरतमंदों की मदद के लिये प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के तहत 1.70 लाख करोड़ रुपये
- प्रधानमंत्री किसान योजना के तहत 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में दो-दो हजार रुपये की अग्रिम किस्त
- मनरेगा के तहत दैनिक मजदूरी 182 रुपये से बढ़ाकर 202 रुपये, पांच करोड़ परिवारों को लाभ
- तीन करोड़ गरीब वृद्धों, गरीब विधवाओं तथा गरीब दिव्यांगों को एक-एक हजार रुपये की अनुग्रह राशि
- 20 करोड़ जनधन खाताधारक महिलाओं को अगले तीन महीने तक प्रति माह 500 रुपये
- उज्ज्वला योजना के 8.3 करोड़ लाभार्थियों को अगले तीन महीने तक मुफ्त मिलेगा रसोई गैस सिलिंडर,
-छोटी कंपनियों के लिये अगले तीन महीने तक नियोक्ता और कर्मचारी दोनों का भविष्य निधि योगदान सरकार द्वारा