पुस्तक ‘गांधी को समझने का यही समय’ लोकार्पित
   दिनांक 09-मार्च-2020

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मंच पर उपस्थित (बाएं से) प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत एवं श्री मोहनराव भागवत
 
नई दिल्ली में गत दिनों राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने प्रख्यात शिक्षाविद् प्रो. जगमोहन सिंह राजपूत की पुस्तक ‘गांधी को समझने का यही समय’ का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि ‘हिन्द स्वराज’ पढ़ने के बाद यह पता चलता है कि अंग्रेजों को भगाने के बाद कैसा भारत होगा, इसकी कल्पना गांधी जी के मन में थी। इसीलिए गांधी जी को आज भी हम आदर और सम्मान से याद करते हैं। यह महात्मा गांधी को समझने का सही समय इसलिए क्योंकि आजादी के बाद भी सभी समस्याएं बनी हुई हैं।
 
यह बात सही है कि ‘गांधी जी की कल्पना का भारत आज नहीं है’, लेकिन आज पूरे देश में घूमने के बाद मैं यह कह सकता हूं कि गांधी जी की कल्पना का भारत अब साकार होना शुरू हो गया है। उन्होंने कहा कि डॉ. हेडगेवार जी ने कहा था-गांधी जी के जीवन का अनुसरण करना चाहिए, सिर्फ स्मरण नहीं। उन्होंने कहा कि गांधी जी की सत्यनिष्ठा निर्विवाद है। उनका धुर विरोधी भी उस पर सवाल नहीं उठा सकता। गांधी जी की विचार दृष्टि का मूल शुद्ध भारतीय था, इसलिए उन्हें अपने हिन्दू होने पर कभी लज्जा महसूस नहीं हुई। उनका विचार था-अपनी श्रद्धा पर अडिग रहो और सभी मत-पंथों का सम्मान करो।
वार्षिकोत्सव सम्पन्न
 
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, जयपुर महानगर के मानसरोवर भाग के माधव नगर घोष केंद्र का वार्षिकोत्सव पिछले दिनों सोडाला स्थित मोदी ग्राउंड में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में अखिल भारतीय सह शारीरिक शिक्षण प्रमुख श्री जगदीश प्रसाद ने कहा कि संघ स्थापना के बाद घोषशुरू हुआ था जो धीरे-धीरे बढ़ते ही जा रहा है।
 
पहले हम सेना की रचनाओं का वादन करते थे लेकिन अब तो संघ के स्वयंसेवकों द्वारा बनाई गई घोष की रचनाओं का उपयोग अन्य भी करते हैं, यह हमारे लिए बड़े गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि हमारा समाज संगठित, शक्ति संपन्न हो तथा भारत परम वैभव पर पहुंचे, यही संघ का मूल ध्येय है। ऐसे में समाज के लोगों को संघ से जुड़कर समाज परिवर्तन और संगठन का कार्य करना चाहिए
 
ठाकुर राम सिंह जी की जयंती पर संगोष्ठी
गत दिनों शिमला में ठाकुर रामसिंह जी की जयंती पर एक गोष्ठी आयोजित हुई। इसे संबोधित करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल ने कहा कि ठाकुर जी का संपूर्ण जीवन भारत माता के लिए समर्पित था। 1942 से लेकर जीवन-पर्यंत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के नाते उन्होंने देश के लिए कार्य किया। वास्तविक भारतीय इतिहास को सबके सामने लाना, उस इतिहास की गहराई के अंदर जाना, संस्कृति के छिपे हुए पहलुओं को सबके समक्ष लेकर आना, यह ठाकुर राम सिंह जी के जीवन का लक्ष्य था। इस अवसर पर अनेक वरिष्ठ जन उपस्थित थे।