जनसंख्या असंतुलन की चुनौतियों पर चर्चा
   दिनांक 09-मार्च-2020
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 संगोष्ठी को संबोधित करते श्री अरुण कुमार
पिछले दिनों संस्कृति संवर्धन न्यास, इंदौर द्वारा ‘जनसंख्या असंतुलन की चुनौतियां एवं हमारी भूमिका’ विषय पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्य वक्ता के रूप में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख श्री अरुण कुमार उपस्थित थे। उन्होंने कहा कि जनसंख्या नियंत्रण की आवश्यकता हेतु सन् 1952 से विचार शुरू हो गया था। सन् 1951 से 2011 के मध्य देखते हैं तो जहां भारत में उद्भव मत-पंथ के लोगों की संख्या 1951 में 87.09 प्रतिशत थी। यह 2011 में 82.6 प्रतिशत हो गई थी। वहीं, 1951 में मुस्लिम 10.45 प्रतिशत थे, 2011 में बढ़कर वे 14.23 प्रतिशत हो गए। देश में 25 राज्य ऐसे हैं, जहां औसत गति से ज्यादा मुस्लिम एवं ईसाई बढ़ रहे हैं। जहां 30 प्रतिशत से ज्यादा मुस्लिम हैं, वहां बहुत तेज गति से परिवर्तन होना शुरू हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि सीमावर्ती प्रदेशों में घुसपैठ जनसंख्या असंतुलन का सबसे बड़ा कारण है, जिसका जीवंत उदाहरण असम व बंगाल हैं। जनसंख्या परिवर्तन के तीन बड़े कारण हैं-जन्म दर में अंतर, घुसपैठ और कन्वर्जन।
इसलिए समाज में जनसंख्या चुनौती के विषय को लेकर बड़े स्तर पर चर्चा की आवश्यकता है।