अमदाबाद में श्रीगुरुजी व्याख्यानमाला संपन्न
   दिनांक 09-मार्च-2020
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मंच पर विराजमान (बाएं से दूसरे) श्री मोहनराव भागवत एवं अन्य विशिष्टजन
 
‘‘हमारे देश को परम वैभव पर ले जाने की संकल्पना केवल हमारे अपने लिए नहीं है। हमें ऐसा वैभव चाहिए कि हमारे वैभव से विश्व का कल्याण हो।’’ उक्त बात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक श्री मोहनराव भागवत ने कही। वे गत दिनों कर्णावती (अमदाबाद) में माधव सृष्टि न्यास द्वारा आयोजित श्री गुरुजी व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि संघ की स्थापना से 5 वर्ष पूर्व यानी 1920 में नागपुर में कांग्रेस अधिवेशन में प्रस्ताव नियामक समिति के सामने डॉ. हेडगेवार ने दो प्रस्ताव रखे थे। पहला प्रस्ताव था कि संपूर्ण देश में गोहत्या बंद करना और दूसरा प्रस्ताव था कि कांग्रेस घोषित करे कि हमारा लक्ष्य भारत के लिए संपूर्ण स्वतंत्रता का है और स्वतंत्र भारत दुनिया के देशों को पूंजीवाद के चंगुल से मुक्त करेगा। लेकिन समिति ने इन दोनों प्रस्तावों को मान्य नहीं किया।
 
इसलिए नहीं कि उनका मतभेद था, बल्कि इसलिए कि उस समय इन प्रस्तावों की भाषा पर बोलना शायद उन्होंने उचित नहीं समझा। बाद में, इन सब बातों को कांग्रेस द्वारा कहा गया। गांधी जी उस अधिवेशन के अध्यक्ष थे। अर्थ प्रधान व्यवस्था की जकड़न आज हम पूरे विश्व में अनुभव कर रहे हैं, उसके आज के स्वरूप का अनुमान लगाकर डॉक्टर हेगडेवार ने तभी कहा था कि स्वतंत्र भारत को ये सब करना पडेÞगा। इसलिए यह विषय नया नहीं है। इस पर चिंतन करना है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आम नागरिक और अनेक संगठनों के अधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित थे।