कोरोना संकट: पाकिस्तान में हिन्दुओं को भूखे मारने की साजिश

    दिनांक 01-अप्रैल-2020   
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जब पूरा विश्व कोरोना के खिलाफ लड़ रहा है, उस समय भी पाकिस्तान अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा। विपदा की घड़ी में सिंध प्रांत में रहने वाले हिन्दुओं को स्थानीय सरकार द्वारा न तो दवाइयां दी जा रही हैं और न ही राशन। उनके लिए ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि यदि वे कोराना वायरस से किसी तरह बच भी गए तो भूखे मरने से कोई नहीं बचा सकता

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पाकिस्तान कोरोना वायरस की आड़ में अपने देश के हिंदुओं के खात्मे की साजिश रच रहा है। लेकिन सीएए विरोधियों को ऐसी खबरें न तो दिखाई दे रही हैं और न ही पड़ोसी देश के हिन्दुओं के दुख-पीड़ा से उन्हें कोई मतलब। हां, अगर बात रोहिंग्या या बांग्लोदशी मुस्लिम घुसपैठियों की आती है तो ऐसे लोगों की पीड़ा, दुख, भावनाएं और मानवीयता उफान मारने लगती हैं। मानवाधिकार के चैंपियन सड़कों पर उतरने लगते हैं। लेकिन जब बात हिन्दुओं की आती है तो इनके मुंह से एक शब्द तक नहीं निकलता।
कोविड-19 को लेकर विश्वभर में हाहाकार मचा है। ऐसे में तमाम देश मानवीय आधार पर मिलकर इसे निपटाने में लगे हुए हैं। मगर पाकिस्तान ऐसे समय में भी अपने हिंदू नागरिकों के विरूद्ध षड़यंत्र रचने से बाज नहीं आ रहा। उनके लिए ऐसी स्थिति पैदा की जा रही है कि यदि वे कोराना वायरस से किसी तरह बच जाएं तो भूख से मरने से उन्हें कोई न बचा सके।
पाकिस्तान में हिंदुओं की सर्वाधिक आबादी सिंध प्रांत में है। पर पंजाब के बाद यह प्रांत सर्वाधिक कोरोना वायरस की चपेट में है। रिपोर्ट लिखने तक पाकिस्तान में कोराना वायरस पीड़ितों की संख्या 1900 पार कर चुकी थी। सिंध में 625 और पंजाब प्रांत में 651 रोगी सामने आ चुके हैं। इस दौरान पाकिस्तान में 25 लोगों की कोरोना वायरस से मौत हो चुकी है। बावजूद इसके पाकिस्तान में हिंदू-मुस्लिम भेदभाव चरम पर है। अभी सिंध में लॉकडाउन है। इसके चलते दिहाड़ी मजदूरों एवं फुटपाथ पर जिंदगी गुजारने वाले बिल्कुल असहाय हैं। पाकिस्तान का पहले ही आर्थिक दिवाला पिटा हुआ है। महंगाई और भ्रष्टाचार इस वक्त भी चरम पर है। ऐसे में निर्धनों का सर्वाधिक बुरा हाल है तो सरकार खजाना खोलने में कोताही कर रही है। सिंध प्रांतीय सरकार ने प्रत्येक जिले के बेसहारा लोगों को भोजन-पानी उपलब्ध कराने के लिए मात्र दो करोड़ रुपये ही उपलब्ध कराए हैं। जाहिर है यह क्षेत्र हिन्दू बहुल है। ऐसे में सरकार इस इलाके को तरजीह नहीं दे रही। राहत-बचाव के लिए जो पैसे दिए गए हैं वे सही ढंग से खर्च हो रहे अथवा नहीं, इस पर निगरानी रखने के लिए मुख्यमंत्री मुराद अली शाह ने एक पांच सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। सरकार को पता है कि इस प्रांत में हिंदुओं की जनसंख्या सर्वाधिक है और आर्थिक तौर पर उनकी स्थिति अच्छी नहीं है। बावजूद इसके कमेटी में किसी हिंदू को नहीं रखा गया। सिंध सरकार सामाजिक संगठनों की मदद से राशन बंटवा रही है, लेकिन बांटने वाले खुलकर हिंदू-मुस्मिल में भेद कर रहे हैं। राशन की लाइनोें में खड़े हिंदुओं को भगा दिया जा रहा है और उन्हें राशन नहीं दिया जा रहा है। इन हिन्दुओं से खुले तौर पर कहा जा रहा है कि यह राशन उनके लिए नहीं मुसलमानों के लिए है।
हिन्दुओं को किया जा रहा प्रताड़ित
सामाजिक कार्यकर्ता डॉक्टर अहमद अयूब मिर्जा कहते हैं कि यह भेदभाव पहले कराची, लियारी और सचल घाट में शुरू हुआ। लेकिन अब तो पूरे सिंध प्रांत में यह सब खुलकर हो रहा है। राशन वितरण पर प्रदेश सरकार के आदेश के अनुसार जिला प्रशासन को नजर रखना है। लेकिन इस बारे में शिकायत मिलने पर भी प्रशासन आंखें मूंदे है और कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहा है।
दरअसल पाकिस्तान में इस तरह की पहली शिकायत कराची के रेहर्री घोट इलाके से आई थी। इस दौरान करीब तीन हजार लोग राशन लेने के लिए लाइन में खड़े थे। मगर में वहां खड़े हिदुओं को छांट-छांटकर यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि यह तुम्हारे लिए नहीं है।
उल्लेखनीय है कि सिंघ के हैदराबाद, कराची को छोड़ बाकी प्रांत में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है। थारपारकर जैसे रेगिस्तानी इलाकों में तो पीने का स्वच्छ पानी भी लोगों को नसीब नहीं। स्वास्थ्य सुविधाओं का घोर अभाव है। ऐसे में आम दिनों तक में भी इस क्षेत्र के लोग भूख से दम तोड़ते रहते हैं। उपर से हिंदुओं के खिलाफ अंदरखाने चल रहे इस तरह के षड़यंत्र इलाके से हिन्दुओं को मिटाने की साजिश कही कहें जा सकते है।
अमानवीयता और कन्वर्जन का गढ़ है सिंध
 
सिंध में हिन्दुओं के साथ खुल्लम-खुल्ला अमानवीयता की जाती है। नाबालिक हिन्दू लड़कियों का अपहरण करके उन्हें जबरन इस्लाम में कन्वर्ट किया जाता है। यहां के हिन्दू लड़कों को भारत का जासूस बताकर स्थानीय खुफिया एजेंसी इंटर सर्विस इंटेलीजेंस और पाकिस्तान सेना के लोग उठाकर कहां गायब कर देते हैं, पता तक नहीं चलता। इलाके में कन्वर्जन के लिए कुख्यात कटृटरपंथी मिट्ठू मियां जैसे लोग हिंदू लड़कियों के कन्वर्जन और उनके अपहरण में खुलेआम लगे रहते हैं लेकिन स्थानीय प्रशासन उन पर कार्यवाई करने के बजाए उल्टे उनकी मदद करता है।
नारकीय जीवन जी रहे हिन्दू
अमेरिका में रहने वाली प्रो. शास्वती सरकार ने हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की 74 पेज की रिपोर्ट के आधार पर कहा है कि देश बटवारे के बाद पाकिस्तान में हिंदुओं के लिए कभी माहौल अनुकूल नहीं रहा। आज भी यहां से लोग भारत सहित अन्य देशों को पलायन कर रहे हैं। पाकिस्तान से भागकर विदेश जा बसे गुलाई इस्माइल कहते हैं कि इस देश में अल्पसंख्यक होना अभिशाप है। अब पाकिस्तानियों को कोराना के बहाने हिंदुओं को निपटाने का मौका मिल गया है। जमायम इस्लामी कराची के अध्यक्ष हाफिज नईमुर्रहमान का कहना है कि सिंध में लॉकडाउन के बाद सरकार पूरी तरह फेल हो चुकी है। जो सेंटर यहां राहत के लिए कार्य कर भी रहे हैं वे हिंदुओं को कोई सहायता नहीं कर रहे। यहां सिर्फ मुसलमानों की मदद की जा रही है। हद तो तब हो रही है कि पाकिस्तान के कई ऐसे अस्पताल हैं जो जकात, फितरा के पैसे से चलते हैं, पर यहां सिर्फ मुसलमानों को दवाइयां दी जा रही हैं। हिंदुओं का प्रवेश यहां बिल्कुल नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता डा. अहमद अयूब मिर्जा इस महामारी में हिंदुओं के साथ होने वाले भेदभाव से बेहद विचलित हैं। वे कहते हैं कि इस्लाम शिक्षा देता है कि खाने से पहले पता कर लें कि पड़ोसी भूखा तो नहीं है। पड़ोसी को लेकर इस्लाम में मुसलमान और गैर मुसलमान की बात नहीं की गई है। मगर पाकिस्तानी हिंदुओं के विरूद्ध षड़यंत्र करने में इस्लामी शिक्षा को भी बिसरा दिया गया है। मिर्जा ने हिंदुओं को बचाने के लिए ट्वीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से तुरंत हस्तक्षेप कर राजस्थान के रास्ते सिंध के हिंदुओं तक खाद्य-पानी पहुंचाने की अपील की है। वह दुखी भाव से कहते हैं कि बगैर बाहरी मदद के पाकिस्तानी हिंदुओं को कोराना और भुखमरी से बचाना कठिन है।
( लेखक पाकिस्तान मामलों के जानकार एवं वरिष्ठ पत्रकार हैं )