कोरोना रोकने के उपायों को पलीता लगाते तबलीगी जमात के मुल्ला-मौलवी
   दिनांक 01-अप्रैल-2020
ले. कर्नल (सेनि.) आदित्य प्रताप सिंह
कोरोना और तबलीगी जमात का कनेक्शन बहुत कुछ बता रहा है। यकीनन भारत में अराजकता और अव्यवस्था का वातावरण बनाकर कोरोना रोकने के उपायों को पलीता लगाया जा रहा है तो वहीं राजनीतिक अस्थिरता का माहौल बनाने के लिए एक वर्ग देश की सीमाओं से बाहर काम पर लगा हुआ है। ऐसे में देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता है

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देश कोरोना महामारी से जूझ रहा है। लेकिन मुस्लिम समुदाय इससे बेपरवाह होकर देश की राजधानी के केंद्र निजामुद्दीन में तबलीगी जमात की सभा का आयोजन करता है। इस इस्लामिक सभा में देश-विदेश से हजारों मुसलमान शामिल होते हैं। विदेशी जमातियों में आने वाले अधिकांश उन्ही देशों से हैं जहां कोरोना महामारी का प्रकोप बहुत अधिक हुआ है, जैसे चीन, ईरान, इंडोनेशिया, मलेशिया, सऊदी अरब, इंग्लैंड और अनेक अन्य मध्य एवं पश्चिम एशियाई देश। इनमें संक्रमित व्यक्तियों की संख्या अधिक हो सकती थी और वही हो रहा है। जांच के बाद इसके साक्ष्य भी आने लग गए हैं। एक अनुमान के अनुसार इस आयोजन में 2000 से अधिक लोग सम्मिलित हुए थे, जिसमें 300 लोगों को बुखार, खांसी, सांस लेने की समस्या और सर्दी-जुकाम होने की पुष्टि हो चुकी है। चिंता की बात यह है कि इनमें 250 से अधिक की संख्या विदेशी मजहबी प्रचारकों की थी, जो लाॅक डाउन और सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ा रहे थे।
कोरोना और तबलीगी जमात का कनेक्शन
पूर्वी एशिया के देशों में भी कोरोना महामारी फैलने का मुख्य कारण तबलीगी जमात की “इज्तिमा एशिया” को ही जाता है। दिल्ली में भी निजामुद्दीन इज्तिमा के 24 लोगों में कोरोना वायरस होने की पुष्टि हो चुकी है। कोरोना से यहां कितने लोग संक्रमित हुए होंगे इसका अनुमान लगा पाना बहुत ही कठिन है। इज्तिमा में भाग लेने वालों में से 7 की हैदराबाद और 1 की श्रीनगर में संक्रमण से मृत्यु हो चुकी है। इससे स्थिति की गंभीरता को समझा जा सकता है, क्योंकि यहां से आयोजन समाप्त होने के बाद जमाती देश के विभिन्न राज्यों में जा चुके हैं। यह भी देखा जा रहा कि मुस्लिम समुदाय का एक बहुत बड़ा वर्ग इस बंदी को मानने से इंकार करता चला आ रहा था और तरह-तरह की अनर्गल बातें करके मुस्लिम समाज को भ्रमित कर रहा था। इनके द्वारा सार्वजनिक स्थलों पर एकत्रित होने की अपील की जा रही थी, मस्जिदों में नमाज पढ़ने के लिए मुसलमानों से जुटने के लिए कहा जा रहा था और सरकार और प्रशासन की बातों को दरकिनार के करने की नफरत बोई जा रही थी। मुस्लिम बहुल क्षेत्रों की मस्जिदों से लेकर बाजार तक सामान्य रूप से बंदी के बाद भी चलते रहे और कहीं-कहीं अभी भी चोरी-छिपे सरकार के आदेशों का उल्लंघन किया जा रहा है। यही सब कारण थे जिसके चलते कोरोना से संक्रमित मुस्लिम समाज के बड़े भाग में महामारी को फैलाने में सफल हो जाते हैं।
दिल्ली बनता अराजक गतिविधियों का केंद्र
दिल्ली एक के बाद एक अराजक गतिविधियों का केंद्र क्यूं बनता जा रहा है ? यह विषय निश्चित ही चिंताजनक है। शाहीन बाग जैसे असामाजिक और असंवैधानिक हुड़दंग के बाद दिल्ली में हिन्दू विरोधी जिहादी दंगें जिसमें अनेक निर्दोष लोग मारे गए, उसके बाद सरकार के बंद के आदेश के बाद भी दिल्ली में एक ऐसा विषाक्त और अफवाहों का वातावरण तैयार किया गया कि दिल्ली में बाहरी राज्यों से आए श्रमिकों को रातों-रात दिल्ली से भागने को विवश होना पड़ा। उनके इस पलायन को सफल बनाने के लिए और उन्हे दिल्ली की सीमा के बाहर तक छोड़ने के लिए दिल्ली परिवहन निगम की बसें तक रातों-रात उपलब्ध कराई गईं। और अंततः निजामुद्दीन पश्चिम में तबलीगी इज्तिमा की अनुमति प्रदान की गई, जबकि बड़े और छोटे सभी आयोजनों पर प्रतिबंध बहुत लंबे समय से चल रहा था। यह कोई साधारण घटनाएं न होकर अपितु एक सुनियोजित और संगठित षड़यंत्र है, जिसके संचालक पर्दे के पीछे और देश की सीमाओं से बाहर बैठे हैं। आज चीन वैश्विक अर्थव्यवस्था को नष्ट कर अपनी एक वैश्विक व्यवस्था का प्रारूप तैयार करने में लगा है, जिसके लिए उसने छदृम युद्ध का सहारा लिया है। सामाजिक और राजनीतिक उथल-पुथल के साथ कोरोना जैसा नियंत्रित जैविक युद्ध इसका महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारत में चीन के इस काम के लिए पाकिस्तान का समृद्ध तंत्र अत्यंत उपयोगी है। आज यही हो रहा है। भारत में अराजकता और अव्यवस्था का वातावरण बनाकर कोरोना को रोकने के उपायों को पलीता लगाया जा रहा है और उसके साथ ही राजनीतिक अस्थिरता का दौर लाने का प्रयास हो रहा है। देश की सुरक्षा और खुफिया एजेंसियों को सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता है।