पूर्वोत्तर में जनहित को लेकर सरकार के साथ साथ राहत कार्यों में जुटे स्वयंसेवक
   दिनांक 01-अप्रैल-2020
 असम से डॉ. संजीब गोस्वामी
यकीनन उत्तर पूर्व देश की राजधानी से दूर है। देश में लाॅकडाउन है। ऐसे में केन्द्र और राज्य सरकार की संवेदनशीलता ही है कि इतना दूर होने के बावजूद सभी सात राज्यों में दवाओं सहित अन्य आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति पहले की तरह है। स्थानीय लोगों को कोई दिक्कत न होने पाए, इसके लिए सरकार द्वारा सभी कड़े कदम गए हैं। वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक भी दिन रात एक कर सुदूर क्षेत्रों में मदद पहुंचाने में जुटे हुए हैं

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संघ स्वयंसेवकों ने संभाला मोर्चा
विपदा की स्थिति में संघ के स्वयंसेवक जनता कर्फ्यू के दिन से ही स्थानीय स्तर पर जागरूकता अभियान में लग गए थे। लोगों को सेनेटाइजर और मास्क आदि के वितरण के साथ ही सामाजिक दूरी कैसे बनाई रखी जाए, उसके लिए स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लोगों को जागरूक कर रहे थे। इस दौरान सब कुछ बंद होने से यकीनन रोजमर्रा काम करने वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया था। ऐसे में स्वयंसेवकों ने मोर्चा संभाला और जरूरतमंदों तक भोजन, दवाई और अन्य आवश्यक वस्तुओं का वितरण किया।
सूदूर क्षेत्रों में सक्रिय हैं कार्यकर्ता
राज्य के सभी जिलों में संघ के स्वयंसेवक अलग-अलग इलाकों में सेवा कार्यों में लगे हुए हैं। इस दौरान वह स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लोगों तक हर संभव मदद पहुंचा रहे हैं। गुवाहाटी जैसे शहरी केंद्रों तक में प्रतिदिन काम करने वाले मजदूर और गरीब वर्ग को अस्थायी आश्रय और भोजन प्रदान किया जा रहा है।
पिछले साल दिसंबर के अंत में चीन के वुहान प्रांत से कोरोना वायरस फैलना शुरू हुआ। लेकिन इस दौरान दुनिया का ध्यान इस खतरे की ओर ज्यादा नहीं गया। धीरे-धीरे यह खतरा बढ़ने लगा। अधिकांश यूरोपीय देश और विकसित देश इसकी चपेट में आने लगे। यूएसए, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया ने तब तक इस संबंध में कोई सक्रिय कदम नहीं उठाया। जिसका परिणाम हुआ कि वायरस यूरोप के अधिकांश देशों में तीव्र गति से फैलता चला गया। जैसे ही इसकी भयावहता स्पष्ट हुई, भारत ने चीनी वायरस के फैलाव को रोकने के लिए तत्काल कड़े कदम उठाने शुरू कर दिए। हालांकि सामाजिक दूरी के लिए अपील मार्च से शुरू हुई और बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 22 मार्च को जनता क‌र्फ्यू के लिए भारत के नागरिकों से अपील की, जिसकी विश्व स्वास्थ्य संगठन तक ने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। हालात को देखते हुए बाद में 21 दिनों के लाॅक डाउन की घोषण भी प्रधानमंत्री द्वारा की गई। इसके बाद समूचे देश के साथ ही उत्तर पूर्व में भी इस तालाबंदी का सकारात्मक असर दिखाई दे रहा है। खासकर असम के लोगों ने प्रधानमंत्री के निवेदन को बड़ी ही गंभीरता से लिया और अब पूरी तरह से लाॅकडाउन का पालन उनके द्वारा किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने न केवल इस वायरस की भयावहता को समझते हुए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया बल्कि इस दौरान रोजमर्रा काम करने वालों को कोई परेशानी न हो, इसके लिए सेवाभावी कार्यकर्ता और सामाजिक संगठनों ने सामने आकर लोगों के दुख-दर्द दूर करके लिए प्रयास करने शुरू कर दिए।
केंद्र-राज्य सरकार ने उठाए हैं कड़े कदम

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कोरोना की स्थिति के संबंध में बैठक लेते सर्बानंद सोनोवाल
कोरोना से निपटने के दौरान उत्तर पूर्व के लोगों को किसी भी तरह की कोई दिक्कत न होने पाए इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार ने कड़े कदम उठाए हैं। खाद्य भंडार की पूरी उपलब्धता जहां सुनिश्चित की गई है वहीं असम में कोरोना से निपटने के लिए लगभग 2500 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों की व्यवस्था की गई है। असम के मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल यह सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय हैं कि राज्य के सभी जिलों को इस बंदी के कारण किसी भी तरह की कोई दिक्कत न होने पाए। इस दौरान आमजन जीवन वैसा ही चलता रहे, जैसा पूर्व के दिनों में चलता आया है। तो वहीं स्वास्थ्य मंत्री हेमंत बिस्वा शर्मा ने चिकित्सा संबंधी कोई दिक्कत न होने पाए इसके लिए बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई अतिरिक्त कदम उठाए हैं।
हालात हैं काबू में
पूर्वोत्तर भारत में पूर्ण लॉकडाउन के केंद्र के फैसले को स्थानीय स्तर पर हर तरह का समर्थन मिला। इसी का परिणाम है कि देश के कुछ राज्यों में जिस तरह से वायरस ने पैर फैलाए हुए हैं, उससे पूर्वोत्तर बचा हुआ है। आंकड़ों की मानें तो इस इलाके में अभी केवल दो ही मामले प्रकाश में आए हैं। पहला मामला, मणिपुर और दूसरा मिजोरम से था। इस दौरान चार सौ से अधिक लोगों के परीक्षण किए गए थे, जो नकारात्मक रहे। जिन दोनों लोगों के कोरोना पाॅजिटिव होने की पुष्टि हुई वे विदेश से लौटकर आए थे।
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