सामाजिक सुधारों के खिलाफ है इस्लाम: बाबासाहेब

    दिनांक 11-अप्रैल-2020
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डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती (14 अप्रैल) के अवसर तक रोजाना उनके जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास किया जाएगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग नौ :-

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डॉ. आंबेडकर ने लिखा है, ''भारत के मुसलमानों के बीच सामाजिक सुधार के लिए कोई ऐसा उपयुक्त संगठित आंदोलन नहीं है जो उनकी विसंगतियों को दूर करने का ठोस मानक बन सके। 1930 में जब केन्द्रीय असेंबली में बाल विवाह कानून लाया गया तो मुसलमानों ने इसका विरोध किया। इसमें विवाह के लिए लड़की की आयु बढ़ाकर 14 वर्ष और लड़के की 18 वर्ष करने का विचार था। उन्होंने विरोध में यह तर्क दिया कि यह हमारे शरीयत कानून के खिलाफ है। न केवल उन्होंने इस कानून का हर स्तर पर विरोध किया, बल्कि जब यह कानूनी रूप से लागू हो गया तो उन्होंने इस अधिनियम के खिलाफ अवज्ञा आन्दोलन अभियान शुरू कर दिया।'' वे लिखते हैं, ''पाकिस्तान बनने पर जब बंटवारा हुआ तो मैंने महसूस किया कि अब भगवान ने भारत को अभिशाप से मुक्त कर दिया है और भारत अब महान व् समृद्ध होगा।''
( डॉ. बाबा साहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज, वॉल्यूम-1, पृष्ठ 146 )