सुदूर जंगलों में साधनारत साधु-संतों को भेजी राशन सामग्री

    दिनांक 12-अप्रैल-2020
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चित्रकूट के सुदूर जंगलों में साधनारत साधु-संतों एवं गांव-देहात में बसे रोजमर्रा काम करने वाले परिवारों को विपदा की घड़ी में भोजन से लेकर अन्य किसी चीज का अभाव न होने पाए इसके लिए दीनदयाल शोध संस्थान के कार्यकर्ता उन तक हर संभव मदद पहुंचाने में लगे हुए हैं

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कोरोना महामारी को लेकर पूरे देश में लॉकडाउन है। लॉकडाउन में सबसे ज्यादा परेशानी रोजाना काम करने वाले परिवारों को हो रही है। ऐसे में इन सभी परिवारों को कोई दिक्कत न होने पाए, चित्रकूट क्षेत्र की सामाजिक संस्थाएं, व्यापारी वर्ग, सामाजिक कार्यकर्ता तथा विभिन्न मंदिरों के माध्यम से गरीबों के लिए रोजाना भोजन सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट द्वारा 15 किलोमीटर दूर जंगल में टाटी घाट पर साधनारत साधु-संतों को राशन सामग्री की 50 किट तैयार करके वितरित की गई, जो जंगल में ही दूर-दूर अपनी कुटिया बनाकर भगवान की उपासना में लीन है। राशन सामग्री की प्रत्येक किट में 10 किलो आटा, 5 किलो आलू, 3 किलो दाल, एक पैकेट नमक, एक बोतल सरसों का तेल, मसालों के साथ उपवास के लिए 1 किलो गुड़, 1 किलो मूंगफली दाना तथा पूजा हेतु अगरबत्ती माचिस भी रखी गई है। दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन हर दिन सियाराम कुटीर परिवार की टीम के साथ चित्रकूट के जंगल में सती अनुसुईया आश्रम, टाटी घाट, स्फटिक शिला के साथ पूरे परिक्रमा मार्ग में पहुंचकर बंदरों एवं निराश्रितों को भोजन उपलब्ध करा रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि इस क्षेत्र में वह साधु-संत भी निवास कर रहे हैं जो किसी से कुछ मांगते नहीं हैं। ऐसे में उन सभी साधनारत संन्यासियों की आवश्यकताओं को जानते हुए उनकी पूर्ति में डीआरआई के कार्यकर्ता लगे हुए हैं।