देश को कोरोना के साथ कांग्रेसी-जिहादी सोच के वायरस से भी खतरा है

    दिनांक 12-अप्रैल-2020
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कोरोना एक वायरस है. आज नहीं तो कल हम इस पर काबू पा लेंगे. शोध चल रहे हैं, इसकी वैक्सीन भी बन जाएगी. लेकिन देश में एक और वायरस है... कांग्रेस की राष्ट्रविरोधी सोच का वायरस. कपिल सिब्बल का आइसोलेशन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर करार देने वाला बयान भी इसी ओर इशारा करता है

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यह वायरस देश को बीमार और बहुत बीमार बनाने की कोशिश करता रहा है. जितना जरूरी कोरोना वायरस से लड़ना है, उतना ही जरूरी इस सोच से भी. क्योंकि आज जब देश सीना ताने कोरोना वायरस से लड़ रहा है, कांग्रेस देश की पीठ में छुरा घोप रही है. कभी कांग्रेस के नेता लॉक डाउन पर सवाल उठाते हैं और कभी टाइमिंग पर. और अब तो हद हो गई. तब्लीगी जमात के रूप में फिदायीन कोरोना जिहाद सामने आने के बाद से कांग्रेस के पेट में बहुत दर्द है.
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस का विमान अपहरण करके कंधार ले जाया गया था. तब सर्वदलीय बैठक में कांग्रेस की तत्कालीन अध्यक्ष सोनिया गांधी ने अपहृत नागरिकों को छुड़ाने के लिए आतंकवादियों को रिहा करने के फैसले का समर्थन किया था. लेकिन कांग्रेस के समर्थन में भी चाल होती है. पहले सरकार के साथ आतंकवादियों की रिहाई के फैसले मे साथ दिया, फिर इसी को मुद्दा बना लिया. कांग्रेस हर राष्ट्रीय सुरक्षा, स्वाभिमान और अस्मिता के फैसलों पर राजनीति करती है. फिलहाल देश कोविड-19 नामक चीनी वायरस से लड़ रहा है, कांग्रेस के नेता कपिल सिब्बल बीमारी को फैलने से रोकने के लिए बनाए गए आइसोलेशन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर बता रहे हैं. जब से तब्लीगी जमात के रूप में वायरस का फिदायीन हमला सामने आया है, तब से कांग्रेस के सुर बदल गए हैं. देश के कोने-कोने से जमाती आइसोलेशन सेंटर्स में जबरदस्ती लाए जा रहे हैं, तो कांग्रेस को बीमारी फैलने से रोकने का ये इंतजाम डिटेंशन सेंटर नजर आने लगा है. कांग्रेस को नजर आ सकता है. ये तो बस एक बानगी है. कांग्रेस हमेशा परीक्षा की घड़ी में देश विरोधी और समाज विरोधी ताकतों के साथ खड़ी रही है.
नागरिकता संशोधन कानूनः पड़ोसी देशों में जुल्म सहते अल्पसंख्यकों को नागरिकता देने वाले संशोधन कानून के पास होते ही कांग्रेस का हिंदू विरोधी चेहरा सामने आ गया. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने बाकायदा रैली बुलाकर मुसलमानों से घरों से निकलने की अपील की. नतीजा, कांग्रेस और जिहादी गठबंधन ने देशभर में हिंसा फैलाई. शाहीन बाग में सीएए के खिलाफ तीन महीने से ज्यादा समय तक चले धरने में कांग्रेस के नेता भाषण देने जाते थे. देश के अलग-अलग कोनों में कांग्रेस के नेता जुबानी या सार्वजनिक हिंसा फैलाते नजर आए. हिंदू विरोधी है कांग्रेस....
टुकड़े गैंग के साथ काग्रेसः अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के नाम पर कांग्रेस समर्थक बुद्धिजीवी और कलाकार गैंग ने 2014 से ही उत्पात मचाना शुरू कर दिया था. कभी शोर मचाते कि डर लग रहा है. कभी अवार्ड वापस करते. देश ने ध्यान नहीं दिया, तो कांग्रेस, नक्सली और जिहादियों का गठजोड़ देश के टुकड़े गैंग के रूप में उतर आया. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय से लेकर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी तक कांग्रेस के समर्थन और सौजन्य से भारत तेरे टुकड़े होंगे के नारे लगे.. जब ये नारे लगे, तो कांग्रेस के युवराज राहुल गांधी इन्हें समर्थन देने के लिए जेएनयू तक जा पहुंचे. देशद्रोहियों के साथ खड़ी है कांग्रेस....
पाकिस्तान के साथ कांग्रेसः जब भी राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रश्न आता है, कांग्रेस के सुर पाकिस्तान से मिल जाते हैं. देश ने हाल ही में देखा. जम्मू कश्मीर को अनुच्छेद 370 के अभिशाप से मुक्ति मिली. अखंड भारत का सपना जिस समय सच हो रहा था, उस समय कांग्रेस इस प्रयास का संसद में विरोध कर रही थी. उसके सांसद इसके खिलाफ वोट डाल रहे थे. भाषण दे रहे थे. कश्मीर का रोना लेकर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान जिस अंतरराष्ट्रीय मंच पर गए, राहुल गांधी और कांग्रेस के अन्य नेताओं का बयान दुनिया को सुनाना नहीं भूले. सिर्फ अनुच्छेद 370 क्यों. जब उड़ी में आतंकवादी हमला हुआ, तो पूरा देश शोक मना रहा था और कांग्रेस सवाल उछाल रही थी. जब भारत ने बालाकोट में पाकिस्तान को घुसकर मारा, तो हर भारतीय का सीना गर्व से चौड़ा था, लेकिन कांग्रेस इस पर भी सवाल उठा रही थी. भारत ने दो बार सर्जिकल स्ट्राइक की. देर-सबेर कांग्रेस के बयान पाकिस्तान के माफिक हो गए.
नक्सलियों के साथ कांग्रेसः छत्तीसगढ़ से लेकर झारखंड तक ये बात अब किसी से छिपी नहीं है कि कांग्रेस नक्सलियों की हमदर्द है. इस कदर कि चुनाव में नक्सलियों का समर्थन लेती है. भीमा कोरेगांव हिंसा में भी जिन नक्सलियों का हाथ रहा, उनका कांग्रेस से गहरा नाता है. इस सिलसिले मे प्रधानमंत्री की हत्या जैसी गंभीर साजिश में गिरफ्तार नक्सलियों का कांग्रेस से चोली दामन का साथ रहा है. यहां तक कि ये संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार को चलाने वाली सोनिया गांधी की खास कमेटी के सदस्य तक थे.
राम के खिलाफ कांग्रेस
मनमोहन सिंह की ही सरकार थी, जिसने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देकर ये कहा था कि राम एक काल्पनिक किरदार हैं. राम रावण युद्ध कभी हुआ ही नहीं. रामायण एक मनोरंजन के लिए लिखा गया महाकाव्य है. यही वह सरकार थी, जिसने जिहादियों और आतंकवादियों को बचाने के लिए भगवा आतंकवाद के रूप में हिंदुओं को बदनाम करने का शिगूफा गढ़ा. न सिर्फ शिगूफा गढ़ा, समझौता एक्सप्रेस पर हमला करने वाले पाकिस्तानी आतंकवादियों को छोड़ दिया. क्या यह भी संयोग ही है कि पाकिस्तान और कांग्रेस की सोच और कोशिशें भगवा आतंकवाद का फर्जी हौवा खड़ा करने की रही. दरअसल ये साबित हो चुका है कि पाकिस्तान 26-11 के मुंबई हमले को हिंदू आतंकवादियों द्वारा अंजाम दी गई घटना के रूप में पेश करना चाहता था. कांग्रेस के नेताओं ने तो अजमल कसाब के पकड़े जाने के बाद भी इसे हिंदू आतंकवाद की घटना साबित करने की कोशिश की.
आखिर आप कांग्रेस से उम्मीद क्या कर सकते हैं. जिस पार्टी ने आजादी के समय कश्मीर का एक बड़ा हिस्सा पाकिस्तान को सौंप दिया. आजादी के बाद प्लेट में सजाकर तिब्बत चीन को दे दिया गया. फिर हिंदी-चीनी भाई-भाई के नारे में मशगूल रहे और 1962 की जंग में करारी हार के बाद बड़े भारतीय भूभाग पर चीन ने कब्जा कर लिया. आप उनसे उम्मीद कर रहे हैं कि वे इस राष्ट्रीय संकट में देश के साथ खड़े होंगे. कांग्रेस कोरोना को लेकर कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा सरकार को भेजे गए सुझावों में नजर आता है. सोनिया गांधी का पहला ही सुझाव है कि अखबारों और चैनलों को दिए जाने वाले सरकारी विज्ञापनों पर रोक लगा दी जाए. कोई कांग्रेसी ही समझ सकता है कि विज्ञापन बंद करके कोरोना से कैसे लड़ा जाएगा. बहरहाल, तब्लीगी जमात ने कांग्रेस के कोरोना हमले को कुंद कर दिया है. क्योंकि अगर कांग्रेस कोरोना के प्रसार पर बोलती है, तो उसे जमातियों पर भी बोलना होगा. इस आपदा के दौरान राहुल गांधी समेत तमाम कांग्रेस नेताओं के बयानों में बद्दुआ की बू आती है. इनकी अपेक्षा के अनुरूप देश में कोरोना महामारी नहीं बना, ये केंद्र सरकार को घेर नहीं पाए. ऐसे में कांग्रेस नेताओं का मानसिक संतुलन ठीक रहेगा, इस पर संदेह है. कपिल सिब्बल का आइसोलेशन सेंटर्स को डिटेंशन सेंटर करार देने वाला बयान भी इसी ओर इशारा करता है.