अब सेकुलर लॉबी यूपी को लेकर झूठी खबरें फैलाने में जुटी

    दिनांक 13-अप्रैल-2020
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ऐसे समय में जब पूरा देश चीन के फैलाए वायरस से युद्ध लड़ रहा है, कुछ लोग देश में भ्रम की स्थिति पैदा करने में जुटे हैं। इसी प्रयास में एक समाचार फैलाया गया कि उत्तर प्रदेश के भदोही में एक महिला ने अपने 5 बच्चों को गंगा नदी में फेंक दिया। क्योंकि उनको खिलाने के लिए उसके पास कुछ नहीं था। यह दावा सूत्रों के हवाले से किया गया। मामले को लॉकडाउन से जोड़ा गया ताकि राजनीतिक रंग दिया जा सके। पैटर्न वही कि पहले किसी समाचार एजेंसी से इसे जारी कराया जाए और फिर वेबसाइट और सोशल मीडिया के माध्यम से इसे फैलाकर दुष्प्रचार शुरू किया जाए। समाचार एजेंसी आईएएनएस से इस झूठ ख़बर की उत्पत्ति हुई। आउटलुक मैगज़ीन ने बिना किसी जांच के इसे प्रकाशित किया और वहाँ से सोशल मीडिया पर फैलाने का काम शुरू हो गया। सुप्रीम कोर्ट के वकील और अफ़वाह फैलाने में माहिर प्रशांत भूषण समेत कई पत्रकार और नेताओं ने इस झूठ को फैलाने में सहायता की।
आश्चर्य की बात कि किसी भी स्थानीय समाचार पत्र में यह जानकारी इस रूप में नहीं छपी थी। उनके अनुसार यह पति-पत्नी के विवाद का मामला था। कुछ जगहों पर यह बात भी कही गई थी कि पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। जब सोशल मीडिया पर यह अफ़वाह फैलाने का काम शुरू हो गया तब भदोही पुलिस ने ट्विटर के माध्यम से इसका खंडन किया और वो तस्वीरें जारी कीं जिनमें देखा जा सकता था कि महिला ने बच्चों की हत्या से कुछ देर पहले ही घर पर खाना बनाया था और रोटियाँ पड़ी हुई थीं। पड़ोसियों और रिश्तेदारों ने भी किसी आर्थिक तंगी या भुखमरी की बात से इनकार किया।
यह बात शुरू से ही साफ़ थी कि इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना का लॉकडाउन से कोई लेना-देना नहीं। न ही किसी पास-पड़ोसी या जिला प्रशासन के किसी अधिकारी ने ही ऐसी कोई बात कही। इसके बावजूद अगर कुछ मीडिया संस्थानों ने इसे लॉकडाउन और भूख से मौत का मामला बना दिया तो समझना मुश्किल नहीं कि यह एक सोचा समझा काम था। हमारी जानकारी के अनुसार चैनलों और अख़बारों पर इस बात का दबाव है कि वो उत्तर प्रदेश को लेकर नकारात्मक समाचार फैलाएं, ताकि चाइनीज़ वायरस से लड़ने में उसकी सफलता को कलंकित किया जा सके। यह काम इसलिए भी ताकि इस मोर्चे पर महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब और दिल्ली की विफलता को ढंका जा सके।