ममता के राज में उड़ रहीं सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां

    दिनांक 13-अप्रैल-2020
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कोलकाता से डॉ अंबा शंकर बाजपेयी
पश्चिम बंगाल में सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। मुस्लिम बहुल कई इलाकों में मस्जिद और मदरसे खुले हुए हैं। तो वहीं कोलकाता शहर के अलावा अन्य इलाकों में मुख्य मार्ग तक तो लॉकडाउन देखने को मिलता है लेकिन जैसे ही आस-पास के इलाकों में प्रवेश करते हैं तो सब कुछ खुला हुआ है

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कोरोना महामारी के संक्रमण से बचने के लिए 22 मार्च से पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा भारत सरकार ने करते हुए संक्रमण की रोकथाम के लिए कई दिशा-निर्देश सभी राज्य सरकारों को जारी किए थे। शुरू में तो कोरोना संक्रमण के ज्यादातर मामले महाराष्ट्र, तमिलनाडु, तेलंगाना-आंध्र प्रदेश व राजस्थान से ही आए लेकिन जैसे ही समय व्यतीत हुआ और “निजामुद्दीन मरकज” के तब्लीगी जमातियों का मामला देश के सामने आया तो देश भर में कोरोना के मामलों में अभूतपूर्व वृद्धि हुई और सरकार को पूरी तरह से देश की सभी व्यवस्थाओं को बंद करना पड़ा।
भारत के प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में इस बात का जिक्र कई बार किया की संक्रमण से बचने का एकमात्र उपाय सोशल डिस्टेंसिंग ही है। उनके इस संदेश और दिशा निर्देश का लगभग सभी प्रदेश सरकारें आज तक कड़ाई से पालन करा रही हैं। अधिकतर जगह का प्रशासन बड़ी मुस्तैदी से इस कार्य को संपन्न कराने के लिए लगा हुआ है। लेकिन पश्चिम-बंगाल शासन व प्रशासन ने भारत सरकार द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों की जमकर धज्जियां उड़ाई। जबकि प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद मीडिया के सामने एक दुकान पर सोशल डिस्टेंसिंग बनाए रखने के लिए दूर-दूर गोला बनाकर संदेश देते दिखी थीं। 22 मार्च से लागू संपूर्ण लॉकडाउन के तहत आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति -खाद्य सामग्री, फल, सब्जियां, मेडिकल सेवाएं व बैंकिंग सेवाओं के अतिरिक्त सभी सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया गया था। लेकिन पश्चिम-बंगाल में ऐसे किसी भी दिशा-निर्देश का पालन नहीं किया। राज्य के कोलकाता शहर व अन्य शहरों की स्थिति यह है कि मुख्य मार्ग में तो लॉकडाउन देखने को मिलता है लेकिन जैसे ही इसके आस-पास के इलाकों में प्रवेश करते हैं तो दुकान, बाजार, प्रतिष्ठान खुलेआम चलते दिख रहे हैं।

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यह हाल पूरे कोलकाता शहर का है। इतना ही नहीं स्थानीय प्रशासन कोलकाता की फूल मंडी को खोले हुए है, जहां खूब भीड़ होती है। वहीं दूसरी तरफ कोलकाता के जेसोर रोड मुख्य मार्ग स्थित पातिपुकुर माछ-बाजार (मछली बाजार) जो कि पश्चिम बंगाल के सबसे बड़े मछली बाजारों में गिना जाता है, सुबह 5 से 11 बजे तक लगातार खुला रहता है। यहां जमकर सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाई जाती हैं। यहां एक साथ हजारों-हजार लोग जमे दिखाई देते हैं। मुख्य मार्ग से मिलने वाले प्रत्येक रास्तों या गलियों में मांस की दुकानें व अन्य सभी तरह के व्यापारिक प्रतिष्ठान खुले हुए हैं।
इसके अलावा राज्य सरकार ने सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ाने में एक और कदम आगे जाते हुए कोलकाता महानगर में मिठाइयों की दुकानों को भी खोलने का फरमान जारी कर दिया। यहां भी खूब भीड़ जुटती है।
मस्जिद और मदरसे हैं खुले हुए
ममता सरकार के मुस्लिम प्रेम के चलते कोलकाता, हावड़ा, 24 दक्षिण व उत्तर परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद व मालदा स्थित मस्जिद व मदरसे लॉकडाउन के समय भी खुले हुए हैं। गत 11 अप्रैल को जब केंद्र सरकार ने राज्यों को कड़े दिशा निर्देश दिए तो ममता सरकार ने लाज बचाने के लिए मस्जिद व मदरसों में बाहर से ताला तो लगवा दिया लेकिन अन्दर मजहबी गतिविधियां आज भी वैसे ही जारी हैं। ऐसे में तालाबंदी का फिर कोई मतलब नहीं रह जाता है। तो दूसरी तरफ तुष्टीकरण का कार्ड खेलते हुए ममता सरकार कोरोना संक्रमित लोगों का विवरण जारी नहीं कर रही है। वह स्पष्ट तौर पर यह नहीं बता रही कि इसमें कितने लोगों की मौत हुई है। इसके पीछे साफ है कि वह बताना नहीं चाहती कि इसमें किस मजहब से जुड़े लोग शामिल हैं। हालांकि पश्चिम बंगाल डॉक्टर्स फोरम ने सरकार से आंकड़े छिपाने को लेकर नाराजगी जाहिर की है। ऐसे में एक बात साफ है कि जैसे तब्लीगियों ने पूरे देश को संकट में डाला है वैसे ही बंगाल भी इससे अछूता नहीं है। पिछले दिनों कोलकाता सहित राज्य के दूसरे हिस्सों की मस्जिदों से पकड़े गए मुस्लिम इसके उदाहरण हैं।
बहरहाल, वैश्विक महामारी कोरोना की रोकथाम के लिए भारत के अन्य राज्य केंद्र सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य कर रहे हैं तब पश्चिम बंगाल सरकार असंवेदनशीलता का व्यवहार करते हुए गैर जिम्मेदाराना रवैया अख्तियार किए हुए है। यकीनन उसके इस रवैये से भारत की सुरक्षा पर भी बड़ा प्रश्न चिन्ह लगता है।