कोरोना : पाकिस्तान के खिलाफ उठ खड़ा हुआ तथाकथित “आज़ाद कश्मीर”

    दिनांक 14-अप्रैल-2020   
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लूटपाट, मक्कारी, जिल्लत और बर्बाद जिन्दगी से पीओजेके के लोग तंग आ चुके हैं. अब पाकिस्तान यहां कोरोना बांटने निकला है. जन आक्रोश सुलग रहा है.

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पीओजेके में पाकिस्तान के खिलाफ लोग सड़कों पर।
 “हमारा शहर क्वारंटाइन सेंटर नहीं है. पाकिस्तानियों को वापस लो..” पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले मीरपुर (पीओजेके) में लोग सड़कों पर ये नारे लगा रहे हैं. कोरोना संक्रमण को लेकर सारे गिलगित-बाल्टिस्तान और (पाकिस्तानी) कश्मीर में प्रदर्शन हो रहे हैं. इस पूरे इलाके को 70 बरसों से पाकिस्तान ने अपनी शिकारगाह बना रखा है. अपने गैरकानूनी कब्जे को वो “आज़ाद कश्मीर” कहता है. इस तथाकथित आज़ाद कश्मीर का हाल ये है कि पूरे इलाके में कुल 3 वेंटिलेटर हैं. ऐसे में यहां कोरोनासंक्रमण फ़ैल गया तो हालात क्या होंगे, ये सोचकर यहाँ के लोग खौफ में हैं. इसलिए जब यहाँ के रेस्टहाउसों और खाली पड़े भवनों में पाकिस्तान के रईस पंजाबियों (पंजाबी मुस्लिमों का) का कोरोना टूरिज़्म शुरू हो गया तो लोगों का गुस्सा भड़क उठा. प्रदर्शन में शामिल लोग यहाँ लाये जा रहे पाकिस्तानी संक्रमितों की सूचियाँ और उन जगहों के नाम लेकर आए थे जहाँ उन्हें लाकर रखा जा रहा है. इन लोगों की आँखों में धूल झोंकना आसान नहीं है, क्योंकि यहाँ विरली आबादी है. लोग एक दूसरे को जानते हैं. इसलिए अजनबी तुरंत पहचान लिए जाते हैं.
कोरोना के नाम पर इमरान ने दुनिया के सामने अपना कटोरा एक बार फिर आगे बढ़ा दिया है. लेकिन दुनिया से जो “इमदाद” (मदद) कोरोना से लड़ने के लिए आ रही है, उसमें से एक फूटी कौड़ी भी गिलगित-बाल्टिस्तान को नहीं दी जा रही है. इन लोगों को याद है कि जब इस इलाके में भयंकर भूकंप आया था तो किस तरह पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान में भूकंप के नाम पर दुनिया भर से पैसा बटोरा था, और उसे यहाँ खर्च न करके भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा दिया गया था. इसलिए यहाँ लोग चाहते हैं कि वो कोरोना से बचे रहें, क्योंकि यदि एक बार बीमारी फैलने लगी तो इनका कोई रखवाला नहीं है. लेकिन यहाँ भी धीरे-धीरे कोरोना के मरीज़ बढ़ रहे हैं और ये सारा संक्रमण पाकिस्तानी लेकर आ रहे हैं. ऊपर से उन्हें ये जंग खुद के भरोसे ही लड़नी है. पाकिस्तान कुछ नहीं करने वाला है, ये सब लोग जानते हैं . गिलगित बाल्टिस्तान के सूचना प्रसारण मंत्री ने भी बयान दिया है कि “इमदाद में से हमें हिस्सा नहीं मिल रहा है..” इसलिए सामान्य आदमी सड़कों पर है. पुँछरावलकोट तथा मुजफ्फराबाद में भी पाकिस्तान विरोधी प्रदर्शन हुए हैं.
“शह रग” में बहता गटर का पानी 
देश स्वतंत्र होने के तुरंत बाद पाकिस्तान ने यहाँ हमला करके हिंसा लूटपाट और बलात्कार का कहर बरपाया. नेहरु के हठ और अदूरदर्शिता के कारण पाकिस्तान को ये बेशकीमती हिस्सा थाल में सजा हुआ मिल गया. तबसे (1948 से) उसने यहाँ कब्जा जमा रखा है लेकिन पाकिस्तान का संविधान इसे पाकिस्तान का राज्य नहीं बतलाता, क्योंकि पाकिस्तान की नज़र भारत की तरफ के कश्मीर पर भी है. वो दुनिया के सामने ये दिखाता है कि कश्मीर स्वतंत्र देश है, जिस पर भारत ने कब्जा कर रखा है, और पीओजेके में उसकी फौज सिर्फ “हिफाजत” के लिए है. पाकिस्तान के संविधान में पाकिस्तान और पीओजेके के रिश्ता अघोषित और अपरिभाषित है, क्योंकि पाकिस्तान को “आज़ाद कश्मीर” के अलग वज़ूद का ढोंग करना है. दूसरी तरफ पाकिस्तान पिछले 70 सालों से इस इलाके की बेरहम लूट-खसोट कर रहा है. यहाँ की खदानों में से बहुमूल्य रत्न निकलते हैं. बेशकीमती धातुएं मिलती है. ये सब पाकिस्तान खोदकर ले जाता है. इसका कोई हिस्सा या राजस्व पीओजेके को नहीं मिलता.
यहाँ के प्रधानमंत्री का यहाँ की खदानों, यहाँ के बांधों आदि पर कोई अधिकार नहीं है. यहाँ की जमीन से जो निकलता है उसका कोई टैक्स इस “वजीर ए आज़म” के हिस्से नहीं आता .
 
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कोरोना से लड़ने के लिए संसाधनों की लड़ाई : चिकित्सकों का प्रदर्शन
झेलम पर बने विशाल मंगला बाँध से आने वाला राजस्व ही इनके लिए काफी हो सकता था, पर फूटी कौड़ी नहीं मिलती. कोई शहरी विकास नहीं. सड़क नहीं, नाली नहीं. पाकिस्तानी जनरल और नेता कहते हैं कि कश्मीर हमारी शह रग ( गर्दन से होकर सर को जाने वाली धमनी) है, लेकिन इस “शह रग” में पहाडों पर से गटर का पानी रिस रहा है. पहाड़ खोखले और कमजोर हो रहे हैं. हल्का भूचाल भी भारी तबाही मचा सकता है. कोई सड़क नहीं, कोई विकास नहीं है. यहां का हर पढ़ालिखा युवक अपना घरबार छोड़कर जाने को मजबूर है. वो पाकिस्तान से ही बाहर जाना चाहता है. 18 साल का होते ही वो पासपोर्ट बनवाता है. जो जा सकता है वो चला जाता है. जो नहीं जा पाता तो लाहौर या कराची के होटलों-ढाबों में बर्तन मांजता है. पंजाब के होटल, बेकरी इनसे भरे पड़े हैं. जो यहाँ से बाहर निकल पाए उनमें से ज्यादातर अरब देशों में गुलामों जैसी जिन्दगी बिता रहे हैं. अरबों के घरों –दुकानों-कारखानों में जिल्लत भरी नौकरी कर रहे हैं.
मक्कारी का चैंपियन पाकिस्तान 
पाकिस्तान पीओजेके को लूटते रहने के लिए नए-नए स्वांग रचता आया है. कभी कश्मीर कॉउंसिल बनाकर, कभी मिनिस्ट्री ऑफ कश्मीर बनाकर. संसाधनों की नोच-खसोट जारी है. यहाँ के संसाधनों पर पूरा हक़ तो पाकिस्तान का है लेकिन जब देने की बारी आती है तो कह दिया जाता है कि “आप तो हमारा सूबा नहीं हैं, आप खुदमुख्तार (आत्मनिर्भर) हैं. आपको अपनी ज़रूरतें खुद पूरी करनी हैं.” इसलिए यहाँ के प्रतिनिधि उन बैठकों में भी नहीं बुलाए जाते जिनमें पाकिस्तान के राज्यों के बीच संसाधनों के बंटवारे के फैसले होते हैं. वैसे भी पाकिस्तान की कुल आय का बड़ा हिस्सा फौज खा जाती है. बचे हुए में से 70 प्रतिशत पंजाब को चला जाता है. तो पीओजेके को देना कुछ नहीं है और यदि कभी देना है तो खैरात के रूप में. अब खैरात तो खैरात ठहरी. खैरात का कोई नियम नहीं होता. खैरात देते समय कोई सर्वेक्षण नहीं होता, आबादी का अनुपात भी नहीं देखा जाता. वोट की ताकत भी इन लोगों के पास नहीं.
पाकिस्तान के एस्टैब्लिशमेंट का ये दोगलापन यहीं ख़त्म नहीं होता. पाकिस्तान पीओजेके को आत्मनिर्भर मुल्क कहता है, लेकिन 1974 में उसने यहाँ के मूलनिवासी प्रमाणपत्र (डोमेसाइल) को खत्म कर दिया. अब कहने को वो “खुदमुख्तार” भी है और उनका अपना मूलनिवासी कागज़ भी नहीं है. 1948 में संयुक्त राष्ट्र संघ में पाक ने कहा था कि पीओजेके बिल्कुल स्वतंत्र है. उनकी अपनी सेना, अपना रक्षा विभाग होगा, लेकिन वास्तव में ये लोग पाकिस्तानियों के गुलाम बनाकर रह गए. 50 सालों तक तो इन लोगों को तो स्थानीय सरकार के लिए भी वोट का अधिकार नहीं था. बेनज़ीर भुट्टो के समय स्थानीय चुनाव शुरू हुए, लेकिन यहाँ का चुना हुआ “प्रधानमंत्री” यहाँ के फैसले लेने का हक ही नहीं रखता.
पाकिस्तान की संसद में यहाँ के लोग मनोनीत किए जाते हैं जो पाक फौज के चुने हुए पिट्ठू होते हैं. स्थानीय असेंबली चुनाव लड़ने के पहले पाकिस्तान के प्रति वफादारी की शपथ लेनी होते है, इस तरह जनप्रतिनिधि तकनीकी रूप से पाकिस्तान का हिस्सा न होते हुए भी पाकिस्तान के देशद्रोह कानून के दायरे में आ जाते हैं. कुलमिलाकर षड्यंत्र इस तरह किया गया है कि कोई प्रामाणिक व्यक्ति तंत्र के अंदर घुस ही नहीं सकता. पाकिस्तान का उर्दू मीडिया यहाँ के सच कभी नहीं दिखाता. वो पाकी पिट्ठुओं को कवरेज देते हैं. वो प्रायोजित सर्वेक्षण करके बतलाते हैं कि पीओजेके के 99 फीसदी लोग पाकिस्तान के साथ हैं, जबकि अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं के सर्वेक्षण खुलासा करते हैं कि 95 प्रतिशत लोग पाकिस्तान से अलग होना चाहते हैं. ये बातें पहले दबी-छिपे रहती थीं लेकिन अब सोशल मीडिया के कारण सच बाहर आ रहा है. वास्तव में जब पाकिस्तानी कहते हैं कि “कश्मीर हमारा है” तो इसका मतलब होता है कि “वहाँ की दौलत हमारी है.”
इस लूटपाट, इस मक्कारी, इस जिल्लत और इस बर्बाद जिन्दगी से यहाँ के लोग तंग आ चुके हैं. ऐसे में कोरोना के बढ़ते खतरे को देख उनका गुस्सा फूट पड़ा है.