कोरोना महामारी: जयपुर में क्यों नहीं काम कर रहा भीलवाड़ा मॉडल ?

    दिनांक 14-अप्रैल-2020   
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राजस्थान की राजधानी का रामगंज बना हॉटस्पॉट, 350 से ज्यादा चीनी वायरस के पॉजिटिव केस, महाकर्फ्यू के बावजूद रामगंज के लोग पहुंच रहे दूसरे क्षेत्रों में

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चीनी वायरस (कोरोना) से जंग में भीलवाड़ा मॉडल को लेकर दुनिया भर में अपनी पीठ थपथपा रही राजस्थान सरकार आखिर जयपुर के रामगंज इलाके में क्यों फेल साबित हो रही है? क्यों रामगंज में भीलवाड़ा मॉडल लागू नहीं हो पा रहा है? मुस्लिम बाहुल्य रामगंज में चीनी वायरस के पॉजिटिव केसों की संख्या 350 के पार जा पहुंची है। शायद ही कोई दिन जाता है, जब रामगंज से पॉजिटिव केस न आ रहे हों। रामगंज के केसों के कारण जयपुर में पॉजिटिव केसों की संख्या 441 तक पहुंच गई है, जबकि भीलवाड़ा में यह 28 पर रुक गई है।
पहले भीलवाड़ा मॉडल को समझ लेते हैं। सबसे पहले 19 मार्च को भीलवाड़ा के बांगड़ अस्पताल में तीन डॉक्टर और तीन चिकित्साकर्मी पॉजिटिव पाए गए थे। माना गया था कि सऊदी अरब से आए मेहमानों के कारण अस्पताल के डॉ. नियाज को सबसे पहले संक्रमण हुआ था। तब ये खबर आई थी कि एक सप्ताह में 6000 लोग अस्पताल आए थे और भीलवाड़ा चीनी वायरस का हॉटस्पॉट बना गया था। 22 मार्च को देश में जनता कर्फ्यू से पहले ही 20 मार्च को भीलवाड़ा जिले की सीमाएं सील कर महाकर्फ्यू लागू कर दिया गया था। करीब 4 लाख आबादी के शहर भीलवाड़ा में घर-घर जाकर स्क्रिनिंग की गई थी। सख्ती से महाकर्फ्यू लागू करने से यहां स्थिति जल्द काबू में आ गई। पॉजिटिव केसों की संख्या रुक गई। भीलवाड़ा में स्थिति संभलने के पीछे बहुत बड़ी भूमिका कलेक्टर राजेंद्र भट्ट की रही है। विडंबना यह है कि भीलवाड़ा का श्रेय कांग्रेस पार्टी ने अपने पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी तक को दे दिया है।
अब जरा जयपुर के रामगंज की स्थिति का आवलोकन कर लेते हैं। भीलवाड़ा में महाकर्फ्यू लगने के छह दिन बाद रामगंज में ओमान से लौटा मोहम्मद मुबारक पॉजिटिव पाया गया। मोहम्मद मुबारक के बाद तो जैसे रामगंज में केस मिलने की झड़ी सी लग गई। राज्य सरकार भीलवाड़ा मॉडल पर अपना गुणगान करती रही और रामगंज हॉटस्पॉट बन गया। जयपुर के पुराने शहर को सरकार ने सील कर महाकर्फ्यू लगा दिया। लेकिन, स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ है। महाकर्फ्यू की सख्ती का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सील होने के बावजूद रामगंज के लोग शहर के दूसरे इलाकों में पहुंच रहे हैं। रविवार को रामगंज के तीन युवक घर से 20 किलोमीटर दूर मुहाना सब्जी मंडी तक पहुंच गए, जिन्हें लेकर वहां हंगामा हुआ और पुलिस बुलानी पड़ गई। रामगंज के पॉजिटिव पाए गए 72 वर्षीय एक बुजुर्ग शहर की सीमा ही पार कर गए। पॉजिटिव मिली दो युवतियां दूसरे इलाके में जा पहुंचीं। ऐसे कई और मामले हैं।
रामगंज में भीलवाड़ा जैसी सख्ती न होने के पीछे तुष्टीकरण की राजनीति बताई जा रही है। जयपुर की किशनपोल विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक अमीन कागजी का आशीर्वाद रामगंज के लोगों को मिल रहा है। रामगंज में पुलिस और चिकित्साकर्मियों का विरोध हो चुका है। रामगंज में तब्लीगी जमात के लोग भी मिले थे। पुलिस-प्रशासन दावे तो बहुत कर रहा है, लेकिन जो स्थिति है, उसे कहीं से सुखद नहीं कहा जा सकता है। तुष्टीकरण की राजनीति पर विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने सवाल खड़े किए हैं। जयपुर की सांगानेर विधानसभा सीट से भाजपा विधायक अशोक लाहोटी ने तो मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में रामगंज के लोगों को शहर के कोरोना से मुक्त इलाकों में क्वारंटाइन करने का मुद्दा उठाया। उन्होंने तो सरकार पर लापरवाही का आरोप लगा, यहां तक कहा कि यही स्थिति रही तो जयपुर भी इटली या न्यूयॉर्क बन सकता है। विधायक अशोक लाहोटी ने एक वीडियो जारी कर रामगंज के क्वारंटाइन किए लोगों को 720 रुपए प्रति प्लेट का भोजन मुहैया करने पर ही सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि राशन वितरण को लेकर राज्य सरकार भेदभाव कर रही है। गरीबों तक भोजन नहीं पहुंच रहा है। कांग्रेस विधायक समुदाय विशेष और अपने क्षेत्र में ही राशन वितरित करा रहे हैं।
रामगंज की बिगड़ती स्थिति के बावजूद राज्य के चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा भीलवाड़ा मॉडल की माला ही जप रहे हैं। उन्हें एक ट्वीट किया है कि भीलवाड़ा जिले में कोरोना के संक्रमण को रोकने में राजस्थान सरकार ने सफलता प्राप्त की है। प्रशासन और चिकित्साकर्मियों की दिन-रात मेहनत का ही परिणाम है कि भीलवाड़ा में अब तक 28 पॉजिटिव केस हैं, जिनमें से ज्यादातर व्यक्ति नेगेटिव हो चुके हैं और कोई नया मामला सामने नहीं आया है। आश्चर्य है कि मंत्री महोदय ने भीलवाड़ा पर तो मीडिया को इंटरव्यू दे रहे हैं, हर मंच पर अपनी प्रशंसा कर रहे हैं, लेकिन रामगंज का जिक्र कहीं नहीं है। सवाल यह है कि राज्य सरकार की रामगंज में चूक का खामियाजा राज्य की जनता को न उठाना पड़ जाए।