पाकिस्तान- कोरोनाकाल में कट्टरपंथी इस्लामिक संस्थाएं हिन्दुओं को कन्वर्ट करने के लिए बना रही दबाव

    दिनांक 14-अप्रैल-2020
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ले. कर्नल (सेनि.) आदित्य प्रताप सिंह
कोरोनाकाल में पाकिस्तान की कट्टरपंथी इस्लामिक संस्थाएं हिन्दुओं को इस्लाम में कन्वर्ट करने के प्रयास में लगी हुई हैं। उनकी गिद्ध दृष्टि इसी अवसर की तलाश में है कि कब वे अधिक से अधिक हिन्दुओं को कन्वर्ट कर सकें। इसलिए उन्हें राशन न देने से लेकर प्रताड़ित करने के हर हथकंडे अपनाए जा रहे हैं

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कोरोना महामारी से पूरा विश्व व्यथित है। लेकिन पाकिस्तान है कि अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा। इन दिनों पाकिस्तान में गरीब-बेसहारा हिन्दुओं को राहत सामग्री नहीं दी जा रही है। उन्हें राशन देते समय उनके सामने शर्त रखी जा रही है कि वे इस्लाम में कन्वर्ट हो जाएं। सूत्रों की मानें तो इस दौरान उन्हें डराया, धमकाया और उनके साथ हिंसा तक की घटनाएं की जा रही हैं। सिंध से लेकर पंजाब तक महामारी के इस आपदाकाल में निर्धन और दलित हिन्दू सर्वाधिक इस्लामिक हिंसा का शिकार बने हुए हैं। सिंध के राजनीतिक कार्यकर्ता अमजद अयूब मिर्जा हिंदुओं के साथ राशन वितरण में किए जा रहे मजहबी भेदभाव से अत्यंत पीड़ित हैं। उन्होंने पिछले दिनों प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संयुक्त राष्ट्र संघ से इस विषय में हस्तक्षेप करने की मांग की थी। उन्होंने यहां तक कहा था कि सिंध में रह रहे हिंदुओं के लिए भारत सरकार राजस्थान के रास्ते भोजन सामग्री भेजने की व्यवस्था करे। यूनाइटेड स्टेट्स कमीशन ऑन इंटरनेशनल रिलीजियस फ्रीडम की आयुक्त अनुरिमा भार्गव ने मीडिया को बताया कि पाकिस्तान सरकार से लेकर वहां सायलानी वेल्फेयर इंटरनेशनल ट्रस्ट जैसे गैर सरकारी संस्थान भी गैर मुसलमानों को खाद्य सामग्री देने से साफ मना कर रहे हैं।
यह सब घटनाएं बताने के लिए काफी हैं कि पाकिस्तान में गैर मुसलमानों की स्थिति दिनों-दिन कैसे बद से बदतर होती जा रही। ऐसे में कोरोना के समय भुखमरी उन्हें मजहब परिवर्तन पर बाध्य कर सकती है। पाकिस्तान की कटृटरपंथी इस्लामिक संस्थाएं उसी काम में लगी हुई हैं। उनकी गिद्ध दृष्टि इसी अवसर की तलाश में है कि कब वे अधिक से अधिक हिन्दुओं को कन्वर्ट कर सकें। क्योंकि इस्लाम का राजनीतिक सशक्तीकरण करना ही इन सभी कटृटरपंथी संगठनों का दीर्घगामी लक्ष्य है।
नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं हिन्दू
पाकिस्तान के हिन्दू इस्लामिक आतंकियों से लेकर मुल्लों के निशाने पर हैं। पाकिस्तान में जहां हर दिन हिन्दुओं को सताया जा रहा है तो वहीं उनकी कला, संस्कृति, उपासना और सभ्यता का लोप लगभग किया जा चुका है। पिछले दिनों इन्हीं हिंदुओं को भारत की नागरिकता देने का विरोध भारतीय मुस्लिम समुदाय, और देश के वामपंथियों ने किया था। आज ये सभी लोग कहां है जब कोरोना जैसी विपदा में भी पाकिस्तान में हिन्दुओं का दमन किया जा रहा है, उन्हें राशन देने के बदले इस्लाम में कन्वर्ट होने की शर्त रखी जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि सीएए की आड़ लेकर जो देश जलाने पर आमादा थे उन सभी को पाकिस्तान में हिन्दुओं के साथ होता उत्पीड़न और जुल्म क्यों नहीं दिखता ? क्या सिर्फ रोहिंग्या और बांग्लादेशी घुसपैठियों की पीड़ा ही उन्हें दिखाई देती है ?