सावधान: कोरोना की आड़ में बढ़ रहे हैं साइबर हमले

    दिनांक 15-अप्रैल-2020   
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कोविड-19 के कारण दुनिया आपात स्थिति से गुजर रही है। अधिकांश कंपनियां ऑनलाइन काम कर रही हैं, डिजिटल लेन-देन भी बढ़े हैं। लेकिन इसके बीच साइबर हमले भी बढ़े हैं। साइबर ठग नए-नए हथकंडे अपना कर लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं

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कोविड-19 की वैश्विक महामारी के चलते भारत सहित दुनिया के अधिकांश देश लॉकडाउन में हैं। ऐसे में ज्‍यादातर कंपनियां अपने कर्मचारियों से घर से काम करा रही हैं और अन्‍य लोग भी घर से ऑनलाइन काम कर रहे हैं। इस वजह से इंटरनेट का उपयोग और डिजिटल व ऑनलाइन लेन-देन बढ़ा है, लेकिन इसी के साथ साइबर हमले का खतरा भी बढ़ा है। कोरोना संकट की आड़ में साइबर हमले की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। हैकर्स सरकारी संस्थानों, अस्पतालों से लेकर कंपनियों तक को निशाना बना रहे हैं और उनके डेटा में सेंधमारी कर रहे हैं।
देश में चाइनीज वायरस का संक्रमण फैला तो करोड़ों लोगों की स्वास्थ्य और आर्थिक सुरक्षा के लिए गंभीर चुनौतियां उत्पन्न हो गईं। इसके लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नागरिक सहायता एवं आपात स्थिति राहत कोष बनाने की घोषणा की थी। जानलेवा वायरस के विरुद्ध सरकार की लड़ाई में देश का कोई भी नागरिक इस कोष में आर्थिक योगदान दे सकता है। लेकिन साइबर अ‍पराधियों ने इसे भी लोगों के ठगने का एक जरिया बना लिया। साइबर ठगों ने प्रधानमंत्री राहत कोष की एक फर्जी यूपीआई आईडी बनाकर लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश की। इस फर्जी आईडी के जरिए लोगों से कोरोना महामारी से निपटने के लिए ऑनलाइन लेन-देन के लिए प्रेरित किया जा रहा था। बाद में पता चला कि यह फर्जी अकाउंट है। इसके बाद इसे तत्‍काल ब्‍लॉक किया गया। दरअसल, प्रधानमंत्री राहत कोष की असली आईडी पीएम केयर्स है। लेकिन साइबर ठगों ने इस आईडी में मामूली फेरबदल करके पीएम केयर@एसबीआई नाम से एक फर्जी आईडी बना दी। बाद में देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई और नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने इसके खिलाफ पुलिस में शिकायत की और तत्‍काल इस फर्जी आईडी को बंद कराया। दिल्ली पुलिस की साइबर शाखा ने इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की है।
महाराष्‍ट्र में साइबर गिरोह काम पर
इसी तरह महाराष्‍ट्र में भी साइबर गिरोह लोगों को ठगने में जुटा है। महाराष्‍ट्र की साइबर अपराध शाखा के अनुसार, ठग लोगों के मोबाइल और ईमेल पर कोरोना से बचाव के तरीके बताने वाला एक लिंक भेज रहे हैं। इस लिंक पर क्लिक करते ही लोगों के बैंक खातों से जुड़ी जानकारी साइबर ठगों तक पहुंच जाती है। इस तरह कोरोना वायरस के नाम पर साइबर ठग न केवल लोगों के व्यक्तिगत डाटा, बल्कि बैंक अकाउंट तक को साफ कर दे रहे हैं। इसलिए कोरोना वायरस से जुड़ी कोई जानकारी, इससे बचाव संबंधी कोई भी मेल, संदेश आए तो सतर्कता बरतें। ऐसे मामले लगातार बढ़ रहे हैं, इसलिए महाराष्‍ट्र साइबर शाखा ने लोगों को इस बाबत सचेत किया है।
दरअसल, भारत ही नहीं पूरी दुनिया में साइबर सुरक्षा के समक्ष खतरे बढ़ रहे हैं। इसका एक बड़ा कारण यह है कि साइबर सेंधमारी करने वाले तत्वों की पहचान तो मुश्किल है ही, उन तक पहुंच भी मुश्किल है। इंटरनेट वायरस या हैकिंग के जरिये सेंधमारी वह अपराध है जिसमें आमतौर पर अपराधी घटनास्थल से दूर होता है। कई बार तो वह किसी दूसरे देश में होता है और ज्यादातर मामलों में उसकी पहचान उजागर होती ही नहीं। यह ठीक है कि भारत में साइबर सुरक्षा के प्रति सजगता बढ़ी है, लेकिन उसे पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। साइबर सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त बनाने के लिए जैसे तंत्र का निर्माण अब तक हो जाना चाहिए था, वह नहीं हो सका है। साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए कई संस्थाएं बनाई गई हैं, लेकिन उनके बीच अपेक्षित तालमेल का अभाव अभी भी दिखता है।
अभी कुछ समय पहले अमेरिकी स्वास्थ्य और मानव सेवा विभाग पर साइबर हमले की खबर आई थी। 'ब्लूमबर्ग' की रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स ने कोरोना वायरस से जुड़ी अफवाह फैलाने के मकसद से हैकिंग की थी। हैकिंग की खबर मिलते ही अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद फौरन हरकत में आई और मामले को संभालते हुए एक ट्वीट कर स्पष्टीकरण दिया। अमेरिकी अधिकारियों ने पाया कि स्वास्थ्य विभाग के सर्वर में घुसपैठ हुई है और कोरोनो वायरस के बारे में झूठी सूचना प्रसारित हो रही है। इसके बाद टीम ने इसे रोकने की कोशिश की। मीडिया खबरों के अनुसार, कहा तो यह भी गया कि विभाग के सिस्टम को धीमा करने के लिए इस हैकिंग को अंजाम दिया गया था।
भारत में पिछले तीन महीने के दौरान 10,000 से ज्यादा साइबर हमले किए जा चुके हैं। वहीं, ऑस्ट्रेलिया में 6,000 और इंडोनेशिया में करीब 5,000 साइबर हमले के प्रयास हुए। चेक रिपब्लिक में तो कोरोना जांच की सबसे बड़ी प्रयोगशाला को ही निशाना बनाते हुए साइबर हमला किया गया है। झांसा देने के लिए हैकर्स बैंक, एनजीओ या विश्व स्वास्थ्य संगठन के नाम पर मेल भेजते हैं ताकि कोई शक न हो। इसके अलावा ऐसी भाषा का भी प्रयोग करते हैं कि लोग डर के या फिर उत्सुकतावश मेल में भेजे गए लिंक को क्लिक करें। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इंटरनेट उपयोगकर्ता जब कोरोना वायरस से जुड़ा कोई भी संदेश क्लिक करता है तो वायरस मोबाइल में 'डाउनलोड' हो जाता है, जिसके ज़रिए मोबाइल में मौजूद डाटा तक हैकरों की पहुंच हो जाती है। इसके बाद हैकर बैंक खाता, डिजिटल मनी से जुड़े अकाउंट में आसानी से सेंध लगा सकता है।
साइबर ठगी से ऐसे बचें
कोरोना वायरस को घातक बता कर साइबर ठग फर्जी वेब पेज, ईमेल, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और फोन पर संदेश भेज कर लोगों को अपने झांसे में ले रहे हैं और फिर उनके बैंक खाते तक अपनी पहुंच बना रहे हैं। कुछ मामलों में इलाज के नाम पर चंदा मांगकर ठगी को अंजाम दिया जाता है। इसके अलावा ठग खुद को स्‍वास्‍थ्‍य विभाग का कर्मचारी बताकर लोगों से निजी ब्‍योरा हासिल कर रहे हैं। फिलहाल साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संदिग्ध वेब पेज व ईमेल न तो खोलें और न ही इनका उत्‍तर दें। ऑनलाइन कोई भी काम करते हुए अपने ईमेल, सोशल मीडिया अकाउंट और बैंक खातों के लिए कठिन पासवर्ड से सुरक्षित करें। इससे हैकर्स को आपके खाते तक पहुंचने में दिक्कत होगी। साथ ही, कंप्‍यूटर या लैपटॉप और एंटी वायरस को अपडेट करते रहें। इसके अलावा अपने परिवार के लोगों खासकर बच्चों को साइबर अपराध से बचाव के बारे में बताएं। किसी भी संस्था को ऑनलाइन चंदा देने से पूर्व उसकी अच्छी तरह पड़ताल कर लें। किसी से भी अपने बैंक, सोशल मीडिया अकाउंट या ईमेल या अन्य किसी अकाउंट की जानकारी साझा न करें। सावधान रह कर ही इस तरह की ठगी को रोका जा सकता है।
(लेखक मेवाड़ यूनिवर्सिटी में निदेशक हैं)