कांग्रेस सिर्फ मुसलमानों के प्रति सजग रहती है: बाबासाहेब

    दिनांक 15-अप्रैल-2020
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हम लगातार आपको बाबासाहेब के जीवन से जुड़े कुछ अनछुए प्रसंगों को बताने का प्रयास कर रहे हैं। आगे भी यह प्रयास जारी रहेगा। ये प्रसंग “डॉ. बाबासाहब आंबेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज”, “पाकिस्तान ऑर पार्टीशन ऑफ इंडिया”, “द सेलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ डॉ. बी. आर. आंबेडकर”, “द डिक्लाइन एंड फॉल ऑफ़ बुद्धिज़्म” आदि पुस्तकों से लिए गए हैं. बाबासाहेब को जानें भाग तेरह :-

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डॉ. आंबेडकर कहते हैं, ''आज अनुसूचित जाति की स्थिति क्या है? जहां तक मैंने देखा है वैसी ही है जैसी पहले थी। वही उत्पीड़न, वही पुराने अत्याचार, वही पुराना भेदभाव, जो पहले दिखाई पड़ता था। सब कुछ वही, बल्कि और बदतर हालात वाली स्थिति। मेरे पास दिल्ली व आसपास के क्षेत्रों से सैकड़ों मामले आते थे जिनमें समाज की पीड़ा होती थी। जहां उच्च जातियों के उत्पीड़न के खिलाफ पुलिस भी मामले दर्ज नहीं करती थी। तब लगता था कि अनुसूचित जाति के लोगों की पीड़ा सुनने के लिए क्या दुनिया में कोई समानांतर तंत्र बनाना पड़ेगा, जो मुझे कहीं नहीं दिखाई पड़ता था। अभी तक भी अनुसूचित जातियों को कोई राहत क्यों नहीं दी गई है? बल्कि यदि तुलना करें तो इनसे ज्यादा मुसलमानों के प्रति सरकार संवेदना दिखा रही है। प्रधानमंत्री का सारा समय और ध्यान मुसलमानों के संरक्षण के लिए समर्पित है। मुझे कोई दिक्कत नहीं है, प्रधानमंत्री से भी नहीं। मैं तो केवल यह चाहता हूं कि भारत के मुसलमानों को जब सुरक्षा की जरूरत पड़े तो उन्हें सुरक्षा दी जाए। मैं यह जानना चाहता हूं कि क्या मुसलमान अकेले हैं जिन्हें ही केवल सुरक्षा की जरूरत है। क्या अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और भारतीय ईसाइयों को सुरक्षा की जरूरत नहीं है। नेहरू जी ने इन समुदायों के लिए क्या चिंता दिखाई है? जहां तक मुझे मालूम पड़ता है कुछ भी नहीं,जबकि असली बात यह है कि ये वे समुदाय हैं जिन पर मुसलमानों से भी ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है।''