कोरोना संकट: मदद के लिए आगे आए मंदिर

    दिनांक 15-अप्रैल-2020
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कुंवर पुष्पेंद्र प्रताप सिंह साथ में पाञ्चजन्य ब्यूरो
महामारी के इस संकट में देश के मंदिर, मठ और आश्रम जन सामान्य की सेवा में लगे हैं। देश के प्राय: सभी बड़े मंदिरों ने महामारी से लड़ने के लिए सरकारी कोष में दान देकर अनुकरणीय कार्य किया है

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नवगठित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महामंत्री श्री चंपत राय (बाएं से दूसरे) फैजाबाद के जिलाधिकारी को सहायता राशि का चेक सौंपते हुए
सहायता और सेवा ही सनातन संस्कृति है। इस संस्कृति को आगे बढ़ाने का काम सनातन धर्म मंदिर बहुत ही कुशलता और लगन के साथ कर रहे हैं। संकट की इस घड़ी में कुछ मंदिर तो जरूरतमंदों के लिए प्रतिदिन खाना वितरित कर रहे हैं, तो कुछ वायरस पीड़ितों के लिए अस्पताल की व्यवस्था में लगे हैं।
गोरखपुर के प्रसिद्ध गोरखनाथ मंदिर में प्रतिदिन आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए रसोई चल रही है। यहां भंडारे के साथ-साथ आम लोगों में बांटने के लिए भोजन की थैलियां तैयार होती हैं। यह मंदिर वायरस पीड़ितों के इलाज के लिए गोरखपुर एवं बलरामपुर के तुलसीपुर में अस्पताल का संचालन भी कर रहा है। गोरखपुर के गोरखनाथ अस्पताल में 10 शैया का वेंटिलेटर-युक्त आईसीयू भी है। गोरखनाथ पीठ और उससे संबंधित कुछ संस्थाओं और महाराणा प्रताप शिक्षा परिषद् ने ‘पीएम केयर फंड’ एवं ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में अब तक 51,00000 रु. का योगदान भी दिया है। वहीं काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास, वाराणसी द्वारा ‘पीएम केयर फंड’ में 11,00000 रु. और ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में भी इतनी ही राशि दी गई है। इसके साथ ही यहां प्रतिदिन भोजन के 1,500 पैकेट तैयार होते हैं।
महाराष्ट के साईं संस्थान द्वारा ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में 51 करोड़ रु. का दान दिया गया है। स्वामिनारायण संस्थान ने 1.88 करोड़ रु. का योगदान दिया है। गुजरात के सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट ने मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रु. का दान किया है।
माता वैष्णो देवी मंदिर के सभी कर्मचारी एक दिन और अधिकारी दो दिन का वेतन इस महामारी से लड़ने के लिए दे रहे हैं। इसके अलावा माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड ने अपने आशीर्वाद काम्प्लेक्स को वायरस संक्रमितों के इलाज के लिए सौंप दिया है। बोर्ड जरूरतमंदों को प्रतिदिन भोजन भी करा रहा है। उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने 2,50,000 रु. का दान किया है। बिलासपुर (छत्तीसगढ़) के मां महामाया मंदिर ट्रस्ट ने ‘मुख्यमंत्री राहत कोष’ में 5,00011 रु. और रेड क्रॉस सोसाइटी को 1,00011 रु. का दान दिया है। श्री नित्य चिंताहरण गणपति ट्रस्ट, रतलाम ने 1,00011 रु. का दान किया है। राधा स्वामी सत्संग सोसाइटी द्वारा ‘पीएम केयर फंड’ में दो करोड़ और पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली के मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रु. और ‘जम्मू-कश्मीर लेफ्टिनेंट गवर्नर रिलीफ फंड’ में एक करोड़ रु. का योगदान दिया है। महालक्ष्मी मंदिर, कोल्हापुर ने दो करोड़ रु. का दान दिया है।
नवगठित ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ने भी इस महामारी से लड़ने में सरकार का सहयोग करते हुए 11,00000 रु. का दान दिया है। पटना के प्रसिद्ध महावीर मंदिर ने बिहार के मुख्यमंत्री राहत कोष में एक करोड़ रु. का योगदान दिया है। महावीर मंदिर, पटना के संचालक और पूर्व आईपीएस अधिकारी किशोर कुणाल का कहना है कि सनातन धर्म मंदिर इस महामारी को समाप्त करने में हर तरह की मदद देने को तैयार हैं।