लाशों पर राजनीति करने से बाज नहीं आ रहा पाकिस्तान

    दिनांक 15-अप्रैल-2020   
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कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को भेदने के लिए अमेरिका, जर्मनी, इजरायल जैसे सुपर पॉवर देशों को भारत से सहयोग लेने में कोई झिझक नहीं। मगर पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक तंगी तथा कोरोना के कारण दिन प्रतिदिन बिगड़ते हालात के बावजूद उसकी हेकड़ी है कि जाती नहीं

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कोरोना वायरस के बढ़ते खतरे को भेदने के लिए अमेरिका, जर्मनी, इजरायल जैसे सुपर पॉवर देशों को भारत से सहयोग लेने में कोई झिझक नहीं। मगर पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक तंगी तथा कोरोना के कारण दिन प्रतिदिन बिगड़ते हालात के बावजूद हेकड़ी है कि जाती नहीं। इस विकट समय में भारत ने उसकी ओर जब, जब मदद का हाथ बढ़ाया गया तो यहां भी उसकी हेकड़ी ही दिखी। अब वह भारत पर धौंस जमाने की योजना बना रहा है। इसके लिए उसने भारत और दोस्त मुल्क अफगानिस्तान को अलग रखकर कोरोना को लेकर सार्क देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों की वीडियो कान्फ्रेंस करने का खाका तैयार किया है।
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने इस बारे में श्रीलंका, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान और मालद्वीप से बात भी कर ली है। वीडियो कान्फ्रेंस किस तारीख को कितने बजे होगी, अभी यह तय नहीं है। पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का कहना है कि इस बारे में प्रस्ताव तैयार कर एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) के महासचिव ऐसाला रूबान को भेज दिया गया है।
उल्लेखनीय है कि बुधवार को कोविड-19 से लड़ने के लिए भारत ने सार्क के ट्रेड ऑफिशियल्स के साथ वीडियो सम्मेलन किया था, जिसमें पाकिस्तान को छोड़कर बाकी सभी देश शामिल हुए थे। इस बारे में पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय की दलील थी कि सम्मेलन में सार्क के सारे सचिवालय शामिल नहीं हुए थे। सार्क महासचिव ने भी सम्मेलन की पुष्टि नहीं की थी, इसलिए पाकिस्तान ने इसमें शामिल होना जरूरी नहीं समझा। भारत की पहल पर आयोजित यह वीडियो सम्मेलन दरअसल, कुछ दिनों पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कोविड-19 से लड़ने के लिए आपात कोष बनाने को लेकर सार्क देशों के वीडियो काॅफ्रेंसिंग का हिस्सा था। वीडियो काॅफ्रेंसिंग में सभी देशों ने एक सुर में आपात कोष में योगदान देने का वादा किया। साथ ही सुझाव दिया कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए कोष सार्क महासचिव के नियंत्रण में होना चाहिए। चूंकि पाकिस्तान सम्मेलन में शामिल नहीं हुआ था, इसलिए यह पता नहीं चल सका कि वह कोष में योगदान देगा अथवा नहीं।
इस समय वैसे भी पाकिस्तान का हर स्तर पर दिवाला पिटा हुआ है। और रही सही कसर कोरोना वायरस ने पूरी कर दी है। 19 करोड़ की आबादी वाले देश पाकिस्तान में इस समय पांच हजार से ज्यादा कोरोना पीड़ित हैं और 70 से अधिक मौतें हो चुकी हैं। गरीबों को राहत सामग्री नहीं मिल रही और निम्न और उच्च वर्ग का महंगाई व कालाबाजारी से दम फूला हुआ है। यदि कोरोना से लड़ने को इसके आका चीन ने 125 टन मेडिकल किट नहीं भेजी होती तो महामारी अब तक कितनों को लील चुकी होती, कहना मुश्किल है। एडीबी ने 35 करोड़ और विश्व बैंक ने 18 करोड़ 80 लाख डॉलर कोरोना से लड़ने के लिए पाकिस्तान को देने का वादा किया है। इस वक्त इस देश की पूरी व्यवस्था कर्ज पर टिकी है। इसके बावजूद भारत जैसे हर मामले में मजबूत देश को हेकड़ी दिखाने से बाज नहीं आता। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोविड-19 को लेकर सार्क देशों की वीडियो काॅफ्रेंसिंग की थी, इसमें पाकिस्तान का नुमाइंदा बनकर शामिल हुए प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक डॉक्टर जफर मिर्जा ने कोरोना के खतरे की जगह कश्मीर अलाप शुरू कर दिया था। अब भारत को अलग रखकर वह सार्क देशों के स्वास्थ्य मंत्रियों का वीडियो सम्मेलन करने जा रहा है उसके पीछे रणनीति है। पाकिस्तान के एक अखबार का कहना है कि भारत की कूटनीति के कारण 2016 में पाकिस्तान में आयोजित होने वाले सार्क के 19 वें सम्मेलन को स्थगित करा दिया था। पाकिस्तान अब उसका बदला ले रहा है, जबकि यह समय इसके लिए उचित नहीं है। अभी सभी देश मिलकर कोरोना जैसे महामारी से पार पाने में लगे हैं।