जमात की जहालत से तमाम मुसलमान शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं

    दिनांक 16-अप्रैल-2020
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शीराज़ कुरैशी
आज पूरा भारत इन जमातियों के कहर से परेशान है। देश के तमाम मुसलमान खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं कि वह भी इन जमातियों के जाहिलपन से पूरे देश में बदनाम हो रहे हैं

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तब्लीगी जमात का असली चेहरा 1927 में दुनिया के सामने आया था, जब मेवात के मौलाना इलियास के दिमाग में आया कि हमें इस्लाम की मूल तालीमों को आम आदमी तक पहुचाना चाहिए, इसी मूल विचार के साथ कुछ युवकों के साथ मौलाना इलियास ने तब्लीगी जमात को स्थापित कर दिया। दौर गुजरते रहे ओर हमारे सामने आज की तब्लीगी जमात अपनी जहालियत के साथ खड़ी है, जिसको दुनिया के तहजीब और अमन से कोई लेना देना नही है। उनकी जहालत और कटृटरता से दुनिया के दूसरे मुसलमानों पर क्या प्रभाव पड़ रहा है, यह भी वह जानते नहीं हैं और अपनी धुन में ही अपने कंधो पर बोरे और बैग रखे इस्लाम के प्रचार के लिये निकल पड़ते हैं। जबकि उन जमातियों को यह खुद नहीं मालूम है कि इस्लाम की पहली शिक्षा ज्ञान की प्राप्ति करना है। यानी कि फरिश्ते जिबरील अलेसलाम ने पैगम्बर मोहम्मद को अल्लाह का पहला संदेश ही दिया था- ऐ मोहम्मद पढ़ो, ऐ मोहम्मद पढ़ो। जमात के ज्यादातर सदस्य बिना पढ़े-लिखे या नाम मात्र के पढ़े लिखे ही होते हैं, जो कि पहली बार में शोक में जमात में जाते हैं और इसके बाद कटृटर शिक्षाओें के प्रभाव में वह साधारण मुसलमान एक कटृटर इस्लामिक जमाती के रूप में खुद को तब्दील कर लेता है। इसको खुद इस्लाम की मुख्य शिक्षाओं का पाठ नहीं पढ़ाया जाता है और इस्लामिक दर्शन शास्त्र जिसे फिकहा कहा जाता है वह उन कटृटरता के लबादे में लिपटे जमाती को नहीं मालूम होता है। उसे तो बस इतना मालूम होता है कि मुझे अल्लाह को खुश करना है, चाहे दुनिया में कुछ भी हो जाए। ज्यादातर जमाती चूंकि अशिक्षित और पिछडे़ तबके से आते हैं। ऐसे में उनका रूझान शिक्षा और अन्य समाज के तौर तरीकों से नहीं होता है। जमात की कटृटरता वाली तालीम के चलते वह मूल इस्लामी तालीम से दूर होकर इस राह पर चल पड़ता है और जाहिल मुसलमान के रूप में समाज के सामने स्थापित हो जाता है। इसका गुमान तक उस जमाती को नहीं होता है क्योंकि वह खुद को अल्लाह के पास महसूस करता है। उसे ट्रेनिंग सत्र में उसकी जहालियत को ही उसका सच्चा ईमान बताकर स्थापित किया जाता है, यह सब एक गठजोड़ में चलता जाता है। नादान से लोग इसमें जुड़ते जाते हैं और जमात बड़ी से बड़ी होकर जाहिलता का एक विशाल रूप ले लेती है।
आज पूरा भारत इन जमातियों के कहर से परेशान है। और तमाम मुसलमान खुद को शर्मिंदा महसूस कर रहे हैं कि वह भी इन जमातियों के जाहिलपन से पूरे देश में बदनाम हो रहे हैं। खासकर जब कोरोना जैसा खतरनाक वायरस पूरी दुनिया को अपनी जद में लेने की जिद में है। तब जमात जैसे संगठन को पूर्व ही इस वायरस पर अध्ययन करके इससे खुद जमातियों को बचाने के और पूरी दुनिया को बचाने के उपाय सोच कर उसे लागू करवाने चाहिए थे। मगर इसके उलट जमात के मुखिया ने कोराना की फिक्र न लेते हुए जमातियों से मस्जिद में आने का आहवान किया जिसके परिणाम स्वरूप हजारों-लाखों जमाती पूरी दुनिया में इधर-उधर विचरण करने में लगे हुए हैं और पूरी दुनिया को अपनी जहालत की बदौलत खतरे में डाल दिया है।