आरोग्य सेतु एप को लेकर दुष्प्रचार में जुटी भारत तोड़ो ब्रिगेड

    दिनांक 16-अप्रैल-2020
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अमेरिका से सौप्तिक मुखर्जी
भारत के बाहर आरोग्य सेतु एप को गोपनीयता की आड़ लेकर बदनाम किया जा रहा है। विदेशी मीडिया में लंबे चैड़े लेख लिखे जा रहे हैं तो वहीं तथाकथित बौद्धिकों के निजी सोशल मीडिया समूहों में इसके विरोध में संदेश पोस्ट किए जा रहे हैं। इन समूहों में दुष्प्रचार करते हुए कहा जा रहा है कि इस एप के माध्यम से निजता को खतरा है और इसके माध्यम से नागरिकों की निगरानी की जा रही है

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भारत में कोरोना के मामले हर दिन बढ़ रहे हैं। ऐसे में केंद्र सरकार की ओर से आरोग्य सेतु ऐप जारी किया गया है। इस एप ने उपयोगकर्ता के करीब आने वाले लोगों को इलेक्ट्रॉनिक रूप से पहचानने की रणनीति पेश की है। ऐसे में जब किसी भी व्यक्ति को कोरोना संक्रमण होता है, तो हर ऐसे एप उपयोगकर्ता को तुरंत क्वारंटाइन किया जा सकेगा, जिसके संपर्क में आने के कारण उसका इलेक्ट्रॉनिक ब्लू टूथ हैंडशेक हुआ हो। कोरोना के खिलाफ वैश्विक लड़ाई में इसे असाधारण प्रयास बताते हुए विभिन्न वैश्विक एजेंसियों ने इसकी खूब प्रशंसा की है। यह एप सुनिश्चित करता है कि उपयोगकर्ता की गोपनीयता भंग न हो। यह बात अच्छी तरह से जानते हुए भी कि यह एप्लिकेशन कोविड-19 नामक अदृश्य शत्रु के खिलाफ भारत की लड़ाई में एक महत्वपूर्ण उपकरण साबित हो सकता है, तब भारत तोड़ो बिग्रेड इस लड़ाई को कमजोर करने में लग गई है। साजिश के तौर पर यह बिग्रेड पूरी ताकत से लोगों से सोशल मीडिया से लेकर अन्य माध्यमों से इस एप को निष्प्रभावी करने और इंस्टॉल करने से रोकने में जुटी हुई है।

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कुछ समय पहले कोरोना की लड़ाई को कमजोर करने के लिए इन ताकतों ने बकायदा एक रणनीति अपनाई थी जिसके तहत टिकटॉक वीडियो श्रृंखला के माध्यम लोगों को भड़काया गया था। इसमें कहा जा रहा था कि वे मास्क का उपयोग न करें। वीजा नियमों का उल्लंघन कर रहे विदेशी कोरोना प्रभावितों को भारत में वायरस फैलाने के लिए विशाल रैलियां आयोजित करने के लिए उकसाया जा रहा था। लेकिन जमात के कारनामें के बाद अब इससे बड़ा खेल खेला जा रहा है। यह जानते हुए कि स्मार्ट फोन उपयोगकर्ता अधिक जागरूक लोग हैं जो दुनिया भर की खबरों और जानकारियों के साथ ही अपनी गोपनीयता और डेटा को प्राथमिकता देते हैं। लेकिन भारत के बाहर से आरोग्य ऐप को गोपनीयता की आड़ लेकर बदनाम किया जा रहा है। विदेशी मीडिया में लंबे चैड़े लेख लिखकर लोगों को डराया जा है। आरोग्य सेतु ऐप लांच होने के बाद हफिंगटन पोस्ट भारत में भ्रामकता और लोगों में डर पैदा करने के लिए बाकायदा एक लेख लिखता है। जिसमें उसके द्वारा कहा जाता है कि जो भी इसे इंस्टाॅल करेगा उसकी तमाम जानकरियां सरकार के पास एकत्र हो जाएंगी और भविष्य में सरकार इन जानकारियों को अपने प्रयोग में ला सकती है। कुल मिलाकर लेख का सार यह है कि इस ऐप को कोई भी व्यक्ति इंस्टाॅल न करे। जबकि हकीकत में देखा जाए तो इस ऐप में ऐसा कुछ भी नहीं है। यह ऐप कोरोना की जंग में बहुत मदद देने वाला है। लोगों की जान बचाने वाला है। इस ऐप के माध्यम से तमाम वे जानकारियां मिल सकेंगी जो बिना इलेक्ट्रॉनिक माध्यम का सहारा लिए संभव ही नहीं हैं।
लेकिन विदेशी मीडिया से लेकर तथाकथित बौद्धिकों के निजी सोशल मीडिया समूहों में इसके विरोध में बाकायदा संदेश पोस्ट किए जा रहे हैं। इन समूहों में साफ तौर से कहा जा रहा है कि इस ऐप के माध्यम से निजता को खतरा है और इंस्टाॅल करने वाले उपयोगकर्ता की निगरानी की जा रही है। इन भ्रमित करने वाले संदेशों से बहुत से स्मार्ट फोन उपयोगकर्ता यकीनन दुष्प्रचार का शिकार भी हो रहे होंगे। ऐसे में खुफिया एजेंसियों को चाहिए कि वह ऐसे तत्वों को पहचाने और उन पर कड़ी कार्रवाई करे। क्योंकि यह लोग देश में अराकता फैलाने की भरसक कोशिश में लगे हुए हैं। वह नहीं चाहते कि भारत इस संकट से बाहर आए। वे चाहते हैं कि वायरस को हराने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किए जा रहे हरेक प्रयास विफल हो जाएं।