आफत में इंसानियत के लिए और दिक्कत बढ़ाते इस्लामिक कट्टरपंथी

    दिनांक 16-अप्रैल-2020
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मलिक असगर हाशमी
खुद को खुदा की बताई राह पर चलने वालों की बे​हयाई देखिए कि सरकार की तमाम तरह की चेतावनियों, सुझाव के बावजूद आज भी जमातियों का मस्जिदों से मिलने का सिलसिला बंद नहीं हुआ है। लेकिन हद की बात यह है कि देश से लेकर विदेशों तक में कोरोना से संक्रमित इस्लामिक कट्टरपंथी खाने-पीने की वस्तुओं से लेकर डाॅक्टर, नर्स और पुलिस पर थूककर इंसानियत के लिए और दिक्कत बढ़ा रहे हैं

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‘‘मानव ही मानव का दुश्मन बन जाएगा किसने सोचा था ऐसा दौर भी आएगा। जो मजहब मनुष्य को मानवता की राह दिखाता था। उसकी आड़ में ही मनुष्य को हैवान बनाया जाएगा। इंसानियत को शर्मशार करने खुद इन्सान ही आगे आएगा, किसने सोचा था कि वक्त इतना बदल जाएगा।’’
किसी कवि की ये पंक्तियां उन लोगों पर सटीक बैठती हैं, जिन पर विश्वभर में कोरोना जैसी महामारी फैलाने का आरोप हैै। इस सूची में चीन की कम्युनिस्ट सरकार के बाद कोई है तो वे हैं इस्लामी कट्टरपंथी। अपने मजहबी आडंबरों के कारण उन्होंने कुछ ऐसे गुल खिलाए कि जिन देशों तक इस रोग के पहुंचने की कोई संभावना नहीं थी। आज वहां भी यह हाहाकार मचाए हुए है। इस समय दुनिया के सवा दो सौ देश कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहे हैं। स्थिति यह है कि आस्ट्रेलिया जैसा साफ-सुथरा देश भी कोराना संकट से त्राहिमाम-त्राहिमाम कर रहा है।
चीन में कोरोना महामारी के बाद फरवरी में मलेशिया के कोलालंपुर में तब्लीगी जमात का अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन हुआ था, जिसके बाद उसमें शामिल होने वाले पाकिस्तान, श्रीलंका, भारत, बांग्लादेश, नेपाल आदि के लोगों ने अपने-अपने देश में इसे पहुंचाया। भारत में संक्रमण ने विस्तार इसलिए लिया कि दिल्ली के निजामुद्दीन स्थिति तब्लीगी जमात के मुख्यालय में देश और विभिन्न देशों के जमाती इकट्ठे हुए। वहां मार्च के मध्य में एक मजहबी सम्मेलन हुआ, जिसके बाद वहां एकत्रित लोग देशभर की मस्जिदों में फैल गए। इनमें से अधिकांश कोरोना संक्रित थे। यही वजह रही कि भारत में देखते ही देखते कोरोना पीड़ित दस हजार के पार कर गए। केंद्र और प्रदेश सरकारों के अथक प्रयासों से जमातियों को ढूंढ-ढूंढकर मस्जिदों से निकाला गया। खुद को खुदा की बताई राह पर चलने वालों की बेहयाई देखिए कि सरकार की तमाम तरह की चेतावनियों, सुझाव के बावजूद आज भी जमातियों का मस्जिदों से मिलने का सिलसिला बंद नहीं हुआ है।
किसी तरह जमातियां को ढूंढकर निकाल भी लिया जाए तो कट्टरपंथियों के उस सोच को कैसे मारा जाए जो इस्लाम और खुद के सिवाए बाकी को तुच्छ समझते हैं। यही लोग कानून और मानवता को अपने जूतों की नोंक पर रखे हुए हैं। आतंकवाद के विस्तार की बड़ी वजह भी यही है। एक टिप्पणीकार सुनील कुमार कहते हैं कि कट्टरवादी सोच का असर है कि ये कानून और दूसरे धर्म तथा समाज को हिकारत से देखते हैं। टीवी बहशों में भाग लेने वाले स्लामिक स्कॉलर अतीकुर्रमान कहते हैं कि रूढ़ीवादी सोच ने ही विश्वभर में इस्लाम और मुसलमानों का बहुत नुकसान पहुंचाया है। ऐसे लोग इस्लाम के बताए मानवता के रास्ते पर चलने का ढोंग करते हैं, जबकि इनका खुद का अपना एजंेडा होता है।
विदेशों में भी अराकता फैलाए हुए हैं कट्टरपंथी
आस्ट्रेलिया के न्यूज 9 की एक खबर के मुताबिक, कोराना संक्रमित हिजाब में लिप्टी एक मुस्लिम महिला बैंकस्टोवन लिडकाम्ब अस्पताल से अपनी कार में 120 किलोमीटर की रफ़्तार से भागने लगी तो पुलिस ने उसे घेर कर पकड़ लिया। मगर उक्त महिला की कट्टर इस्लामी तालीम का प्रभाव देखिए, उसने पुलिस वाले के मुंह पर इसलिए थूक दिया ताकि वह भी संक्रमित हो जाए। इसी तरह अमेरिका में अमेजन का एक डिलवरी ब्वाय को तब पकड़ा गया जब वह एक पार्सल महिला को सौंपने गया। उससे पहले उसने अपना थूक हथेली पर रखकर पूरे पार्सल पर मला। फॉक्स टीवी के अनुसार, उसकी यह हरकत महिला के सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई। इसके बाद इस फुटेज को महिला ने सोशल मीडिया पर डाल दिया ताकि डिलीवरी ब्वाय की इस तरह की हरकत से लोग सचेत हो जाएं। इस वक्त इटली के बाद अमेरिका ही विश्वभर में कोरोना वायरस का सबसे बड़ा हाॅट स्पॉट बना हुआ है।
उपरोक्त ये दो उदाहरण उनके लिए हैं जो जमातियों को भोला-भाला समझते हैं और उनके डॉक्टरों, नर्सों पर थूकने की घटना को मीडिया की उपज मानते हैं। तब्लीगी जमात के मुख्यालय मर्कज से जब जमातियों को क्वारंटाइन करने के लिए में बसों में भर कर ले जाया जा रहा था तब भी वे रास्ते भर इस नियत से थूकते गए कि इसके संपर्क में आने वाले कोरोना का शिकार हो जाएं। दिल्ली के द्वारका में दो सौ जमातियों को क्वारंटाइन किया गया है। वे जिस फ्लैट में रखे गए हैं। वहां की खिड़कियों से प्लास्टिक थैलियों में पेशाब भरकर बाहर फेंकने की शिकायत है। इसी तरह गाजियाबाद के एमएमजी अस्पाल में कोरेंटीन किए गए जमातियों ने इस कदर उत्पात मचाया कि वहां के मुख्य चिकित्सा अधिकारी को प्रशासन को पत्र लिखना पड़ा कि वे इन्हें यहां से ले जाएं। उनके लिए इनका इलाज करना मुश्किल हो रहा है। तब्लीग जमात के लोग बिना पैंट के घूमते हैं। नर्सों को गंदे-गंदे इशारे करते हैं। कर्मचारियों से बीड़ी-सिगरेट का इंतजाम करने का दवाव डालते हैं। मना करने पर डॉक्टरों पर थूकते हैं। कई शहरों में कोरेंटीन किए गए जमातियों के कबाव और बिरयानी मांगने की भी खबर है। जब पूरे विश्व की मानवता खतरे में है तो इन अराजक तत्वों को कबाब और बिरयानी सूझ रही है। कोटा पुलिस को एक ऐसी मुस्लिम लड़की की तलाश है जो भोर होते ही थैलियों में थूक कर घरों में फेंकती है।
बहरहाल, इस महामारी के कारण करोड़ों लोगों के रोजगार छिन गए हैं। लाखों की संख्या में लोग मदद की आस में जहां-तहां फंसे हुए हैं। उन तक मदद कैसे पहुंचाई जाए सरकार और सामाजिक संगठन चैबीसों घंटे इसी जुगत में लगे रहते हैं। लेकिन ऐसी विकट स्थिति में मानवता की रक्षा के लिए हाथ बढ़ाना तो दूर की बात कट्टरपंथी उल्टा आफत बढ़ाते दिख रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सुबूही खान कहती हैं कि इस्लाम के अति उत्साहियों को इंसान से हैवान बना दिया है।