मुल्ला बोल रहे हैं कोरोना केवल काफिरों के लिए है...
   दिनांक 02-अप्रैल-2020
आखिर क्यों दुनिया भर में मुसलमानों के कुछ तबके जानबूझकर लॉकडाउन तोड़ रहे हैं? क्यों मरकज़ सज रहे हैं ? इस खतरनाक खेल के लिए कौन सा बारूद इस्तेमाल हो रहा है..

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कोरोना जैसी महामारी के बीच दुनिया भर  में मुसलमानों से सामूहिक नमाज अदा करने की अपील की जा रही है.
दिल्ली में तब्लीगी उन्हें बचाने गए चिकित्सकों पर क्यों थूक रहे थे? इंदौर में एक मुस्लिम इलाके में कोरोना संक्रमितों को ढूंढने गए डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों के ऊपर मुस्लिमों ने हिंसक हमला क्यों कर दिया? क्यों अलग-अलग जगह कुछ मुस्लिम लॉकडाउन को तोड़कर नमाज पढ़ने इकट्ठे हो रहे हैं ? क्या चल रहा है इन कट्टरपंथियों के दिमाग में ? इसे समझने के लिए पहले दुनिया के दूसरे हिस्सों में क्या चल रहा है, इसे देखना जरूरी है.
देश दर देश....
चीनी वायरस कोरोना के बढ़ते खतरे के बीच, केवल भारत में मस्जिदें खुली हुई हैं, ऐसा नहीं है. दुनिया के दूसरे हिस्सों में भी यही जारी है. टोरंटो (कनाडा) जैसे आधुनिक शहर में भी अनेक मस्जिदों में सामूहिक नमाज जारी है. नमाज पढ़वाने वाले तक़रीर कर रहे हैं कि “कोरोना केवल काफिरों के लिए है. नमाजी मुसलमान को इससे कुछ नहीं होगा..” तब्लीगी जमात के दिल्ली स्थित मरकज़ में जो बातें कही गईं वो धरती के दूसरे अनेक हिस्सों में भी दोहराई जा रही हैं. अफ्रीकी देश नाइजीरिया में 1 अप्रैल को, शेख सानी जिन्गीर नामक मौलाना ने दावा किया कि “कोरोना एक षड्यंत्र है मुसलमानों को उनके मज़हबी फ़र्ज़ से दूर करने का” शेख सानी ने कहा कि कोरोना नाम की कोई बीमारी है ही नहीं. टीवी पर लाखों दर्शकों को संबोधित करते हुए उसने कहा “जो भी मुसलमान ट्रम्प में भरोसा करता है उसे तौबा करनी चाहिए”
उधर गाजा पट्टी के एक इमाम जमील अल मुतावा ने खुतबा देते हुए कहा “अल्लाह ने ये अपना ये सिपाही (कोरोनावायरस) भेजा है. अगर उसने ऐसे 50 भेज दिए होते तो क्या होता? उसने केवल एक भेजा और सारे 50 राज्य (अमेरिका के 50 राज्य) चपेट में आ गए. वो कह रहे हैं कि सिर्फ दो महीनों में 58 प्रतिशत कैलिफोर्निया राज्य इसकी मार में होगा. वो कह रहे हैं कि ढाई करोड़ अमेरिकी इससे संक्रमित होंगे. अल्लाह महान है. देखो ! जिन्होंने अल अक्सा मस्जिद (जेरूसलम स्थित प्राचीन मस्जिद) के खिलाफ जालसाजी की, वो अल्लाह के इस सिपाही (कोरोना वायरस) की तलवार की चोट से बिखर रहे हैं.” यहूदियों के प्रति शाश्वत नफ़रत को उभारते हुए उसने आगे कहा कि “ देखो ! इजराइल की सड़कें कैसी वीरान पड़ी हैं. और देखो ! इस मस्जिद में कितनी भीड़ है. कौन है जिसने हमें बचाया है, और उन्हें मारा है ? उसी (अल्लाह)ने.” मुतावा ने डींग मारी कि मुस्लिम इस कोरोना संक्रमण से सबसे कम प्रभावित हुए हैं, और “अल्लाह की इच्छा” से ठीक होते जा रहे हैं. “जब मैं मस्जिद में घुसा तभी मेरे पास एसएमएस आया कि बेथलेहम में जो 56 मुसलमान अस्पताल में भर्ती किए गए थे, वो सभी ठीक हो गए हैं. गाजा में कोई बीमार नहीं है.”
पाकिस्तान में भी तबलीगी जमात के लोग वैसे ही उत्पात मचा रहे हैं जैसा उन्होंने दिल्ली में मचाया. जमात अकेली नहीं है. दर्जनों फिरके हैं, जो इस चीनी वायरस की खुशी मना रहे हैं कि ये गैर मुस्लिमों को ख़त्म करेगा. लाहौर के तंजीम ए इस्लामी के अमीर (प्रमुख) हाफ़िज़ अकीफ सईद ने कहा कि “ये वायरस अल्लाह का कहर है, (वैसे बात सही है. पाकिस्तान ने चीन को अपना खुदा ही बना रखा है) जो ख़ास तौर पर दुनिया के विकसित देशों को निशाना बना रहा है. इन देशों ने मुसलमानों पर अत्याचार किया है.” उसने कहा कि इन देशों (इटली, स्पेन, ब्रिटेन, जर्मनी आदि) का अपराध ये है कि इन्होने “इंडिया, इजराइल और अमेरिका पर चुप्पी साध रखी है. जिन्होंने मुस्लिमों पर कर्फ्यू लगाया अब वो खुद ही अपने घरों में बंद हैं. “जिन यूरोपीय देशों ने मुस्लिम महिलाओं को अपना चेहरा ढंकने से रोका, अब न केवल उनकी औरतें बल्कि मर्द खुद भी अपने चेहरे को मास्क से ढंकने को मजबूर हैं.”
विचार का वायरस
ये मौलाना कुरआन की कुछ आयतों और कुछ हदीस को आधार बनाकर भीड़ को बहका रहे हैं. इनका पहला प्रोपेगंडा है कि ये कोरोनावायरस कुरआन की इस आयत के हिसाब से काफिरों के लिए भेजा गया दंड है “अगर वो (मुनाफिक/काफिर )पश्चाताप करते हैं तो उनके लिए अच्छा है. लेकिन यदि वो पीठ फेर लेते हैं तो अल्लाह उन्हें इस दुनिया में और इसके बाद दर्दनाक सजा देगा. और उन्हें दुनिया में कोई बचाने वाला नहीं होगा.” (9:74)

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दूसरा, वो ये हदीस दुहराते है कि “ अल्लाह के लिए शहीद होने वाले सात तरह के शहीद हैं. वो जो प्लेग से मारा जाए. वो जो डूबकर मरे. जो प्ल्यूरिसी (फेफड़े की बीमारी) से मारा जाए. जो अंदरूनी बीमारी से मरे. वो जो किसी भवन के गिरने से मारा जाए. जो जलकर मारा जाए. और वो महिला जो बच्चे को जन्म देते हुए मारी जाए.”(सुहान अबी दाउद , 3111) इस हदीस को दुहराकर समझाया जा रहा है कि यदि उन्हें ये बीमारी हो भी गई, और वो मारे गए तो वो शहीद कहलाएंगे. उन्हें जन्नत नसीब होगी. कोई आश्चर्य नहीं कि जिन तब्लीगियों को कोरोनावायरस संक्रमित होने के संदेह में अस्पताल भेजा जा रहा था वो डॉक्टरों पर ही थूककर उन्हें संक्रमित करने की इच्छा कर रहे थे. कोई हैरानी कि बात नहीं कि दिल्ली के उस तबलीगी मरकज़ में कहा गया कि यदि मर भी गए तो ये मरने के लिए सबसे अच्छी जगह होगी.
साहि अल बुखारी की एक अन्य हदीस (3474) है, जो कहती है “आयशा (पैगम्बर मुहम्मद की दसवीं बेगम) ने कहा – मैंने पैगम्बर से प्लेग के बारे में पूछा. उन्होंने कहा कि ये अल्लाह द्वारा भेजा गया दंड है, उन पर, जिन्हें वो दंडित करना चाहता है. अल्लाह ने इसे (प्लेग को) विश्वासियों (मुस्लिमों) पर दया का माध्यम बनाया है. जो अपने मुल्क में प्लेग फैलने पर धैर्य पूर्वक रहकर अल्लाह के इनाम का इंतजार करता है, ये विश्वास करते हुए कि उसे कुछ नहीं हो सकता सिवाय उसके जो उसके लिए अल्लाह ने लिख रखा है. उसे शहीद जैसा इनाम मिलेगा.”
इस्लामिक स्टेट का न्यूज़लेटर
जिहादी आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट ने अपने अनुयायियों का आह्वान किया है कि जो भी जिहाद के रास्ते पर आग बढेगा उसका कोविड-19 (कोरोनावायरस) से कुछ नहीं बिगड़ेगा, क्योंकि “ये वायरस अल्लाह का भेजा हुआ प्लेग है. ये काफिरों के लिए भेजी गई दर्दनाक सजा है.” संदेश आगे कहता है कि “ मुसलमानों को गैर मुस्लिमों पर दया नहीं दिखानी चाहिए और वर्तमान स्थिति का उपयोग मुस्लिम बंदियों (आतंकियों) को कैम्पों से छुड़ाने के लिए करना चाहिए.” इस्लामिक स्टेट के एक अन्य न्यूज़ लेटर में अल्लाह से दुआ की गई है कि वो कोरोनावायरस को और ज्यादा घातक बनाए और मुस्लिमों को इससे बचाए.
स्वास्थ्य चुनौती बनी सुरक्षा चुनौती
इन बातों के मद्देनजर कोविड-19 स्वास्थ्य समस्या के साथ सुरक्षा ख़तरा भी बन गया है. दुनिया की सुरक्षा एजेंसियां चौकस हो रही हैं. अमेरिका के होमलैंड सिक्योरिटी विभाग ने इस संदर्भ में पहले ही मेमो जारी कर दिया है, जिसमें कहा गया है कि जिहादी आतंकी इस महामारी का उपयोग हथियार की तरह कर सकते हैं. भारत में पिछले दो-तीन दिनों में जो दृश्य खड़ा हुआ है उसे देखकर समझ आता है कि समस्या कई छोर वाली है. एक तरफ तबलीग जैसी जमातों को संभालना है, दूसरी तरफ इनके प्रभाव में आकर खुद और दूसरों के लिए आत्मघाती संक्रामक बम बनकर घूमने वाले कमअक्लों से भी निपटना है. एक और ख़तरा उस ऑनलाइन संक्रमण से भी है, जो इस्लामिक स्टेट कम्प्यूटरों, लैपटॉप और मोबाइल फोन के माध्यम से चुपचाप अपने गुर्गों के दिमाग में पहुँचा रहा है.
देश के अलग-अलग स्थानों से जिनके वीडियो आए हैं ऐसे जगह-जगह नमाज के लिए इकट्ठे होकर क़ानून तोड़ रहे और फिर पुलिस के लट्ठ खाकर भाग रहे भेड़चाल वालों की बीमारी ये है कि वो इन मज़हबी जमातों द्वारा हांके जा रहे हैं.