आतंकी संगठनों के लिए जमीन तैयार करती है जमात
   दिनांक 02-अप्रैल-2020
वसीम रिजवी
खतरनाक तब्लीगी जमात को खत्म करने की जरूरत है, क्योंकि हर मुस्लिम आतंकी संगठनों की यह बुनियादी ताकत हैं। इससे जुड़े मुल्ला-मौलवी यहां रहकर वह काम कर जाता है जो आतंकी संगठन खुल कर नहीं कर सकते। इस जमात पर प्रतिबंध लगाए जाना बेहद जरूरी है

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मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी तब्लीगी जमात का अमीर है, जो अपने भाषणों से मुसलमान को कट्टरपंथी बनाता है
तब्लीग का मतलब होता है प्रचार करना और जमात का मतलब-एक समूह। तब्लीगी जमात मुसलमानों का एक खतरनाक समूह है जो पूरी दुनिया में इस्लाम के प्रचार के नाम पर मुसलमान लड़कों को कट्टरपंथी बनाता है। इनका काम है यह चार-पांच के समूह में शहर-शहर और गांव-गांव जाते हैं और मुसलमान लड़कों को एकत्र करके उन्हें इस्लाम की बातें बताते हैं।
दरअसल, यह जमात पूरी दुनिया में फैली हुई है। हिंदुस्थान में भी इसके लाखों सदस्य हैं। चाहे कुख्यात आतंकी अबू बकर बगदादी हो या ओसामा बिन लादेन यह सब तब्लीगी जमात के ही मददगार थे। तब्लीगी जमात को दुनिया के कट्टरपंथी और आतंकी मुल्ला ही चला रहे हैं और बहुत मोटा पैसा पूरी दुनिया से इनको इसी काम के लिए दिया दिया जाता है कि यह मुस्लिम लड़कों को कट्टरपंथी बनाएं और इस्लाम का ऐसा प्रचार करें, जिससे वह यह समझें कि अगर अल्लाह की राह में अपनी कुर्बानी भी देनी पड़ जाए तो देने से पीछे न हटें। वह नए लड़कों में जहर भरते हैं कि दुनिया तो खत्म हो जाएगी। दुनिया में जो भी इंसान आया है वह चंद दिनों के लिए आया है लेकिन असली जिंदगी उसको अल्लाह के लिए जीनी है। यहां अच्छे काम करेगा, इस्लाम की बातों पर अमल करेगा और अल्लाह की राह में अपनी कुर्बानी के लिए हर वक्त तैयार रहेगा, तो अल्लाह तुमको मरने के बाद जन्नत में रखेगा। हर ऐशो-आराम देगा। साथ ही इस जमात के कट्टरपंथी मुल्ला-मौलवियों द्वारा युवाओं के दिमाग में यह गंदगी भरी जाती है कि दुनिया में जो अल्लाह को नहीं मानते हैं, जो कुरान शरीफ को नहीं मानते हैं वे सब काफिर हैं और काफिर अल्लाह के दुश्मन हैं। उनसे न कारोबार करना चाहिए, न तो उनका दिया खाना खाना चाहिए और जब भी वक्त मिले तो उनको नुकसान पहुंचाना चाहिए। हद तो तब हो जाती है जब इनके द्वारा मरने-मारने की बात इन युवाओं के मनों में भरी जाती है। कट्टरपंथी नौजवान लड़कों को बरगलाते हुए यहां तक समझाते हैं कि काफिरों को मारना सवाब है। अगर कोई शख्स एक काफिर को भी मार देता है तो उसको सौ हज का सवाब मिलेगा। इसीलिए इस तब्लीगी जमात को दुनिया का सबसे खतरनाक जमात माना जाता है।
कट्टरपंथी बनाना इस जमात का काम
कुल मिलाकर देखा जाए तो इनका काम सिर्फ और सिर्फ मुस्लिम नौजवान लड़कों को कट्टर बनाना है। जब कोई भी मुस्लिम लड़का कट्टर बन जाता है तो वह आसानी से किसी भी आतंकी संगठन के लिए काम करने के लिए तैयार हो जाता है। और उसमें अगर कुर्बानी देने का जज्बा पैदा हो गया तो वह किसी भी आतंकी संगठन के लिए मानव बम बनने से भी नहीं हिचकता। क्योंकि उसके दिमाग में तो एक ही बात चल रही होती है कि अगर वह काफिरों को मार कर जन्नत में चला गया तो इससे अच्छा और क्या हो सकता है। क्योंकि मौत तो एक न एक दिन आनी ही है। फिर क्यों न अल्लाह की राह में कुर्बानी देते हुए काफिरों को मारकर जन्नत में जाया जाए। बस इसी तरह की मानसिकता जमात के मुल्ला दुनिया में पैदा करने की कोशिश में लगे हुए हैं।
बीस सालों में बढ़ा है युवाओं में कट्टरपंथ
आंकड़ों पर नजर डालें तो देखा जा सकता है कि पिछले 20 सालों में मुस्लिम नौजवान लड़कों में बहुत तब्दीलियां आई हैं। पहले चेहरे पर दाढ़ी, कुर्ता, पजामा वही लोग पहना करते थे जो लोग किसी मदरसे में पढ़ते थे या मदरसों में मौलवी होते थे। लेकिन अब बहुत बड़ी तादाद में पढ़े-लिखे मुसलमान और नौजवान लड़के इस्लामिक दाढ़ी रख रहे हैं। दाढ़ी रखना कोई बुरी बात नहीं है, लेकिन मानसिकता को बदल कर कोई नया काम किया जा रहा है या इंसान में कोई बदलाव आ रहा है तो यह इस बात का सुबूत है कि उसकी सोच में कोई बदलाव जरूर आया है। इसलिए ऐसी खतरनाक तब्लीगी जमात को खत्म करने की जरूरत है। क्योंकि हर मुस्लिम आतंकी संगठनों की यह बुनियादी ताकत हैं। इससे जुड़े मुल्ला-मौलवी यहां रहकर वह काम कर जाता है जो आतंकी संगठन खुल कर नहीं कर सकते। हिंदुस्तान में तो जरूर इस जमात पर प्रतिबंध लगना चाहिए।
कटृटरपंथी मजहबी प्रचार का हिस्सा है जमात
तब्लीगी जमात विश्व की सतह पर सुन्नी कट्टरपंथी इस्लामी मजहबी प्रचार का आंदोलन है, जो मुसलमानों को मूल रूढ़वादी इस्लामी पद्दतियों की तरफ बुलाता है। खास तौर पर मजहबी तरीके एवं अन्य इससे जुड़ी गतिविधियां। इनकी सदस्यों की संख्या लगभग 150 मिलियन है। जमात की दक्षिण एशिया में सबसे अधिक संख्या है, जो 150 से 195 देशों में काम करती है। दरअसल, इस मजहबी आंदोलन को 1927 में मुहम्मद इलियास अल-कांधलवी ने भारत में शुरू किया था। इसका मूल उद्देश्य मजहबी इस्लाम को मुसलमानों तक फैलाना था लेकिन जब से इस्लामिक आतंकवाद दुनिया में फैला तब से ये जमात उनके कब्जे में चली गई और इस्लाम का प्रचार आतंकियों के अनुसार करने लगी।
पड़ोसी देशों में आतंकी गतिविधियों में शामिल जमात
भारत में जमात की अराजक और आतंकी गतिविधियों के बारे में अधिकतर गैर मुस्लिम ठीक से नहीं जानते हैं। लेकिन भारत के पड़ोसी इस्लामिक मुल्क-पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान में यही जमात खुलकर आतंकियों के लिए काम कर रही है। इस जमात के लोग भारत से इस्लामिक दुश्मनी मानते हैं। देखने में आता है कि यह भारत कम ही आते हैं क्योंकि इन पर यहां खास नजर रखी जाती है। इसलिए ये जमात मलेशिया, थाईलैंड, तुर्की जैसे मुल्कों में जमात से जुड़े मुल्लाओं को ज्यादातर भारत भेजता है, ताकि कोई उन पर शक न करे।
(लेेखक शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं )