मौलाना साद के साथ एनएसए डोभाल ही पुरानी तस्वीर जारी कर फैलाई अफवाह
    दिनांक 02-अप्रैल-2020
हिंदुस्तान टाइम्स में खबर के साथ एक फोटो छापी गई जिसमें एनएसए अजीत डोभाल तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना मोहम्मद साद से हाथ मिला रहे हैं। पीटीआई की जारी की हुई इस फ़ोटो में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि ये पुरानी है

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सेकुलर मीडिया का अफवाही तंत्र इसमें शामिल होने से ख़ुद को कैसे बचा सकता है। झूठ फैलाना और लोगों को मूर्ख बनाना तो उनके लिए रोज़मर्रा का काम है। हिंदुस्तान टाइम्स अख़बार ने ख़बर छापी कि दिल्ली के निज़ामुद्दीन मरकज़ में छिपे मौलवी बाहर निकलने और प्रशासन के साथ सहयोग करने को तैयार नहीं थे। 28 और 29 तारीख़ की रात 2 बजे ख़ुद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने कमान संभाली और उनके मुखिया को मस्जिद ख़ाली करवाने को तैयार किया। गृह मंत्री अमित शाह के कहने पर अजीत डोभाल ने एक बड़ी समस्या को पनपने से पहले क़ाबू कर लिया। वरना स्थितियां और भी बिगड़ सकती थीं। हिंदुस्तान टाइम्स में रिपोर्ट तो ठीक छपी, लेकिन इसके साथ एक फ़ोटो भी थी, जिसमें अजीत डोभाल तबलीगी जमात के मुखिया मौलाना  मोहम्मद साद से हाथ मिला रहे हैं। पीटीआई की जारी की हुई इस फ़ोटो में कहीं भी यह नहीं बताया गया कि ये पुरानी है। इसी ने झूठी ख़बरें उड़ाने वाले अफवाहबाजों को मौक़ा दे दिया।
देखते ही देखते कांग्रेसी दुष्प्रचार तंत्र सक्रिय हो गया। एक न्यूज़ पोर्टल ने ख़बर दी कि अजीत डोवाल ने जाकर मौलाना के हाथ जोड़कर, नाक रगड़कर उसे मरकज़ ख़ाली करने को राज़ी किया। लेकिन तब तक यह जानकारी आ गई थी कि सरकार मरकज़ की गतिविधियों को और बर्दाश्त करने को तैयार नहीं थी और पूरी संभावना थी कि अगर वो नहीं मानते तो उनके पास पछताने के सिवा कोई तरीक़ा नहीं बचता। फ़ौरन नई कहानी गढ़ दी गई कि "उधर मोदीजी कह रहे है सोशल डिस्टेंसिंग रखो और इधर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को ख़ुद ही उनकी हिदायतों की कोई परवाह नहीं है। अजीत डोभाल ने जिस मौलाना साद से हाथ मिलाया वो भी कोरोना संक्रमित हो सकता है।
जबकि सच यह है कि ये तस्वीर पुरानी है। पिछले साल नवंबर में अयोध्या के फैसले के समय कानून और व्यवस्था की स्थिति पर अजीत डोवाल ने अपने निवास में सारे प्रमुख धर्मगुरुओं से मुलाकात की थी। मौलाना साद से हाथ मिलाते ये तस्वीर उसी समय की थी। मंगलवार को पूरे दिन यह तस्वीर मुख्यधारा मीडिया से लेकर सोशल मीडिया तक पर फैलाई गई और सच सामने आने के बाद भी किसी ने इसे हटाने या खेद जताने की ज़रूरत नहीं समझी।