महाराष्ट्र: साधुओं की निर्मम हत्या मॉब लिंचिंग या साजिश

    दिनांक 20-अप्रैल-2020   
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आंखें बंद करो तो भीड़ से बचकर मौत से बचने की उस साधु की दौड़ नजर आती है जिसे बर्बरता से मार डाला गया। आतंकित, बेबस वृद्ध साधु खाकी के सहारे बाहर आता है। उस यकीन था पुलिसवाला उसे बचा लेगा लेकिन उसे भीड़ के हवाले कर दिया जाता है और भीड़ उसे बर्बरता से मार डालती है

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भीड़ की हैवानियत का शिकार हुए महाराज कल्पवृक्षगिरी और निलेश तेलगड़े
महाराष्ट्र के पालघर जिले के गढ़चिंचल गांव में 16 अप्रैल की रात दो साधुओं और उनके ड्राइवर को बर्बरता से मार डाला गया। तीनों मुंबई के कांदिवली से गुजरात के सूरत में एक अंतिम संस्कार में भाग लेने जा रहे थे। उनकी पहचान 35 वर्षीय सुशीलगिरी महाराज, 70 वर्षीय चिकणे महाराज कल्पवृक्षगिरी और 30 वर्षीय निलेश तेलगड़े के रूप में हुई।
आंखें बंद करो तो भीड़ से बचकर, मौत से बचने की उस साधु की दौड़ नजर आती है जिसे बर्बरता से मार डाला गया। आतंकित, बेबस वृद्ध साधु खाकी के सहारे बाहर आता है। भगवा वस्त्र पहने हुए डरा—सहमा दुर्बल साधु पुलिससवाले के पीछे उसका कंधा पकड़कर चल रहा है। बाहर शोर मचाती हुई जाहिल भीड़ खड़ी है साधु डरा, सहमा हुआ है, लेकिन फिर भी उसे खाकी पर यकीन है कि वह पुलिसवाला उसे वहां से बचाकर ले जाएगा, उसका कुछ नहीं बिगड़ेगा लेकिन बाहर आते ही उसका यह विश्वास चूर—चूर हो जाता है और खाकी पहनने वाला वो पुलिसकर्मी जिसने खाकी पहनते हुए शपथ ली थी कि वह दूसरों की हर सूरत में हिफाजत करेगा भले ही उसकी जान क्यों न चली जाए, वो खाकीधारी पुलिसवाला उस साधु का हाथ झटककर उसे भीड़ के हवाले कर देता है। बर्बर भीड़ शिकारी कुत्तों की तरह उस कृष्काय साधु पर टूट पड़ती है जैसे जंगल में शिकारी कुत्ते जब शिकार को घेर लेते हैं तो वे उसे जिंदा ही नोचना शुरू देते हैं, वे शिकार के मरने का इंतजार नहीं करते वे उसे नोचते रहते हैं और शिकार तड़प—तड़पकर मर जाता है।
 
ठीक उसी तरह जीर्ण—शीर्ण अवस्था में भगवाधारी साधु को मारा गया। पुलिसवाले द्वारा उसे भीड़ में छोड़ देने के बाद भी साधु दो कदम दौड़ता है, वह पुलिस वाले का कंधा थामने की कोशिश करता है लेकिन पुलिसवाला उसे झटक देता है। बचने की कोशिश में साधु भीड़ के सामने हाथ जोड़ता है लेकिन किसी को रहम नहीं आता, वहशी भीड़ ताबड़तोड़ डंडे उस बूढ़े साधु पर बरसाने लगती है और कुछ ही क्षणों में वह दम तोड़ देता है।
यह घटना वामपंथ और मिशनरी का कॉकटेल तो नहीं
अब बात करते हैं कि पालघर जिले के उस इलाके कि जहां यह घटना हुई। यह पालघर​ जिले का डाहनू क्षेत्र है यहां से सीपीएम से विनोद निकोले विधायक हैं। विश्व हिंदू कोंकण प्रांत के सहमंत्री और प्रवक्ता श्रीराज नायर बताते हैं​ कि यह इलाका आदिवासी जनजातियों का है। कुछ साल पहले तक पालघर ठाणे जिले का हिस्सा हुआ करता था, अब पालघर जिला बन चुका है। इस इलाके में ईसाई मिशनरियां सक्रिय हैं। साथ में वामपंथी ब्रिगेड भी सक्रिय हैं। इसलिए किसी साजिश की बात से भी इंकार नहीं किया जा सकता। हमने इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराए जाने की मांग की है।
पुलिसवालों ने साधुओं को धोखा दिया !
 
वीडियो को देखें तो साफ नजर आ रहा है कि पुलिसवाले ने साधु को धोखा दिया, उसने न सिर्फ साधु को धोखा दिया बल्कि जिस खाकी को उसने पहना उसे भी दागदार किया। पुलिस ने जो एफआईआर दर्ज कि उसमें पुलिस ने भीड़ पर 307 और 302 के साथ-साथ सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का मामला भी दर्ज किया है लेकिन मामला क्या सिर्फ पुलिस पर दर्ज होना चाहिए उन पुलिसवालों पर क्यों नहीं जिन्होंने अपना फर्ज नहीं निभाया। जिन्होंने उस निरीह साधु को भीड़ के हवाले करने से पहले जरा भी नहीं सोचा।
पालघर के एसपी गौरव सिंह कहते हैं कि यह पूरा आदिवासी क्षेत्र है इस क्षेत्र में कई दिनों से ऐसी अफवाहें उड़ रही थीं कि बच्चा चुराने वाले, चोरी करने वाला गिरोह इलाके में सक्रिय है। इससे पहले 14 अप्रैल की रात को इसी तरह की घटना हुई थी, इसी क्षेत्र में सारणी नाम का गांव हैं। वहां से पुलिस ने 14 अप्रैल को दो डॉक्टरों को बचाया था। उन्हें भी गांववालों ने पकड़ा हुआ था। हमारे 4 पुलिसकर्मी भी इसमें जख्मी हुए थे। हमने अगले दिन 13 लोगों को अरेस्ट भी किया। इस घटना में भी हमने 110 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है। जिसमें से 9 नाबालिग हैं। जहां तक पुलिसकर्मियों द्वारा अपनी फर्ज सही से न निभाए जाने वाली बात है तो एक या दो मिनट के वीडियो को देखकर इस बात का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता कि वहां कैसी परिस्थितियां थीं। यदि पुलिस को बचाना नहीं होता तो वहां पुलिस जाती ही नहीं। जबकि नजदीकी पुलिस स्टेशन से वह जगह 45 किलोमीटर दूर है। जिस चौकी से पुलिस वाला साधु को लेकर बाहर आ रहा है वह फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की चौकी है। हमारे वहां से पहुंचने से पहले ही तीनों लोगों को भीड़ ने पकड़ रखा था। हां वीडियो को देखते हुए हमने दो पुलिसकर्मियों को निलंबित किया है। मामले की जांच अभी जारी है। जैसे—जैसे साक्ष्य मिलते जाएंगे कार्रवाई आगे बढ़ती जाएगी।
अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह केवल विभागीय जांच होगी या फिर उस पूरे इलाके में विस्तृत जांच की जाएगी। समान्यत: समाज में साधुओं का बड़ा सम्मान होता है। ऐसे में भगवाधारी साधुओं उनमें से भी एक 70 वर्ष की वृद्ध साधु की भीड़ द्वारा ​नृशंस हत्या किसी गंभीर साजिश की कड़ी भी हो सकती है। जैसा कि पुलिस ने बताया इसके पूर्व में डॉक्टरों भी इस प्रकार का हमला होना इलाके में चल रही असामाजिक गतिविधियों से जुड़ा भी हो सकता है। इसलिए महाराष्ट्र सरकार को चाहिए इस पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और बारीकी से सभी तथ्यों को खंगाला जाए।