लॉकडाउन के दौरान पूर्वोत्तर के लोगों की सहायता के लिए 'चर्च' ने की 'संघ' की प्रशंसा

    दिनांक 21-अप्रैल-2020
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लॉकडाउन के दौरान दिल्ली स्थित हस्तसाल इलाके में मिज़ोरम के करीब 50 परिवारों के पास राशन नहीं था। संघ के स्वयंसेवकों को जब इसकी जानकारी हुई तो उन्होंने तत्काल उन तक मदद पहुंचाई। स्थानीय चर्च को जब इसकी जानकारी हुई तो पास्टर से संघ की इस सहायता के लिए कार्यकर्ताओं का धन्यवाद देकर आभार व्यक्त किया

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जिस समय अचानक लॉकडाउन की घोषणा हुई उस समय दिल्ली में प्रवासी मजदूर वर्ग व पूर्वोत्तर राज्यों की जनता बहुत ही अकेली महसूस कर रही थी। कई समस्याएं उनके आगे मुंह बाए खड़ी थीं। लेकिन इस क्षेत्र के लोगों को किसी भी तरह की कोई समस्या न होने पाए लॉकडाउन के पहले सप्ताह से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के दिल्ली प्रान्त ने पूर्वोत्तर के छात्रों के लिए विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया गया। तो वहीं जानकारी मिलने पर पश्चिमी दिल्ली के उत्तम नगर क्षेत्र के हस्तसाल इलाके में मिज़ोरम के करीब 50 परिवारों को पर्याप्त मात्रा में कच्चा राशन संघ के कार्यकर्ताओं द्वारा उपलब्ध कराया गया। इन 50 परिवारों में करीब 235 सदस्य रहते हैं। दरअसल स्थानीय लोगों द्वारा जानकारी मिली थी कि इन परिवारों के पास राशन नहीं है। ऐसी जानकारी आते ही संघ की स्थानीय नगर ईकाई तुरंत ही इन लोगों की सेवा में जुट गई। मिज़ोरम के अभावग्रस्त परिवारों की सूची बनाने तथा सभी सामग्री को एकत्र करके उन्हें राशन सामग्री चर्च में दी गयी। सूची बनाने से लेकर वितरण करने तक का काम संघ के हस्तसाल क्षेत्र के नगर सह कार्यवाह श्री पूरन और मंडल कार्यवाह श्री रमेश ने अपने जिम्मे उठाया। मिज़ोरम के स्थानीय निवासियों द्वारा संचालित ZOMI चर्च के पास्टर पान खान खुप ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की इस सहायता के लिए धन्यवाद देकर अपना आभार व्यक्त किया।
इस पूरे मामले पर श्री पूरन और श्री रमेश ने बताया,"पूर्वोत्तर के लोग हमसे अलग नहीं, बल्कि हमारे ही परिवारीजन हैं। वे अपने राज्य से तो दूर हैं, मगर किसी पराए देश में नहीं बल्कि अपने ही घर में हैं।" आगे की योजना पूछने पर इन्होंने बताया," हमारा लक्ष्य इस क्षेत्र में रहने वाले हर अभावग्रस्त पूर्वोत्तर के परिवार तक भोजन व राशन पहुंचाना है।"
गौरतलब है कि हस्तसाल क्षेत्र में पूर्वोत्तर निवासियों की सबसे ज़्यादा संख्या हस्तसाल गांव बस्ती में है। यहां करीब 150 से ज़्यादा परिवार हैं जिनमें 900 से अधिक सदस्य रहते हैं। इनमें से 50 परिवारों को राशन उपलब्ध कराया जा चुका है और अन्य परिवारों का भी सर्वेक्षण किया जा रहा है। बहरहाल, जहां एक ओर पूर्वोत्तर के हक़ में बात करने का दावा करने वाले सामाजिक कार्यकर्ता आज उनके साथ भी नहीं दिखते वहीं संघ किसी यश, कीर्ति, श्रेय की आकांक्षा के बिना ही धरातल पर अनेक देशभक्त स्वयंसेवकों को लेकर देश के हर अभावग्रस्त जनता के साथ लॉकडाउन की इस समस्या में खड़ा है।